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अस्पताल में दो घंटे तड़पती रही बच्ची, फोन पर बातें करता रहा हाउसकीपिंग स्टाफ, वक्त पर ब्लड न मिलने से गई जान

लोकनायक अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से तीन वर्षीय बच्ची की करीब दो घंटे तड़पने के बाद मौत हो गई। बच्ची की...

Danik Bhaskar

Feb 15, 2018, 04:05 AM IST
लोकनायक अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से तीन वर्षीय बच्ची की करीब दो घंटे तड़पने के बाद मौत हो गई। बच्ची की तबियत दो दिन से खराब थी। निजी क्लीनिक में जांच के बाद पता चला कि उसका हीमोग्लोबिन 2.1 तक आ गया है, उसे तुरंत ब्लड की जरूरत है। मंगलवार शाम 6.30 बजे बच्ची के पिता जावेद उसे लेकर चाचा नेहरू अस्पताल पहुंचे। मगर वहां बच्ची के ब्लड ग्रुप का ब्लड नहीं था, इसलिए डॉक्टरों ने उसे लोकनायक अस्पताल रेफर कर दिया। जावेद करीब 8.30 बजे लोकनायक अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टर ने एक हाउसकीपिंग स्टाफ को पर्चा देकर ब्लड लाने के लिए भेजा। मगर जब वो एक घंटे बाद भी नहीं लौटा तो परिजनों ने डॉक्टर से नया पर्चा लिखकर किसी दूसरे कर्मचारी से ब्लड मंगाने के लिए कहा। मगर डॉक्टर ने मना कर दिया। फिर जावेद और उसके भाई उसे ढूंढ़ने निकले। करीब एक घंटे बाद वो किसी से फोन पर बात करते हुए मिला। जावेद ने ब्लड के बारे में पूछा तो वो झगड़ने लगा। इधर, ब्लड की कमी से बच्ची ने दम तोड़ दिया। फिर परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। पुलिस के दखल के बाद मामला शांत हुआ। मौजपुर के विजय मोहल्ला में रहने वाले जावेद ने पुलिस में शिकायत नहीं दी है। वे बोले, बच्ची का पोस्टमार्टम कराने की हिम्मत नहीं हुई।

सीएमओ ने हाउसकीपिंग स्टाफ की शिकायत की, 24 घंटे में दोषियों पर होगी कार्रवाई

लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ए.के बंसल के अनुसार सीएमओ ने मामले की शिकायत की है। इस पर कार्रवाई करते हुए तुरंत प्रभाव से एक कमेटी का गठन किया जाएगा और दोषियों पर 24 घंटे में कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ ने हाउसकीपिंग स्टाफ की शिकायत की है। इसके बाद भी अगर कोई व्यक्ति जांच में दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी। लोकनायक अस्पताल की उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रितु ने भी अस्पताल की ओर से लापरवाही की बात मानी है।

तीन साल की हुमायरा।



हीमोग्लोबिन लेवल 6 से कम तो खतरनाक

तीन साल की बच्ची का हीमोग्लोबिन लेवल 2.1 रह गया था। जबकि यह 13 होना चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक 6 से कम हीमोग्लोबिन लेवल जानलेवा होता है। अगर यह लेवल 4 पर आ जाए तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। यह स्तर 2 पर आने का मतलब है कि मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में तुरंत ब्लड चढ़ाने की आवश्यकता होती है। थोड़ी सी भी देरी जानलेवा हो सकती है।

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