"ऑक्सीजन बम' के ढेर पर अरुणा आसफ अली अस्पताल, कभी भी हो सकता है हादसा

New-delhi News - विश्वस्तरीय इलाज का दावा करने वाले दिल्ली सरकार के 5 राजपुर रोड स्थित अरुणा आसफ अली अस्पताल में सबकुछ विश्वस्तरीय...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:20 AM IST
New Delhi News - aruna asaf ali hospital on the heap of quotoxygen bombsquot
विश्वस्तरीय इलाज का दावा करने वाले दिल्ली सरकार के 5 राजपुर रोड स्थित अरुणा आसफ अली अस्पताल में सबकुछ विश्वस्तरीय नहीं है। लापरवाही और बदइंतजामी का आलम यह है कि शॉर्ट सर्किट की छोटी- सी घटना भी विकराल रूप ले सकती है। पलक झपकते ही पूरा अस्पताल आग के शोलों में तब्दील हो सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण अस्पताल के बेसमेंट में ऑक्सीजन सिलेंडरों का मेनीफोल्ड (भंडारण) का होना है। साफ है कि इस बाबत सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का अस्पताल प्रशासन ने पालन नहीं किया है। यहां मरीज, तिमारदार, डॉक्टर और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी लोगों की जान पर चौबीसों घंटे खतरा मंडरा रहा है। एक्सपर्ट के अनुसार जिस पाइप लाइन से ऑक्सीजन सप्लाई होती है उस पाइप लाइन में लीकेज, बिजली के शॉट सर्किट व वाहनों के आवागमन के कारण मेनीफोल्ड में आग भयंकर रूप धारण कर सकता है। यही नहीं, ऑक्सीजन सिलेंडरों का जहां भंडारण किया गया है, वह जगह इतनी संकरी है कि आग लगने की सूरत में दमकल कर्मियों का वहां तक पहुंच पाना कठिन होगा।

मरीज, तिमारदार, डॉक्टर और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी लोगों की जान पर 24 घंटे खतरा

अरुणा आसफ अली अस्पताल के बेसमेंट में रखे ऑक्सीजन सिलेंडर

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली के सभी 5 अस्पतालों ने हटा दिए है बेसमेंट से मेनीफोल्ड

9 दिसंबर 2011 को कोलकाता के एएमआरआई अस्पताल में भीषण आग लगने से तकरीबन 90 मरीजों की मौत हो गई थी। अस्पताल में बेसमेंट से शुरू हुई आग ने पूरे अस्पताल को चपेट में ले लिया था। कोर्ट ने दायर की गई जनहित याचिका पर दो साल पहले नोटिफिकेशन जारी किया था पूरे देश के अस्पतालों से ऑक्सीजन के मेनीफोल्ड को बेसमेंट से हटाए जाय। दो साल पहले दिल्ली के पांच अस्पतालों ने बेसमेंट से ऑक्सीजन मेनिफोल्ड को दूसरी जगहों पर स्थापित कर दिया था। अरूणा आसफ अली अस्पताल में आज भी बेसमेंट में यूनिट है।

सप्लाई पाइप लाइन की भी हालत जर्जर

अस्पताल में आक्सीजन गैस जिस पाइप लाइन से सप्लाई होती है, उसकी हालत जर्जर है। प्रवेश द्वार के सामने ही बेसमेंट से वार्ड में जा रही ऑक्सीजन पाइप लाइन मुड़ी है। एक गार्ड ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया पाइप लाइन अटकी थी। ऑक्सीजन सिलेंडर लगाने वाले कॉट्रेक्टरों का कहना है कि यह खतरनाक है।

जिम्मेदार बोले-


2016 से अस्पताल में गैस लाइन सिस्टम वेटिंलेटर पर

ऑक्सिजन किसी का भी जान बचाने के लिए कितनी जरूरी है यह बताने की आवश्यकता नहीं है। पर वीवीआईपी अस्पताल का हॉस्पिटल गैस लाइन सिस्टम (आक्सीजन यूनिट) 3 साल से वेंटिलेटर पर है। इस अस्पताल में हॉस्पिटल गैस लाइन सिस्टम का काम देख रही कंपनी श्री राम मेडिकल सर्विसेस का टेंडर 2013 में खत्म हो गया था। हर 6 महीने में पुराने रेट पर इसी कंपनी को 2016 तक एक्सटेंशन मिल रहा है। कंपनी ने नया टेंडर नहीं देने के कारण काम छोड़ दिया। इसमें दिलचस्प मामला यह है कि देश का अस्पताल 2013 से लगातार ऑन लाइन टेंडर भी निकाल रहा था। नेशनल स्तर की ऑन लाइन टेंडर के बाद भी देश के किसी कॉन्ट्रेक्टर ने इस अस्पताल के काम में टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं लिया।

क्या कहना है एक्सपर्ट का



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