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8 राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक दर्जे के लिए आयोग जाए याचिकाकर्ता

शीर्ष कोर्ट में सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ली

Bhaskar News | Last Modified - Nov 11, 2017, 05:39 AM IST

8 राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक दर्जे के लिए आयोग जाए याचिकाकर्ता
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने 8 राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से शुक्रवार को इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इस मामले के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से संपर्क करें। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली। वकील और बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम में अर्जी दाखिल कर देश के 8 राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग की थी।
याचिका में कहा गया था कि लक्षद्वीप, जम्मू-कश्मीर, मिजोरम, नगालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और पंजाब में हिंदू अल्पसंख्यक हैं, ऐसे में इन राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यकों वाले अधिकार मिलने चाहिए। याचिकाकर्ता ने 1993 में केंद्र सरकार की तरफ से जारी नोटिफिकेशन को भी असंवैधानिक घोषित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता उपाध्याय ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि 23 अक्टूबर 1993 में नोटिफिकेशन जारी कर मुस्लिम समेत अन्य समुदाय के लोगों को अल्पसंख्यकों का दर्जा दिया था।

उपाध्याय ने कहा कि 2011 के जनगणना के आंकड़ों की मानें तो देश के 8 राज्यों (लक्षद्वीप, जम्मू-कश्मीर, मिजोरम, नगालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और पंजाब) में हिंदू अल्पसंख्यक हैं, लेकिन उन्हें इन राज्यों में यह दर्जा अभी तक नहीं मिला है। अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा था, ‘सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने 2002 में फैसला दिया था कि अल्पसंख्यक का दर्जा राज्य स्तर पर दिया जाना चाहिए। 8 राज्यों में हिंदू बहुत कम हैं, बावजूद इसके उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं दिया गया।
2011 में हुई जनगणना के मुताबिक
लक्षद्वीप में 2.5%, मिजोरम 2.75%, नगालैंड में 8.75%, मेघालय में 11.53%, जम्मू कश्मीर में 28.44%, अरुणाचल प्रदेश में 29%, मणिपुर में 31.39% और पंजाब में 38.4% हिंदू हैं।
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