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यूएन प्रतिनिधि ने की गांधीजी पर टिप्पणी, कहा- स्वच्छता मिशन को गांधीजी के चश्मे से नहीं, मानवाधिकार की नजर से देखने की जरूरत

उन्होंने रिपोर्ट में आशंका जाहिर की है कि स्वच्छता अभियान पर ज्यादा जोर कहीं पेयजल मिशन को कमजोर न कर दे।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 11, 2017, 05:42 AM IST

यूएन प्रतिनिधि ने की गांधीजी पर टिप्पणी, कहा- स्वच्छता मिशन को गांधीजी के चश्मे से नहीं, मानवाधिकार की नजर से देखने की जरूरत
नई दिल्ली. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार मसलों से जुड़े विशेष प्रतिनिधि (यूएनएसआर) लियो हेलर ने महात्मा गांधी को लेकर टिप्पणी की है। इसपर ऐतराज जताते हुए सरकार ने उनकी रिपोर्ट खारिज कर दी है। वह देश में स्वच्छता और पीने के पानी पर मानव अधिकार की स्थिति को जानने के लिए आए थे। उन्होंने रिपोर्ट में आशंका जाहिर की है कि स्वच्छता अभियान पर ज्यादा जोर कहीं पेयजल मिशन को कमजोर न कर दे।

हेलर ने स्वच्छता अभियान के लोगो में गांधी जी के चश्मे की जगह मानवाधिकार के चश्मे का इस्तेमाल करने की बात कही। हेलर ने कहा कि मैं जहां भी गया, मैंने स्वच्छ भारत मिशन का लोगो - (महात्मा) गांधी के चश्मे को देखा। मिशन लागू होने के तीसरे साल में, अब यह जरूरी हो गया है कि उन चश्मों को मानव अधिकारों के लेंस से बदला जाए। लोगो पर की गई टिप्पणी पर सरकार ने निंदा करते हुए कहा कि यह राष्ट्रपिता के प्रति गहरी असंवेदनशीलता दर्शाता है। पूरा विश्व जानता है कि महात्मा गांधी मानवाधिकारों के प्रबल समर्थक थे। स्वच्छ भारत मिशन का अनूठा लोगो गांधीजी का चश्मा है। यह मानव अधिकारों के मूल सिद्धांतों को सम्मिलित भी करता है।
मानवाधिकार नजरिये की कमी: रिपोर्ट
यूएनएसआर ने इस साल 27 अक्टूबर से 10 नवंबर तक भारत का दौरा किया। इसके बाद तैयार रिपोर्ट में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा शौचालय निर्माण पर दिया जा रहा जोर सभी के लिए पेयजल उपलब्ध कराने के मुद्दे को कमजोर न कर दे। उन्होंने कहा, ग्रामीण और शहरी इलाकों, झुग्गियों और पुनर्वास शिविरों में पाया कि इन प्रयासों में मानव अधिकारों के नजरिए की काफी कमी है।
अधूरी जानकारी पर बनी रिपोर्ट: सरकार
सरकार ने इस आरोप को खारिज कर दिया कि भारत का ‘स्वच्छ भारत मिशन’ और ग्रामीण-शहरी पीने के पानी के कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार मानदंड और सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं। यूएनएसआर की रिपोर्ट या तो तथ्यात्मक रूप से गलत हैं, या अधूरी जानकारी पर बनाई गई है। यूएनएसआर राष्ट्रीय स्वच्छता नीति में बदलाव को स्वीकार करने में नाकाम रहा है, जो अब शौचालयों के निर्माण में लग गया है।
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