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52 में से 7 मंत्रालय ही हर माह जारी कर रहे रिपोर्ट, बाकी ने ताक पर रखे केंद्र के आदेश

तीन दशक पुराने नियम की हो रही है अनदेखी अमित कुमार निरंजन| नई दिल्ली amit.niranjan@dbcorp.in केंद्र सरकार के 52 मंत्रालयों में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 15, 2018, 04:05 AM IST

तीन दशक पुराने नियम की हो रही है अनदेखी

अमित कुमार निरंजन| नई दिल्ली amit.niranjan@dbcorp.in

केंद्र सरकार के 52 मंत्रालयों में से सिर्फ सात ही ऐसे हैं जो हर महीने अपनी मासिक रिपोर्ट सार्वजनिक करते हैं। रिपोर्ट जारी न करने वालों में पीएमओ के अधीन आने वाला कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय भी है।

तीन दशक पहले 1987 में राजीव गांधी सरकार ने मंत्रालयों के मासिक रिपोर्ट सार्वजनिक करने का नियम बनाया था ताकि कामकाज की मॉनिटरिंग की जा सके और भ्रष्टाचार पर लगाम के साथ-साथ जवाबदेही भी तय की जा सके। लेकिन हकीकत में ऐसा हुआ नहीं। उसके बाद से दस सरकारों ने इस नजरअंदाज कर दिया। अब मोदी सरकार ने इसे लागू तो किया लेकिन कई मंत्रालयों ने इसे अनुसना कर दिया। केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश के बाद 23 जून 2016 में कैबिनेट सचिवालय ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया था कि विभाग के कामकाज की रिपोर्ट हर महीने जारी करें। इस पर सरकार ने दलील दी थी सभी मंत्रालयों की रिपोर्ट मासिक तौर से सार्वजनिक नहीं कर सकते। तब आयोग ने आदेश दिया था कि गोपनीय रिपोर्ट को छोड़कर सभी मंत्रालय मासिक रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करें।

तीन दशक पुराने नियम की हो रही है अनदेखी

अमित कुमार निरंजन| नई दिल्ली amit.niranjan@dbcorp.in

केंद्र सरकार के 52 मंत्रालयों में से सिर्फ सात ही ऐसे हैं जो हर महीने अपनी मासिक रिपोर्ट सार्वजनिक करते हैं। रिपोर्ट जारी न करने वालों में पीएमओ के अधीन आने वाला कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय भी है।

तीन दशक पहले 1987 में राजीव गांधी सरकार ने मंत्रालयों के मासिक रिपोर्ट सार्वजनिक करने का नियम बनाया था ताकि कामकाज की मॉनिटरिंग की जा सके और भ्रष्टाचार पर लगाम के साथ-साथ जवाबदेही भी तय की जा सके। लेकिन हकीकत में ऐसा हुआ नहीं। उसके बाद से दस सरकारों ने इस नजरअंदाज कर दिया। अब मोदी सरकार ने इसे लागू तो किया लेकिन कई मंत्रालयों ने इसे अनुसना कर दिया। केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश के बाद 23 जून 2016 में कैबिनेट सचिवालय ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया था कि विभाग के कामकाज की रिपोर्ट हर महीने जारी करें। इस पर सरकार ने दलील दी थी सभी मंत्रालयों की रिपोर्ट मासिक तौर से सार्वजनिक नहीं कर सकते। तब आयोग ने आदेश दिया था कि गोपनीय रिपोर्ट को छोड़कर सभी मंत्रालय मासिक रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करें।

सूचना आयोग ने दिलाई सरकार को नियम की याद

आयोग ने कहा-दिक्कत क्या है

मंत्रालयों द्वारा मासिक रिपोर्ट बनाने के संबंध में केंद्रीय सूचना आयोग ने 2011 में 1987 का दस्तावेज सार्वजनिक करने का आदेश दिया। जिससे पता चला था कि मासिक रिपोर्ट बनाने का नियम राजीव गांधी सरकार के समय का है। इसके बाद ही आयोग ने कहा था कि यदि नियम 1987 का है तो इसे लागू करने में दिक्कत क्या है।

सरकार ने कहा-ढांचा तैयार नहीं | डीओपीटी और पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह का कहना है कि इस आदेश को कितने मंत्रालयों ने माना और कितनों ने नहीं, इस बारे में हमने अभी तक कोई सरकारी ढांचा तैयार नहीं किया है।

एक्सपर्ट व्यू

ऐसा तंत्र बने कि रियल टाइम रिपोर्ट मिले

केन्द्रीय सूचना आयोग के पूर्व सूचना आयुक्त शैलेष गांधी का कहना है कि भ्रष्टाचार कम करने और जवाबदेही बढ़ाने का तरीका है कि सरकार ज्यादा से ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करे। ऐसा तंत्र बने कि विभागों की रियल टाइम रिपोर्ट लोगों को मिले। डेली रिपोर्ट भी बने। इसमें जारी किए टेंडरों, खर्च जैसी जानकारी उसी दिन वेबसाइट पर डाली जाए।

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