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एम्स के 3 डॉक्टरों दोषी करार: सांस की जगह खाने की नली में पाइप डालने से हुई थी मां और भ्रूण की मौत

पूरे घटनाक्रम में तीन डॉक्टरों को आरोपी माना गया है और इसकी वजह से एक महीने के लिए उनका लाइसेंस रद्द कर दिया गया।

Bhaskar News | Last Modified - May 15, 2018, 09:30 AM IST

एम्स के 3 डॉक्टरों दोषी करार: सांस की जगह खाने की नली में पाइप डालने से हुई थी मां और भ्रूण की मौत

नई दिल्ली.ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) में पिछले वर्ष नर्स राजवीर कौर की गाइनी डिपार्टमेंट की ओटी में डिलिवरी के दौरान जुड़वां बच्चों की मौत और इसके 19 दिन बाद हुई राजवीर कौर की मौत के कारणों की जांच पर दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) ने बड़ी कार्रवाई की है। डीएमसी की रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम में तीन डॉक्टरों को आरोपी माना गया है और इसकी वजह से एक महीने के लिए उनका लाइसेंस रद्द कर दिया गया। एक महीने के लिए यह डॉक्टर्स प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे।


- रिपोर्ट में राजवीर कौर की मौत के लिए मुख्य रूप से एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट के जूनियर डॉक्टर मनीष डे को आरोपी माना गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि डॉ. मनीष डे ने ही नर्स राजवीर कौर के गले में गलत पाइप डाली थी। जो पाइप सांस की नली में डाली जानी चाहिए थी वह खाने की नली में डाल दी गई थी। इससे मरीज के शरीर में ऑक्सीजन कम हुई और उसे ओटी टेबल पर ही दिल का दौरा पड़ गया।

- रिपोर्ट में डॉ. मनीष डे से भी ज्यादा बड़ा अपराध एम्स प्रशासन का माना गया है। जिसने डॉ. मनीष डे को तब भी बतौर जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट में अपॉइंट कर लिया जब उनका रजिस्ट्रेशन डीएमसी में नहीं है। इस संबंध में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को पत्र लिखकर डीएमसी ने कड़ी कार्रवाई की है।

पिछले साल जनवरी का है पूरा मामला

एम्स के प्लमोनरी मेडिसिन विभाग में बतौर सीनियर नर्स तैनात राजवीर कौर की लेबर रूम में गलत एनेस्थीसिया देने से तबीयत बिगड़ गई जिससे उनके दोनों गर्भस्थ जुड़वां बच्चों की मौत हो गई। यह पूरा वाक्या पिछले वर्ष 17 जनवरी का है। आनन-फानन में राजवीर कौर को वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया। यहां 19 दिन बाद उन्होंने भी सेप्टिसीमिया और मल्टी ऑर्गन फेल होने की वजह से दम तोड़ दिया। नर्सों ने इलाज में लापरवाही का आराेप लगा एम्स में जमकर हंगामा किया और हड़ताल पर चले गए। इसके बाद एम्स ने कमेटी गठित कर आरोपी डॉक्टरों को सस्पेंड किया और एक डॉक्टर का एम्स के साथ अनुबंध भी समाप्त कर दिया।

डीएमसी ने मामले को लेकर यह की कार्रवाई

- जिन तीन डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, उसमें गाइनोकॉलोजी डिपार्टमेंट की सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर दर्शाना मजूमदार, एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट की सीनियर रेजिडेंट डॉ. नीसविले निसा व जूनियर रेजिडेंट डॉ. मनीष डे शामिल हैं।
- डीएमसी ने एनेस्थेटिस्ट डॉ. नीसविले निसा और डॉ. मनीष डे को उन विषय में 12 घंटे के कंटीन्यूएश मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) अटेंड करने को भी कहा गया जिसमें यह पूरी तरह से फेल हो गए।
- डॉ. राजवीर कौर और उनके जुड़वां बच्चों को आसानी से बचाया जा सकता था, यदि गाइनोकॉलोजी डिपार्टमेंट और एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट में बेहतर तालमेल होता।

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Web Title: ems ke 3 doktron dosi karaar: saans ki jgah khaane ki nli mein paaip daalne se huee thi maan aur bhrun ki maut
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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