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लाइसेंस नहीं लेने वाले होटल-रेस्तरां पर 3 महीने बाद पड़ेंगे ताले: फूड रेगुलेटर

Bhaksar News | Last Modified - Nov 15, 2017, 03:14 AM IST

इन्हें मिलेगी छूट: छोटे-मोटे रिटेलरों और हॉकरों पर लागू नहीं होगा यह नियम
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    नई दिल्ली. खाद्य सुरक्षा रेगुलेटर एफएसएसएआई ने बिना लाइसेंस वाले होटलों और रेस्तरां को चेतावनी दी है। इसने कहा है कि तीन महीने में अगर परमिट नहीं लिया तो इन होटलों और रेस्तरां पर ताले लगा दिए जाएंगे। यह नियम उन संस्थानों पर भी लागू होता है जहां खाना मुफ्त में बांटा जाता है। हालांकि छोटे-मोटे रिटेलरों और हॉकरों पर यह नियम लागू नहीं होगा।

    फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एफएसएसएआई) के सीईओ पवन कुमार अग्रवाल ने मंगलवार को ‘फूडजानिया 2017’ कार्यक्रम में यह बात कही। फिक्की द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘देश में 30% से 40% होटल-रेस्तरां ने लाइसेंस नहीं लिया है। यह कैसे स्वीकार्य हो सकता है? अथॉरिटी पहले राज्यों से जागरूकता अभियान चलाने को कहेगी। फूड बिजनेस चलाने वालों को बताया जाएगा कि उनके लिए लाइसेंस लेना जरूरी है।’

    एफएसएसएआई का लाइसेंस जरूरी है या नहीं, इसे लेकर लोगों में कुछ भ्रम की स्थिति है। इसे साफ करते हुए अग्रवाल ने कहा कि सभी फूड बिजनेस के लिए लाइसेंस जरूरी है। लाइसेंस नहीं लेने को उचित नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अथॉरिटी के एनफोर्समेंट डायरेक्टर को तीन महीने में सभी होटल-रेस्तरां के लिए लाइसेंसिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि रेगुलेटर जल्दी ही होटल-रेस्तरां की ‘हाइजीन’ और ‘हाइजीन प्लस’ रेटिंग शुरू करेगा। रेगुलेटर छह साल से काम कर रहा है। अब तक सभी होटलों और रेस्तरां को लाइसेंस ले लेना चाहिए था।
    हर रेस्तरां में नियुक्त करना पड़ेगा कम से कम एक फूड सेफ्टी सुपरवाइजर
    एफएसएसएआई जल्दी ही नया प्रावधान करने वाला है। हर होटल-रेस्तरां को कम से कम एक फूड सेफ्टी सुपरवाइजर नियुक्त करना पड़ेगा। उसके पास अथॉरिटी द्वारा तय पाठ्यक्रम की डिग्री और प्रशिक्षण होना जरूरी होगा।

    होटल के डिस्प्ले बोर्ड में लाइसेंस और फूड इंस्पेक्टर का नंबर लगाना जरूरी
    रेगुलेटर के सीईओ ने कहा कि फूड ऑपरेटर्स को अपने परिसर में लाइसेंस ऐसी जगह डिस्प्ले करना पड़ेगा, जहां से वह साफ दिखे। डिस्प्ले बोर्ड में कस्टमर केयर और फूड इंस्पेक्टर के नंबर भी होने चाहिए।

    क्या है खाद्य सुरक्षा एवं मानक कानून
    खाद्य सुरक्षा एवं मानक कानून 2006 के तहत कोई भी व्यक्ति लाइसेंस के बिना फूड बिजनेस नहीं कर सकता है। इस कानून में फूड बिजनेस से मतलब ऐसे प्रॉफिट/नॉन-प्रॉफिट सरकारी/निजी प्रतिष्ठानों से है जो मैन्युफैक्चरिंग, प्रोसेसिंग, पेकेजिंग, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन, डिस्ट्रीब्यूशन, आयात या बिक्री का काम करते हैं।
    खाना बांटने वाले धार्मिक प्रतिष्ठानों के लिए भी लाइसेंस लेना जरूरी
    अग्रवाल ने कहा कि एफएसएसएआई का लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन लेना उन धार्मिक प्रतिष्ठानों के लिए भी जरूरी है, जहां खाना मुफ्त में बांटा जाता है। लाइसेंस लेने के बाद फूड बिजनेस करने वाले को फूड सेफ्टी मैनेजमेंट प्लान भी देना पड़ेगा।
    फूड मार्केट अभी 3.3 लाख करोड़ रु. का, 5 साल में 5.5 लाख करोड़ का होगा
    भारत का फूड सर्विस मार्केट अभी 3.37 लाख करोड़ रुपए का है। यह 2022 में 5.52 लाख करोड़ का हो जाएगा। इसमें संगठित और असंगठित, दोनों मार्केट शामिल हैं। कुल मार्केट का 22% मुंबई और दिल्ली-एनसीआर में है। पुणे, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता में 20% मार्केट है। फिक्की-टेक्नोपैक की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक 2016 में इस सेक्टर में 55-60 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ था। पांच साल में इसमें रोजगार की संख्या 85-90 लाख हो जाएगी।
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Web Title: Restaurant Not Taking License Will Stop After Three Months
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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