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60 साल में केवल एक को सजा हुई वो भी 28 दिन की

अमित कसाना | Last Modified - Nov 11, 2017, 05:55 AM IST

राजधानी में 1700 अवैध कॉलोनियां हैं, 90% भवन सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं।
  • 60 साल में केवल एक को सजा हुई वो भी 28 दिन की
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    नई दिल्ली. दिल्ली में अफसरों की मिलीभगत से बड़े स्तर पर अवैध निर्माण होता है। हाईकोर्ट भी कह चुका है प्रदूषण का सबसे बड़ा खलनायक है- निर्माण कार्य की धूल। फिर भी अवैध निर्माण को लेकर नियम इतने कमजोर हैं कि 60 साल के इितहास में सिर्फ एक व्यक्ति को सजा मिली है,वो भी सिर्फ 28 दिन की और महज एक हजार रु. का जुर्माना लगाया गया।
    मामला अक्टूबर 2016 का है। दक्षिणी निगम ने लाजपतनगर-2 कस्तूरबा निकेतन में रहने वाले एक व्यक्ति को मकान में अवैध निर्माण पर नोटिस दिया। निगम की सूचना पर पुलिस ने उसके खिलाफ दिल्ली नगर निगम एक्ट-1957 के तहत एफआईआर दर्ज की। साकेत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। सेशन कोर्ट ने 1 माह कैद की सजा व एक हजार जुर्माना लगाया। सेशन कोर्ट के आदेश को सत्र न्यायाधीश के पास चुनौती दी गई। सत्र न्यायाधीश के अर्जी खारिज करने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा। इस बीच सुरेश 28 दिन जेल में काट चुका था। हाईकोर्ट ने 28 दिन तक की जेल को पर्याप्त मानते हुए उसे राहत दी और जुर्माने के बाद रिहा करने का निर्देश दे दिया।

    एनसीआर दिल्ली कानून अधिनियम की आड़ में अवैध निर्माण जारी है। यह अधिनियम 1 जून, 2014 तक के सभी अनधिकृत निर्माणों को कार्रवाई से बचाता है।
    1. बिना पानी डाले ही लगाई जा रही झाड़ू
    एमसीडी ने सड़कों पर धूल साफ करने के आदेश दिए हैं। लेकिन सफाई कर्मचारी बाराखंभा रोड पर बिना पानी छिड़काव किए ही सफाई करते दिखे। जिसकी धूल परेशानी बढ़ा रही है। एनडीएमसी के पीआरओ एमएस शेरावत ने कहा कि तीन दिन से फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बौछार कर रही हैं, जिससे धूल जमा नहीं हो रही।
    2. अस्पताल के पीछे चल रहा निर्माण कार्य
    आरएमएल अस्पताल के पीछे डॉक्टरों के हॉस्टल और मोरचरी के पास निर्माण कार्य बदस्तूर जारी है। मजदूर सीमेंट मिलाने व उठाने का काम कर रहे हैं। इस पर यहां के डायरेक्टर डॉ. वीके तिवारी से बात करने की कोशिश की गई। दस से अधिक बार कॉल किया गया। मैसेज भी किया गया पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
    3. पेड़ों पर छिड़काव से घरों में घुस रहा पानी
    रंजीत सिंह फ्लाईओवर के पास फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पेड़ों से धूल हटाने के लिए छिड़काव कर रही हैं। आधा पानी लोगों के घरों में और छतों पर जा रहा है। सड़क किनारे खड़े ठेलेवालों और फुटपाथ पर दुकान सजाए लोगों को अपना सामान समेटकर वहां से हटना पड़ा। इन लोगों को पहले से छिड़काव की कोई सूचना नहीं थी।
    दोपहिया को ऑड-ईवन से बाहर क्यों रखा गया?
    ये 5 सवाल पूछे: एनजीटी ने दिल्ली सरकार द्वारा अॉड-ईवन लागू करने के फैसले को लेकर ये पांच सवाल पूछे हैं...
    1. दोपहिया वाहनों को ऑड-ईवन से बाहर क्यों रखा गया? प्रदूषण में इनकी कितनी हिस्सेदारी है?
    2. छोटी पेट्रोल कार कितना प्रदूषण करती है? दिल्ली के प्रदूषण में इसका कितना योगदान है? महिलाओं को छूट क्यों?
    3. ऑड-ईवन के दौरान 500 बसें चलेंगी, इनमें कितनी डीजल,पेट्रोल व सीएनजी हैं? इनसे कितना प्रदूषण होगा?
    4. किस स्टडी के आधार पर पांच दिन के लिए ऑड-ईवन लागू करने का फैसला लिया, गया जबकि रिपोर्ट कह रही हैं कि प्रदूषण घटने लगा है?
    5. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले ऑड-ईवन में पीएम 2.5 व 10 का लेवल कम नहीं हुआ था, बल्कि कम्यूलेटिव पॉल्यूशन बढ़ गया था, फिर भी इसे लागू करने का फैसला क्यों किया गया?
    ये 4 आदेश दिए: एनजीटी ने राजधानी को प्रदूषण से बचाने के लिए दिल्ली सरकार को ये 4 आदेश भी दिए हैं...
    1. रोजमर्रा की जरूरी उपभोग की वस्तुओं वाली इंडस्ट्री को चलने की अनुमति दी जाए, लेकिन यह तभी हो जब दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यह कह दे कि उस इंडस्ट्री से नाममात्र का प्रदूषण हो रहा है।
    2. मीडिया के माध्यम से पता चला है कि कंस्ट्रक्शन व इंडस्ट्री रोक के बावजूद चल रही हैं। सिविक एजेंसियां ऐसी जगहों का निरीक्षण करें और नियम तोड़ने वालों पर 1 लाख तक का पर्यावरण शुल्क लगाएं।
    3. किसी भी ओवरलोड ट्रक को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति न दी जाए।
    4. करनाल में पराली जलाने की बात सामने आई है। जब हमने पहले ही हरियाणा, यूपी समेत सभी राज्यों को पराली जलाने पर प्रतिबंध का आदेश दिया है तो ऐसा क्यों हुआ। संज्ञान लेकर संबंधित राज्य के अफसरों पर जुर्माना लगाएंगे। यह जुर्माना अफसरों की सैलरी से लिया जाएगा।
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Web Title: NGT Told Dust To Construction Biggest Cause Of Pollution
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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