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प्रशांत भूषण CJI से बोले- अापके खिलाफ भी केस, FIR पढ़वाई तो नहीं मिला नाम

Bhaskar News | Last Modified - Nov 11, 2017, 08:42 AM IST

मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए जजों के नाम पर घूस का मामला दो जजों की बेंच ने संविधान पीठ को सौंपा था।
  • प्रशांत भूषण CJI से बोले- अापके खिलाफ भी केस, FIR पढ़वाई तो नहीं मिला नाम
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    जजों की मदद के लिए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आरएस सूरी, सचिव गौरव भाटिया समेट कई कई पदाधिकारी व वकील मौजूद थे। (फाइल)
    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम पर रिश्वत मांगने के केस में कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच सुनवाई नहीं करेगी। दो जजों की बेंच ने गुरुवार को इस मामले को एक अन्य बेंच को देने को कहा था, लेकिन शुक्रवार को चीफ जस्टिस (सीजेआई) दीपक मिश्रा की अगुआई वाली 5 जजों की बेंच ने रद्द कर दिया। इस बेंच ने कहा- "सीजेआई सुप्रीम कोर्ट के मुखिया हैं। उनके आवंटन के बिना कोई बेंच केस नहीं सुन सकती।" अब दो सप्ताह बाद दाे जजों की दूसरी बेंच इस पर सुनवाई करेगी। एफआईआर में चीफ जस्टिस का नाम नहीं निकला...
    - दो जजों की बेंच कोई केस कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच को भेज सकती है या नहीं, इस पर फैसले के लिए पांच जजों की बेंच बैठी। जस्टिस चेलमेश्वर की बेंच के आदेश पर शुक्रवार दिनभर सुप्रीम कोर्ट में गहमागहमी रही।
    - पिटीशनर वकील कामिनी जायसवाल के वकील प्रशांत भूषण ने चिल्लाकर सीजेआई से कहा- अापके खिलाफ भी केस दर्ज है। चीफ जस्टिस ने उन्हें एफआईआर पढ़ने को कहा तो कहीं भी नाम नहीं मिला।
    सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
    जजों की मदद के लिए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आरएस सूरी, सचिव गौरव भाटिया सहित कई पदाधिकारी वकील मौजूद थे। याचिकाकर्ता कामिनी जायसवाल की ओर से सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण थे।
    - बार एसोसिएशन पदाधिकारी काफी अनुभवी हैं। क्या दो जजों की बेंच को पांच जजों की संविधान पीठ गठित करने का अधिकार है?
    सबने कहा:नहीं
    प्रशांत भूषण:मी लार्ड! यह इस केस से जुड़ा मुद्दा नहीं है।
    सीजेआई-पहले आप बात सुनें। जस्टिस चेलमेश्वर के सामने मेंशन केस जस्टिस एके सिकरी के सामने था। शुक्रवार यानी आज उस पर सुनवाई होनी थी। क्या एक ही केस दो अदालतें सुन सकती हैं?
    आरएस सूरी:संविधान के अनुसार नहीं।
    प्रशांत भूषण: सीजेआई आप इस केस को नहीं सुन सकते, क्योंकि आप पर आरोप है।
    सीजेआई:क्या आरोप हैं?
    प्रशांत भूषण (चिल्लाते हुए):आपके खिलाफ एफआईआर है।
    जस्टिस अरुण मिश्रा:सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों को इससे छूट मिली है। कह रहे हैं कि सीजेआई के खिलाफ एफआईआर है?
    सीजेआई: प्रशांत एफआईआर पढ़कर बताएं कि मेरा नाम कहां है? प्रशांत ने एफआईआर पढ़ी। इसमें सीजेआई का नाम नहीं था।
    सीजेआई: केस में फैसला भी पढ़ें।
    - एडवोकेट नरसिम्हन ने फैसला पढ़ा। मेडिकल कॉलेज में दाखिले के केस में सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि हाईकोर्ट अंतरिम आदेश न दे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुछ स्टूडेंट्स को दाखिला देने का आदेश दे दिया था, जो सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया।
    जस्टिस मिश्रा:कोर्ट में कौन, कहां, क्या कर रहा है, जज जिम्मेदार नहीं ।
    पिटीशनर का आरोप- छोटी बेंच के 6 फैसले रद्द कर चुके हैं सीजेआई
    - पिटीशनर एडवोकेट कामिनी जायसवाल ने आरोप लगाया कि सीजेआई की बेंच एक महीने के अंदर जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित की बेंच के छह फैसले रद्द कर चुकी है।
    - कामिनी ने कहा, “हमें पता है कि यहां क्या चल रहा है।" सीजेआई ने अपने दो फैसलों का बचाव किया।
    - जजों के अप्वाइंटमेंट से जुड़ा मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर फाइनल होने में देरी पर सुनवाई के लिए जस्टिस गोयल और ललित की बेंच ने 27 अक्टूबर को सहमति दी थी।
    - इसी बेंच ने क्रिमिनल अपीलों की सुनवाई में देरी पर चिंता जताते हुए केंद्र से सिस्टम तैयार करने को कहा था। सीजेआई की अगुआई वाली बेंच ने यह दोनों आदेश 8 नवंबर को वापस ले लिए थे।
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    मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए जजों के नाम पर घूस का मामला। - फाइल
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Web Title: Prashant Bhushan Shouted At CJI During Hearing
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