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दिल्ली में 2 साल पहले ही मिलेगा बीएस-6 पेट्रोल-डीजल; दावा- वाहनों से होने वाला प्रदूषण 80% तक होगा कम

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: 1 अप्रैल 2018 से शुरु होगी बिक्री, पूरे देश में मिलेगा 2020 से

Dainik Bhaskar

Nov 16, 2017, 07:25 AM IST
पेट्रोलियम मंत्रालय ने ये भी कहा, दिल्ली में बीते एक-दो सालों में बढ़ी स्मॉग और पॉल्यूशन की समस्या से निपटने के लिए ये फैसला लिया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने ये भी कहा, दिल्ली में बीते एक-दो सालों में बढ़ी स्मॉग और पॉल्यूशन की समस्या से निपटने के लिए ये फैसला लिया गया है।

नई दिल्ली. पेट्रोलियम मंत्रालय ने दिल्ली में पेट्रोल-डीजल से होने वाले पॉल्यूशन को कम करने के लिए फैसला लिया है। इसके तहत बीएस-6 फ्यूल की बिक्री अप्रैल 2018 से शुरू की जाएगी। दावा है कि बीएस-6 फ्यूल से गाड़ियों से होने वाला पॉल्यूशन 80% तक कम हो जाएगा। इससे पहले बीएस-6 को 2020 में लाने का फैसला लिया गया था। मंत्रालय ने ये भी कहा, दिल्ली में बीते एक-दो सालों में बढ़ी स्मॉग और पॉल्यूशन की समस्या से निपटने के लिए ये फैसला लिया गया है।

बीएस-6 फ्यूल से फायदे

1. फ्यूल जलने से निकलने वाले हाइड्रोकॉर्बन से सिर दर्द की शिकायत होती है। बीएस-6 ईंधन इसके असर को 30% कम कर देगा।
2. बीएस-6, 70% कार्बन मोनो ऑक्साइड को कम कर देगा। इस गैस से ही सरदर्द और उल्टी की शिकायत होती है।
3. 50% असर कम हो जाएगा बीएस-6 फ्यूल से पार्टिकुलेट मैटर का। इससे फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है।
4. नए नॉर्म्स में बीएस-6 को सबसे प्योर फ्यूल माना गया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वाहनों में इसके इस्तेमाल से पॉल्यूशन में कमी आएगी।
5. नाइट्रोजन से खांसी होती है, आंखों पर असर होता है। बीएस-6 ईंधन के इस्तेमाल से यह असर 70% तक कम हो जाएगा।

भारत स्टेज (बीएस)-6 वो सब कुछ जो आप जानना चाहते है

- व्हीकल्स में फ्यूल से होने वाले पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए एक स्टैंडर्ड तय किया जाता है। इसे एमिशन नॉर्म्स कहते हैं।

- बीएस का मतलब है-भारत स्टेज (जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी में बदलाव आता है एक्सपेरिमेंट्स के जरिए पॉल्यूशन कम करने के तरीके तलाशे जाते हैं, जिसके साथ इमिशन नॉर्म्स भी बदलते हैं)

- 1 अप्रैल 2017 से भारत में बीएस-4 नॉर्म्स लागू किए गए। इसके बाद देश में बीएस-5 को छोड़कर सीधे बीएस-6 स्टैंडर्ड लागू होने हैं।

- केंद्र सरकार ने इसके लिए 2020 की समय सीमा तय की थी, लेकिन दिल्ली में अब बीएस-6 स्टैंडर्ड का फ्यूल 2 साल पहले ही मिलने लगेगा।

- इन नॉर्म्स के तहत व्हीकल्स तैयार करना हर कंपनी के लिए जरूरी होता है, ताकि इससे एयर पॉल्यूशन कम किया जा सके। नए स्टैंडर्ड के तहत फ्यूल भी बदला जाता है। दिल्ली में अभी केवल फ्यूल नए नॉॅर्म्स के हिसाब सेमिलेगा, गाड़ियों पर यह नॉर्म्स अभी लागू नहीं होंगे।

- कंपनियों से 1 अप्रैल 2019 तक एनसीआर के अन्य शहरों में भी बीएस-6 ग्रेड के फ्यूल को बेचने की संभावनाएं तलाशने के लिए कहा गया है। इससे दिल्ली और आसपास के शहरों में पॉल्यूशन की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

Q&A में जानें- गाड़ियों से निकलने वाले कार्बन की मात्रा घटेगी
एक्सपर्ट्स: आशीष जैन, डायरेक्टर इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन और उस्मान नसीम, सी. रिसर्च असोसिएट, सीएसई


Q. बीएस-4 गाड़ियों में बीएस-6 फ्यूल का इस्तेमाल करने पर यह कितना असरकारी होगा?
A. बीएस-4 नॉर्म्स की गाड़ियों में बीएस-6 नॉर्म्स का पेट्रोल-डीजल जाएगा, तो हवा में वाहनों से निकलने वाली टॉक्सिक गैसें कम निकलेंगी।

Q. गाड़ियों में बीएस-6 नॉर्म्स का क्या होगा?
A. कई विदेशी कंपनियों न बीएस-6 नार्म्स की गाड़ियों की मैन्यूफैक्चरिंग भी शुरू कर दी है, पर ऑटो इंडस्ट्री स जुड़े स्पेशलिस्ट के मुताबिक, भारत में गाड़ियों के लिए 2020 में यह नॉर्म्स लागू होना है। इंडस्ट्री इसी लिहाज से काम कर रही है। अब दिल्ली में नए नॉर्म्स के हिसाब से अभी गाड़ी उतारना संभव नहीं है।

Q. पॉल्यूशन घटाने में कैसे मददगार है?
A.
पीएम 2.5 की वैल्यू 400 एमजीसीएम जाती है तो उसमें 120 एमजीसीएम से ज्यादा का कॉन्ट्रिब्यूशन वाहनों से होने वाले पॉल्यूटेड पार्टिकल्स से होता है। बीएस-6 फ्यूल के आने से पार्टिकुलेट मैटर में इनकी 20 से 40 एमजीसीएम तक ही हिस्सेदारी रहेगी।

Q. नया फ्यूल कितना महंगा पड़ेगा?
A. 2020 की डेडलाइन के मुताबिक, ज्यादा स्वच्छ पेट्रोल-डीजल बनान के लिए ऑयल रिफाइनरियों को 28,000 करोड़ रुपए निवेश करने की जरूरत होगी। हालांकि फ्यूल महंगा होगा या नहीं, यह उस वक्त क्रूड की कीमत समेत अन्य फैक्टर्स पर निर्भर करेगा।

कंपनियों से 1 अप्रैल 2019 तक एनसीआर के अन्य शहरों में भी बीएस-6 ग्रेड के फ्यूल को बेचने की संभावनाएं तलाशने के लिए कहा गया है। कंपनियों से 1 अप्रैल 2019 तक एनसीआर के अन्य शहरों में भी बीएस-6 ग्रेड के फ्यूल को बेचने की संभावनाएं तलाशने के लिए कहा गया है।
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पेट्रोलियम मंत्रालय ने ये भी कहा, दिल्ली में बीते एक-दो सालों में बढ़ी स्मॉग और पॉल्यूशन की समस्या से निपटने के लिए ये फैसला लिया गया है।पेट्रोलियम मंत्रालय ने ये भी कहा, दिल्ली में बीते एक-दो सालों में बढ़ी स्मॉग और पॉल्यूशन की समस्या से निपटने के लिए ये फैसला लिया गया है।
कंपनियों से 1 अप्रैल 2019 तक एनसीआर के अन्य शहरों में भी बीएस-6 ग्रेड के फ्यूल को बेचने की संभावनाएं तलाशने के लिए कहा गया है।कंपनियों से 1 अप्रैल 2019 तक एनसीआर के अन्य शहरों में भी बीएस-6 ग्रेड के फ्यूल को बेचने की संभावनाएं तलाशने के लिए कहा गया है।
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