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जब प्रदूषण 377 था तब स्कूल बंद किए, अब 492 पर है तो खोल दिए

Bhaskar News | Last Modified - Nov 14, 2017, 04:29 AM IST

हालात: 8 नवंबर की तुलना में 13 की सुबह एक्यूआई 113 ज्यादा रहा
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    सुबह 11 बजे: बदरपुर बॉर्डर क्षेत्र में प्रदूषण की चादर।
    नई दिल्ली. दिल्ली में सोमवार की सुबह एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (एक्यूआई) सबसे ज्यादा 492 के लेवल पर रहा। ऐसे में बच्चे जानलेवा पॉल्यूशन के बीच स्कूल पहुंचे। दिल्ली सरकार ने 8 नवंबर को पॉल्यूशन के चलते नौ से 11 नवंबर तक स्कूल बंद रखने का फैसला लिया था। तब सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के 15 पॉल्यूशन मॉनिटरिंग स्टेशनों में सुबह छह से नौ बजे के बीच एक्यूआई 377 दर्ज हुआ था, लेकिन सोमवार सुबह यह 492 दर्ज हुआ। रविवार को जब स्कूल खाेलने का निर्णय लिया गया, तब भी एक्यूआई 470 के करीब था। डॉक्टरों का कहना है कि ये प्रदूषण बच्चों के फेफड़ों पर इतना असर करता है कि जिंदगी भर के लिए अस्थमा हो सकता है।
    स्कूल प्रशासन: काेर्स पूरा करना जरूरी, प्रदूषण को देखते हुए बनाई जाए नीति
    एयर क्वॉलिटी के मुद्दे पर एक्टिंग वाइस प्रेजिडेंट एवीएस लक्ष्मी ने कहा कि दिल्ली की एक्यूआई बेहद खराब है। सोमवार को सरकार के स्कूलों को खोलने की घोषणा पर स्कूल खोले गए। बच्चों का स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन स्कूल प्रशासन पर भी समय पर कोर्स पूरा करने की जिम्मेदारी होती है। पॉल्यूशन को देखते हुए सरकार को एक एजुकेशन पॉलिसी बनानी चाहिए।
    ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन: सरकार को अभी नहीं लेना चाहिए था स्कूल खोलने का फैसला
    ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रेजिडेंट अशोक अग्रवाल ने बताया, हमने दिल्ली सरकार को पॉल्यूशन मामले से अवगत कराया था। स्कूलों की छुट्टियां 15 नवंबर तक कर देनी चाहिए थी। 15 को रिव्यू करना चाहिए था कि प्रदूषण की कैसी स्थिति है। रविवार को इसका रिव्यू नहीं किया गया। पैरेंट्स को भी जागरूकता लानी चाहिए। उन्हें बच्चों के स्वास्थ्य की चिंता है। एेसी स्थिति में बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहिए।
    एजुकेशन एक्सपर्ट्स: निजी स्कूल पॉल्यूशन पर हेल्थ रिव्यू जरूर करें
    एजुकेशन एक्सपर्ट और एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम के फाउंडर सुमित वोहरा का कहना है कि निजी स्कूलों को आगे बढ़कर रोज पॉल्यूशन की स्थिति देखते हुए स्कूल बंद रखने या खोलने का फैसला लेना चाहिए। वहीं दिल्ली सरकार ने रविवार को पॉल्यूशन की स्थिति का रिव्यू नहीं किया और स्कूल खोलने के आदेश जारी कर दिए। रविवार और सोमवार दोनों दिन पॉल्यूशन लेवल काफी खतरनाक स्तर पर दर्ज हुआ। एेसे में बच्चों के स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ भी नहीं है। एग्जाम, कोर्स पूरा करवाना जैसी सब चीजें बाद में हैं। सबसे ऊपर बच्चों का स्वास्थ्य है। स्वास्थ्य ही सही नहीं रहेगा तो वह पढ़ भी नहीं पाएंगे।
    प्रदूषण के संपर्क में आने से बच्चों को अस्थमा और कैंसर का खतरा
    इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन की डिप्टी डायरेक्टर राधा गोयल ने बताया बच्चों के फेफड़े बेहद संवेदनशील होते हैं और उम्र के साथ ग्रो करते हैं। एेसे में वयस्कों की तुलना में प्रदूषण 60 प्रतिशत ज्यादा तेजी से उन पर असर डालता है। इससे आंखों में जलन, अस्थमा, कैंसर जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं। वहीं नारायणी हॉस्पिटल के एमडी फिजिशियन डॉ. विनय यादव ने बताया कि बच्चों की लाइफ पर यह सीधा असर करता है। उनकी लाइफ 10 साल तक घट जाती है। प्रदूषण इनके फेफड़ों की कोशिकाओं में इतना अंदर चला जाता है कि यह जिंदगी भर के लिए अस्थमा जैसी बीमारी कर सकता है।
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    डॉक्टर बोले, प्रदूषण से जिंदगीभर के लिए हो सकता है अस्थमा।
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Web Title: Delhi S Air Quality Index Was At Highest Level
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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