Hindi News »Union Territory »New Delhi »News» West Bengal Wins Fight With Odisha Over Rosogolla Origin

दो साल तक चली लड़ाई के बाद आया नतीजा- साबित हो गया कि रसगुल्ले का जन्म ओडिशा में नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल में हुआ था

बंगाल को मिला रसगुल्ले का जीआई टैग, अब बंगाल सरकार इसे राज्य के इंटरनेशनल फूड ब्रांड के रूप में पेश करेगी

Bhaskar News | Last Modified - Nov 15, 2017, 03:05 AM IST

  • दो साल तक चली लड़ाई के बाद आया नतीजा- साबित हो गया कि रसगुल्ले का जन्म ओडिशा में नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल में हुआ था
    +1और स्लाइड देखें
    चेन्नई. रसगुल्ले का जन्म पश्चिम बंगाल में हुआ था या ओडिशा में? दो साल से इस सवाल पर चल रहे विवाद का फिलहाल अंत हो गया है। नतीजा पश्चिम बंगाल के पक्ष में रहा। रसगुल्ले का जियोग्राफिकल इंडेकिशन यानी जीआई टैग बंगाल के नाम हो गया है। यानी अब ये बात आधिकारिक रूप से सिद्ध है कि रसगुल्ले का जन्म बंगाल में हुआ था। जीआई टैग किसी वस्तु या संपत्ति की भौगोलिक पहचान बताने वाला टैग है।
    - 2015 में ओडिशा ने रसगुल्ले का जीआई टैग हासिल करने के लिए दावेदारी पेश की थी। उनका कहना था कि रसगुल्ले का जन्म उनके राज्य से हुआ है। बंगाल ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि रसगुल्ले का जन्म ओडिशा में नहीं, हमारे राज्य में हुआ। दोनों राज्यों ने अपनी-अपनी कमेटी बनाई और उसे रसगुल्ले का इतिहास खंगालने का काम सौंप दिया।
    - जीआई टैग का निर्धारण करने वाली चेन्नई स्थित कमेटी ने दोनों राज्यों के तर्क सुने और आखिर बंगाल के पक्ष में फैसला सुनाया।
    - जीआई टैग मिलने से खुश प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे ‘मीठी खबर’ बताया। बंगाल सरकार अब रसगुल्ले को इंटरनेशनल लेवल पर राज्य के फूड ब्रांड के रूप में पेश करेगी।
    #ओडिशा का 800 साल पुराना दावा खारिज, बंगाल के 149 साल पुराने तर्क मंजूर
    ओडिशा का तर्क:हमारे यहां रसगुल्ला 13वीं सदी से है। पुरी से इसका इतिहास जुड़ा है। एक बार भगवान जगन्नाथ अपने घर पहुंचे, तो देवी लक्ष्मी ने उनसे रूठकर दरवाजा बंद कर दिया। देवी को मनाने के लिए भगवान ने उनके सामने खीर मोहन नाम का खाद्य पदार्थ पेश किया। खीर मोहन का मीठा स्वाद देवी को पसंद आया। तब जाकर उन्होंने दरवाजा खोला। वो खीर मोहन दरअसल रसगुल्ला ही था। इस पौराणिक कहानी से साबित होता है कि रसगुल्ला हमारे यहां भगवान जगन्नाथ के समय से है।
    दावा खारिज:खीर मोहन और रसगुल्ले में अंतर है। यह आकार में बड़ा होता है। सफेद नहीं, बल्कि कुछ पीले रंग का होता है। इसे रसगुल्ला नहीं मान सकते।
    बंगाल का तर्क:1868 में कोलकाता के बागबाजार में नोबीन चंद्र दास हलवाई की दुकान थी। बंगाल के मशहूर संदेश (सोंदेश) को टक्कर देने के लिए उन्होंने रोसोगुल्ला (रसगुल्ला) नाम की मिठाई तैयार की। एक बार सेठ रायबहादुर भगवानदास बागला कहीं जा रहे थे। उनके बेटे को प्यास लगी, तो नोबीन दास की दुकान पर रुककर पानी मांगा। नोबीन दास ने बच्चे को पानी के साथ एक रसगुल्ला भी दिया। बच्चे को ये अच्छा लगा तो सेठ ने बहुत सारे रसगुल्ले खरीद लिए। बस फिर ये मिठाई शहर भर में मशहूर हो गई।

    दावा मंजूर: ये तर्क सही है। बंगाल का रसगुल्ला पूरा सफेद और छोटा होता है। यही इसका सही आकार है। बंगाल को रसगुल्ले का जीआई टैग दिया जाता है।
  • दो साल तक चली लड़ाई के बाद आया नतीजा- साबित हो गया कि रसगुल्ले का जन्म ओडिशा में नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल में हुआ था
    +1और स्लाइड देखें
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×