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अवैध खनन का मायाजाल

पीयूष बबेले | नई दिल्ली piyush.babele@dbcorp.in गोवा में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने 7 फरवरी को पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया।...

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2018, 04:05 AM IST
अवैध खनन का मायाजाल
पीयूष बबेले | नई दिल्ली piyush.babele@dbcorp.in

गोवा में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने 7 फरवरी को पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। दिलचस्प यह है कि पिछले चार साल में यहां सिर्फ एक एफआईआर दर्ज हुई। वहीं, मध्य प्रदेश में इस दौरान 516 एफआईआर दर्ज की गईं। मगर यहां रोक नहीं लग सकी है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अदालत में छोटे-मोटे केस ही लड़े गए। पूरे आंकड़े जुटाकर अदालत का रुख नहीं किया गया। जबकि गोवा में संगठन ने मुहिम चलाकर सुप्रीम कोर्ट तक इसकी लड़ाई लड़ी। संगठन ने इसके लिए केंद्र द्वारा गठित जस्टिस एमबी शाह आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया। जिसमें कहा गया कि गोवा में 35 हजार करोड़ रुपए का अवैध खनन हो रहा है। खान मंत्रालय के मुताबिक, 2013-14 से 2016-17 के बीच गोवा में न कोई न्यायिक मामला दर्ज हुआ, न ही कोई जुर्माना लगा। जबकि मध्य प्रदेश में 40 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए और 1132 करोड़ रुपए का जुर्माना वसूला गया। इसे लेकर रायगढ़ के पर्यावरण कार्यकर्ता रमेश अग्रवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में छोटे-छोटे एरिया में अवैध खनन की लड़ाईयां तो जीती गई हैं। मगर पूरे राज्यों के आंकड़े जुटाना कठिन काम है। राज्य सरकारों के पास आंकड़े होते हुए भी वे सक्रियता नहीं दिखातीं। ऐसे में उनकी मंशा पर भी सवाल खड़े होते हैं।

गोवा में अवैध खनन लड़ाई जीतने वाले गोवा फाउंडेशन के डायरेक्टर क्लॉड अलवारिस ने बताया कि हम 1992 से यह लड़ाई लड़ रहे हैं। राज्य सरकार ने खनन के आंकड़े विधानसभा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स में अलग-अलग दिए। इसने हमारा पक्ष मजबूत किया। शाह आयोग की रिपोर्ट ने भी अहम भूमिका निभाई।



गोवा में पूर्ण पाबंदी और एफआईआर सिर्फ एक जबकि एमपी में 516 केस, फिर भी रोक नहीं

इसलिए नहीं मिल पाते सही आंकड़े



कितने मामले

41,299

मध्य प्रदेश

21,787

छत्तीसगढ़

439

यूपी

सैटेलाइट से निगरानी होगी


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