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हैंडमेड फर्नीचर, प्लास्टिक प्रोडक्ट और बाथ फिटिंग्स पर घट सकता है टैक्स

जीएसटी काउंसिल की बैठक 9-10 नवंबर को।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 06, 2017, 05:02 AM IST

  • हैंडमेड फर्नीचर, प्लास्टिक प्रोडक्ट और बाथ फिटिंग्स पर घट सकता है टैक्स
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    1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद हर महीने काउंसिल की समीक्षा बैठक हो रही है। - फाइल
    नई दिल्ली. प्लास्टिक प्रोडक्ट, बाथ फिटिंग्स, शैंपू जैसी रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजें और हैंडमेड फर्नीचर सस्ते हो सकते हैं। जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में इन पर टैक्स रेट घटाने पर विचार हो सकता है। इसके अलावा रिटर्न फाइलिंग के नियमों को भी आसान बनाया जा सकता है। काउंसिल की अगली मीटिंग गुवाहाटी में 9-10 नवंबर को होगी। 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद हर महीने काउंसिल की समीक्षा बैठक हो रही है।
    - एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रोजाना इस्तेमाल की जाने वाली कुछ वस्तुएं अभी 28% टैक्स ब्रैकेट में हैं। इन्हें 18% की कैटेगरी में लाया जा सकता है।
    - प्लास्टिक बनाने वाली कंपनियों ने सरकार से कहा है कि 80% यूनिट छोटे और एमएसएमई हैं।
    ज्यादातर बाथ फिटिंग्स पर 28% टैक्स, 18% हो सकता है
    फर्नीचर: फर्नीचर पर अभी 28% टैक्स है। लेकिन लकड़ी के ज्यादातर फर्नीचर असंगठित क्षेत्र में कारीगर हाथों से बनाते हैं। मध्यवर्गीय परिवारों में इनका इस्तेमाल होता है। इसलिए टैक्स घटाने की मांग है।
    बाथ फिटिंग्स: कुछ प्रोडक्ट पर तो 18% टैक्स है, लेकिन शावर, सिंक, वॉश बेसिन, टॉयलेट पैन-सीट कवर, फ्लश सिस्टर्न जैसी वस्तुओं पर अभी 28% टैक्स लागू है। टैक्स घटाने जाने के आसार हैं।
    कंप्रेशर:कंप्रेशर और तौल मशीनें अभी 28% टैक्स कैटेगरी में हैं। इन्हें 18% कैटेगरी में लाया जा सकता है।
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    प्लास्टिक प्रोडक्ट, बाथ फिटिंग्स, शैंपू जैसी रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजें और हैंडमेड फर्नीचर सस्ते हो सकते हैं। - सिम्बॉलिक
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