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यहां गाद से बनेगी गैस, हर साल होगी 50 लाख की कमाई

पहल: स्लज से तैयार खाद बेहद उपजाऊ होती है

Danik Bhaskar | Nov 17, 2017, 07:34 AM IST

हरिद्वार. जल संस्थान के अभियंता अजय कुमार की पहल पर अब एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) में सीवरेज जल के शोधन से निकलने वाली स्लज (गाद) से गोबर गैस तैयार होगी। इसके व्यावसायिक इस्तेमाल से सरकार को सालाना 50 लाख तक का राजस्व भी मिलेगा। योजना को शासन से स्वीकृति मिलने की बाद अब टेंडर निकालने की तैयारी है। हरिद्वार में सीवरेज जल के शोधन को तीन एसटीपी लगी हैं। इनमें से दो 18 व 27 एमएलडी की जगजीतपुर और 18 एमएलडी की सराय में है। इन सभी से सीवरेज जल के शोधन के बाद बड़ी मात्रा में स्लज (गाद) निकलती है। इसके निस्तारण की व्यवस्था न होने से हर वर्ष टनों गाद और उससे बनने वाली गोबर गैस को जलाकर नष्ट किया जाता रहा। इससे प्रदूषण तो फैलता ही है, कीमती गैस भी नष्ट होती है।


अब इस मामले में जल संस्थान ने नई पहल की है। संस्थान के अभियंता अजय कुमार ने बताया कि स्लज से गोबर गैस बनाने व उसके व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए विश्व स्तर पर इसे लेकर होने वाले प्रयोगों का अध्ययन किया गया। इस बाबत शासन को भेजे प्रस्ताव में स्लज से गोबर गैस बनाने की तैयारी, उसके व्यावसायिक इस्तेमाल, बिक्री आदि का विस्तृत ब्योरा दिया गया था।

प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है और अब जल संस्थान मार्केट सर्वे कर ‘अभिरुचि टेंडर’ निकालने की तैयारी में है। जो कंपनियां इस काम में रुचि दिखाएंगी, उनसे काम के बदले राजस्व की डिमांड संबंधी टेंडर मांगे जाएंगे।

उन्होंने दावा किया कि जगजीतपुर स्थित 18 व 27 एमएलडी वाली एसटीपी से निकलने वाली स्लज के इस्तेमाल से तैयार गैस से हर वर्ष 50 लाख तक का राजस्व मिलने की उम्मीद है। इसके लिए निकलने वाली स्लज की कुल वास्तविक मात्रा की गणना की जा रही है।

खाद में भी स्लज का इस्तेमाल
एसटीपी में सीवरेज जल के शोधन के बाद निकलने वाली स्लज का इस्तेमाल खाद के रूप में भी किया जा सकता है। अधिशासी अभियंता अजय कुमार बताते हैं कि स्लज से तैयार खाद बेहद उपजाऊ होती है और इसकी मांग भी काफी है।

जगजीतपुर में लगा है गोबर गैस प्लांट
सीवरेज जल के शोधन से निकलने वाली स्लज से गोबर गैस बनाने के लिए संसाधन जगजीतपुर एसटीपी में पहले से ही उपलब्ध हैं। 1990 में 18 एमएलडी की एसटीपी के निर्माण के वक्त ही यहां स्लज के निस्तारण को गोबर गैस प्लांट लगाया गया था। इसका उचित इस्तेमाल आज तक नहीं हुआ। इस प्लांट से 27 एमएलडी वाली एसटीपी भी जुड़ी हुई है और जरूरत पड़ने पर इससे प्लांट तक स्लज आसानी से भेजी जा सकती है।