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एडवांस टेक्नोलॉजी और बड़े अवसरों ने बदला आज का थिएटर : मनोज जोशी

यह कहना है थिएटर की दुनिया में 2 दशक से भी ज्यादा का समय बिता चुके और हिंदी सिनेमा के जाने माने एक्टर मनोज जोशी का।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 11, 2017, 01:55 AM IST

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    नई दिल्ली. एक वक्त था जब लोग थिएटर में केवल इसलिए आते थे ताकि उन्हें टीवी सीरियल में काम मिले और फिर फिल्मों में धीरे से एंट्री हो जाए, क्योंकि उन दिनों थिएटर में इतने पैसे नहीं मिलते थे कि आर्टिस्ट सरवाइव कर सके। मगर देखते ही देखते टेक्नोलॉजी, थिएटर में कई टर्निंग प्वाइंट्स ले कर आई। जिसने न केवल थिएटर के स्वरूप को बदला बल्कि आर्टिस्ट्स को पहचान के साथ पैसे कमाने का मौका भी दिया। यह कहना है थिएटर की दुनिया में 2 दशक से भी ज्यादा का समय बिता चुके और हिंदी सिनेमा के जाने माने एक्टर मनोज जोशी का। मनोज बीते दिनों शहर के एक कार्यक्रम में शामिल हुए। भास्कर से हुई खास मुलाकात में मनोज ने थिएटर में आए बड़ बदलावों के बारे में कई बातें बताईं।
    माइक की सेटिंग पर डिपेंड थी काबिलियत
    मनोज ने बताया, मैंने जब थिएटर करना शुरू किया था तब स्टैंडिंग माइक्स होते थे। एक जगह खड़े हो कर हमें परफॉर्म करना होता था। हमारी पूरी काबलियत माइक की सही सेटिंग्स पर निर्भर करती थी। फिर माइक्रो माइक आ गए। थिएटर की दुनिया में सबसे पहला और बड़ टर्निंग प्वाइंट यही था। जिससे लाइव एक्टिंग करना आसान होता गया।

    3D टेक्नोलॉजी ने बढ़ाए दर्शक
    पहले 500 वॉट के बल्ब के नीचे खड़े होकर स्टेज प्ले होते थे। जितनी देर का एक्ट होता था उतनी देर गरमी में हालत खराब हो जाती थी। मगर अब एलईडी लाइट्स हैं, जिनमें 3डी इफेक्ट्स देने की क्षमता है। अब इन इफेक्ट्स के साथ तालमेल बैठा कर एक्टिंग करना काफी दिलचस्प होता है। ऐसे प्ले के दर्शक भी तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनमें 3डी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि उन्हें यह प्ले फिल्म की तरह लगते हैं।
    बन रहे हैं बड़े बजट के नाटक
    अब थिएटर में बड़े बजट के प्ले बनाए जा रहे हैं इस इंडस्ट्री का यह तीसरा सबसे बड़ा बदलाव है। पहले नाटक में सिर्फ कहानी और पात्र होते थे। मगर अब आलीशान सेट , डिजाइनर कपड़े और खूबसूरत मेकअप भी होता है। यह न केवल नाटक के बजट को बढ़ाता है बल्कि उसे खास भी बनाता है।
    बढ़े हैं अवसर
    नाटक में पहले चुनिंदा डायरेक्टर और एक्टर होते थे मगर अब हिंदी सिनेमा के बड़े बड़े डायरेक्टर भी थिएटर में हाथ आजमा रहे हैं। हर किसी को नए चेहरों की तलाश है इसलिए अब थिएटर में अवसरों की कमी नहीं है। यहां फिल्मों और टीवी सीरियल्स से अधिक पैसा कमाया जा सकता है।
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