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इस किन्नर को सलाम करते हैं अफसर, कभी फुटपाथ पर सोकर गुजारी थी रातें

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2017, 12:41 AM IST

भीख मांगने के लिए मजबूर किन्नर जोइता मंडल अब पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर की लोक अदालत में जज बन गई हैं।

story joyita mondal first transgender judge
नई दिल्ली। कभी गुजर बसर के लिए भीख मांगने के लिए मजबूर किन्नर जोइता मंडल अब पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर की लोक अदालत में जज बन गई हैं। जोइता के लिए यह मुकाम इसलिए भी खास है क्योंकि वह ट्रांसजेंडर हैं। लेकिन उनके लिए यह सफर इतना आसान नहीं था। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है। होटल में नहीं दिया था कमरा तो फुटपाथ पर गुजारी रातें...
जोइता साल 2011 से ट्रांसजेंडर्स से जुड़े कई मुद्दों पर काम कर रही हैं। वह एक सोशल वर्कर हैं जो सामाजिक कार्य करती रहती हैं। अब जब वो एक ऑफिशियल गाड़ी में सिक्योरिटी एस्कोर्ट के साथ कोर्ट रूम में पहुंचीं तो सब लोग हैरान रह गए।जोइता को “लर्न्ड जज” की कैटेगरी में रखा गया है। जोइता दिजनापुर नोतुन आलो सासाइटी की फाउंडिंग मेंबर भी है।
घर-घर जाकर किया डांस
एक वक्त था जब रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए उनके पास कोई नौकरी नहीं थी और उन पर दबाव था कि वह या तो भीख मांगे या बधाई पार्टी में शामिल हो जाएं। जो शादी या बच्चे के जन्म के वक्त पैसे लेने घरों में जाती है। कभी घर के गुजारे के लिए उन्होंने भीख मांगकर गुजारा करना पड़ा तो कभी घर-घर जाकर शादी और अन्य समारोहों में अपने समुदाय के लोगों के साथ नाच-गाना करना पड़ा।
कॉलेज में कसी जाती थीं फब्तियां
जोइता बचपन से ही पढ़ने में होशियार थी उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई के लिए कोलकाता के कॉलेज में एडमिशन लिया। जब वह पढ़ने के लिए शहर गई तो लोग उन पर भद्दे कमेंट करते थे। क्लासरूम में उन पर स्टूडेंट फब्तियां कसते थे। इस कारण उन्हें बीच में अपनी पढाई छोड़नी पड़ी। फिर वह सामाजिक कार्यकर्ता बन गईं। जिंदगी में जितनी मुश्किलें हो सकती थीं, उन्होंने सबका सामना किया।
होटल में नहीं दिया था कमरा
खास बात ये है कि जोइता की जहां नियुक्ति हुई है, उससे दस मिनट की दूरी पर स्थित बस स्टैंड पर उन्होंने कई बार रात गुजारा था। जब ट्रांसजेंडर होने की वजह से उन्हें होटल वाले कमरा देने से मना कर देते थे तो जोइता इसी बस स्टैंड पर अपना रात गुजारा करती थीं। इसी घटना ने जोइता को अंदर से झकझोर दिया और उन्होंने कुछ करने का ठान लिया।
अधिकारों की लड़ाई हुई और मजबूत
जोयिता अब कई सामाजिक कामों से जुड़ी हुई हैं। उन्हें लगता है कि उनके सामाजिक कामों के चलते ही ये पोजिशन उन्हें दी गई है। लोग वाकई इससे खुश हैं, उन्हें बधाइयां मिल रही हैं। उनकी सफलता उनके समुदाय के लोगों में प्रेरणा देने का काम कर रही है। एलजीबीटीक्यू के अधिकारों की लड़ाई में ये एक मील का पत्थर भी है।
ये वाकई शानदार है
जोयिता कहती हैं, ये वाकई शानदार अवसर है. पहली बार किसी ट्रांसजेंडर को ये मौका दिया गया है. सरकार ने जो कदम उठाया है, वो वाकई तारीफ के काबिल है। मैं इस्लामपुर की सब डिविजन कानूनी सेवा कमेटी की शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे इस लायक समझा।
आगे की स्लाइडस मेंं देखें जज बनी ट्रांसजेंडर की चुनिंदा फोटोज...
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