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इकोनॉमी में तेजी के लिए इन्फ्रा को 5.9 लाख करोड़

नई दिल्ली | जैसी आशंका थी, बजट में सरकार का घाटा बढ़ गया। मौजूदा साल में 3.2% के लक्ष्य की तुलना में यह 3.5% रहेगा। 2018-19 का...

Danik Bhaskar | Feb 02, 2018, 04:10 AM IST
नई दिल्ली | जैसी आशंका थी, बजट में सरकार का घाटा बढ़ गया। मौजूदा साल में 3.2% के लक्ष्य की तुलना में यह 3.5% रहेगा। 2018-19 का पुराना लक्ष्य 3% था, अब 3.3% रहेगा। घाटा बढ़ने से भारत की रेटिंग घटने का खतरा बन गया है। बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 5.97 लाख करोड़ का प्रावधान है। यह 2017-18 के संशोधित अनुमान से 21% ज्यादा है। रेल और सड़क के लिए रिकॉर्ड आवंटन हुआ है। पूरे साल में 9,000 किमी हाईवे बनाने का लक्ष्य है। सड़क मंत्रालय के लिए आवंटन 64,900 करोड़ से बढ़कर 71,000 करोड़ हुआ। हालांकि मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए आवंटन 20% घट गया है। 2018-19 में मेट्रो के लिए 14,265 करोड़ दिए गए हैं।

हर कंपनी की होगी यूनिक आईडी

ईज ऑफ बिजनेस

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प्वाइंट तलाशे हैं ईज ऑफ बिजनेस के लिए सरकार ने जहां प्रक्रिया को आसान बनाना जरूरी है। राज्यों से इन पर तेजी से काम करने के लिए कहा जाएगा।

विनिवेश से 80,000 करोड़

विनिवेश के लिए 24 कंपनियां चुनी गई हैं। विनिवेश से 80,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य है। इस साल 72,500 करोड़ के लक्ष्य की तुलना में सरकार को एक लाख करोड़ मिलने की उम्मीद है।

बीमा कंपनियों का विलय

तीन सरकारी बीमा कंपनियों- नेशनल इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया एश्योरेंस और ओरिएंटल इंडिया इंश्योरेंस को मिलाकर एक बीमा कंपनी बनाई जाएगी। इसके बाद नई कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग होगी।

25% पैसा बांड से

आधार की तरह सभी छोटी-बड़ी कंपनियों का यूनिक आईडी नंबर होगा। बड़ी कंपनियों को जरूरत का 25% पैसा बांड से जुटाना होगा। इसके लिए सेबी नियम बनाएगी।

दिवालिया कार्रवाई में

टैक्स छूट

कंपनियों की नीलामी आकर्षक बनाने के लिए मिनिमम अल्टरनेट टैक्स में छूट। एनसीएलटी के पास इन्सॉल्वेंसी के तहत 500 मामले हैं।