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मोदी और केजरीवाल पर अपमानजनक शब्दों वाली डाॅक्यूमेंट्री सेंसर से पास,

44 दिनों तक बनारस के चुनाव अभियान के भाषणों और प्रचार को रेकॉर्ड किया गया।

Dainik Bhaskar

Apr 15, 2018, 02:56 AM IST
फिल्म के लिए बनारस में लोकसभा फिल्म के लिए बनारस में लोकसभा

- बनारस के चुनावी महासमर पर बनी है डाॅक्यूमेंट्री 'बैटल फॉर बनारस'

- सेंसर बोर्ड ने फिल्म में मोदी और केजरीवाल पर किए कमेंट पर आपत्ति जताई थी।

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव 2014 में बनारस सीट पर हुए चुनावी महासमर पर बनी डाॅक्यूमेंट्री 'बैटल फॉर बनारस' आखिरकार हाईकोर्ट के फैसले के बाद फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलेट ट्रिब्यूनल से पास हो गई। फिल्म में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बारे में की गईं 'अपमानजनक' टिप्पणियों को ट्रिब्यूनल ने यह कहते हुए पास कर दिया कि उन्हें दर्शकों के तजुर्बे और विवेक पर पूरा भरोसा है। बता दें कि दोनों नेताओं ने बनारस सीट से चुनाव लड़ा था। उनके प्रचार के वक्त फिल्म के लिए 44 दिनों तक भाषणों को रिकॉर्ड किया गया। फिर 'बैटल फॉर बनारस' लंबी लड़ाई से गुजरी। सेंसर बोर्ड ने अक्टूबर 2015 में इसे खारिज कर दिया।

सेंसर बोर्ड के फैसले पर हाईकोर्ट ने दिया था दोबारा गौर करने का आदेश

- सेंसर बोर्ड की दलील थी कि उम्मीदवार चुनाव के दौरान ऐसी-ऐसी बातें कहते हैं जो बेहद आपत्तिजनक होती हैं। सेंसर बोर्ड के फैसले को फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलेट ट्रिब्यूनल ने भी जायज ठहराया था, लेकिन जनवरी 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने बोर्ड के तर्कों को नहीं माना और अपीली ट्रिब्यूनल से फिल्म पर नए सिरे से गौर करने का निर्देश दिया। अब ट्रिब्यूनल के सामने डाक्यूमेंट्री को खारिज करने का कोई रास्ता नहीं बचा था। आखिरकार उसने फिल्म को U/A सर्टिफिकेट से पास कर दिया।

कौन से कमेंट को लेकर थी आपत्ति

1) सेंसर बोर्ड को फिल्म में नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल पर किए गए कुछ कमेंट पर आपत्ति थी। इसी बारे में जस्टिस मनमोहन सरीन की अध्यक्षता में ट्रिब्यूनल ने सफाई मांगी। डॉक्यूमेंट्री के एक दृश्य में एक किन्नर मोदी के बारे में कह रहा है - "मोदी जहाज से आया, क्या करके चला गया? भीड़ बटोर के लेकर आया, क्या किया? कुछ नहीं किया...।"

- डायरेक्टर की दलील: फिल्म के डायरेक्टर अपीलकर्ता कमल स्वरूप के वकील ने ट्रिब्यूनल से कहा कि किन्नर की बात को डॉक्यूमेंट्री में जस-का-तस इस्तेमाल किया गया। बिना कोई अपनी राय जोड़े रीप्रोड्यूस किया गया है। अपनी तरफ से कुछ नहीं जोड़ा है।

2) ट्रिब्यूनल ने केजरीवाल के बारे में किए गए कमेंट्स के बारे में भी पूछा। फिल्म में किन्नर एक रिपोर्टर से बातचीत में कहता है- "अरविंद केजरीवाल हैं, तो वह आम आदमी की टोपी लगाकर घूम रहे हैं। वह आम आदमी हैं? दो महीने के अंदर सरकार की कितनी बढ़िया कुर्सी दिल्ली से मिली थी, बेचकर भाग आया। तो बनारस से जीत के कहां जाएंगे?" सेंसर बोर्ड ने 'कुर्सी बेचकर भाग आया' वाक्य को अपमानजनक बताया था।

- डायरेक्टर की दलील: इस पर अपीलकर्ता ने दलील दी कि ये बात तो वाकई कही गई थी और वास्तविक बयान पर आधारित है। ट्रिब्यूनल ने फिल्म को पास करते हुए इसमें एक इंट्रोडक्शन और एक डिसक्लेमर जोड़ने की हिदायत दी।

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