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मैं आधार जज नहीं हूं, राष्ट्रवादी जज होना पसंद करूंगा: जस्टिस चंद्रचूड़

वकील चिल्लाया तो कहा- न सरकार का पक्ष ले रहे और न एनजीओ की लाइन पर चलेंगे एजेंसी | नई दिल्ली आधार की वैधता पर...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 04:10 AM IST
मैं आधार जज नहीं हूं, राष्ट्रवादी जज होना पसंद करूंगा: जस्टिस चंद्रचूड़
वकील चिल्लाया तो कहा- न सरकार का पक्ष ले रहे और न एनजीओ की लाइन पर चलेंगे

एजेंसी | नई दिल्ली

आधार की वैधता पर सुनवाई कर रही संविधान पीठ में शामिल जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ गुरुवार को याचिकाकर्ताओं के वकील पर भड़क गए। जज के बार-बार सवाल करने पर वकील ने आपत्ति जताई तो जस्टिस चंद्रचूड़ बोले, “मैं आधार जज नहीं हूं। मैं राष्ट्रवादी जज होना पसंद करूंगा।’

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने केंद्र के एक हलफनामे का जिक्र करते हुए कहा, “सरकार ने वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि योजनाएं आधार से जोड़कर हर साल करीब 11 बिलियन डॉलर बच रहे हैं। सरकार ने कहा था कि विश्व बैंक स्वतंत्र संस्था है और वह “पफरी’ यानी डेटा बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं करती। लेकिन यह रिपोर्ट भरोसे लायक नहीं है। पिछले दिनों संस्था प्रमुख पॉल रोमर ने डेटा में ईमानदारी नहीं होने का आरोप लगा इस्तीफा दे दिया था।’ इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा, “डेटा कितना बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। याचिकाओं में इसका जिक्र कहां है।’ संतोषजनक जवाब देने के बजाय जब दीवान चिल्लाने लगे तो जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “आवाज ऊंची करने का कोई मतलब नहीं है।

जब भी सवाल पूछते हैं तो आप आरोप लगाते हैं कि हम वैचारिक रूप से समर्पित हैं। हम सरकार का पक्ष नहीं ले रहे, लेकिन एनजीओ की लाइन पर भी नहीं चलेंगे। आपका रवैया तो ऐसा है कि मैं आपके साथ नहीं हूं तो आधार जज हूं। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं सिर्फ संविधान को लेकर प्रतिबद्ध हूं। मैं राष्ट्रवादी जज होना पसंद करूंगा।’ इस पर दीवान ने तुरंत माफी मांग ली। बेंच में शामिल जस्टिस एके सिकरी ने भी कहा कि केंद्र की दलीलों के दौरान उनसे भी सवाल पूछे जाएंगे।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीआईएसएफ से कहा- टैटू की वजह से नौकरी देने से इनकार नहीं किया जा सकता

मुुंबई|
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के सोलापुर के एक युवक को राहत देते हुए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) से कहा है कि टैटू की वजह से नौकरी देने से इनकार नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता श्रीधर पखारे को सीआईएसएफ की ड्यूटी में टैटू से कोई बाधा नहीं आएगी और वह सभी योग्यता पूरी करते हैं, इसलिए नियम में अपवाद जोड़ते हुए उसे नियुक्ति दी जाए। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पखारे की धार्मिक भावना का आदर करना चाहिए। पखारे ने सीआईएसएफ में ड्राइवर पद के लिए आवेदन किया था। उसकी भर्ती हो गई थी, लेकिन दाएं हाथ में एक टैटू होने की वजह से नियुक्ति देने से इनकार कर दिया गया था, जिसे उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उसने टैटू को हटाने के लिए सर्जरी भी कराई, लेकिन वह पूरी तरह से नहीं मिटा। पिछले दिनों इसी तरह के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने वायुसेना के फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें उसने टैटू की वजह से एयरमैन के पद पर एक शख्स की नियुक्ति रद्द कर दी थी। उसने अपनी बांह पर ऐसा टैटू बनवा लिया था जिसे कभी मिटाया या हटाया नहीं जा सकता था।

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