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DB SPL: पुरी जगन्नाथ मंदिर में 11 सौ साल से सेवकों की पीढ़ी काम कर रही

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं बदली व्यवस्था, स्टेशन से मंदिर तक वसूली का नेटवर्क

संदीप राजवाड़े | Last Modified - Jun 12, 2018, 05:10 AM IST

DB SPL: पुरी जगन्नाथ मंदिर में 11 सौ साल से सेवकों की पीढ़ी काम कर रही

ओडिशा. पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं से दुर्व्यवहार और लूट रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद व्यवस्था जस की तस है। स्टेशन से मंदिर के अंदर तक सेवकों का वसूली नेटवर्क है। वे जल्दी दर्शन, गर्भगृह से स्पेशल प्रसाद और पूजा कराने के नाम पर सौदेबाजी करते हैं। पैसा मन मुताबिक न मिले तो बदतमीजी पर उतर आते हैं। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि करीब 1100 साल से यहां 1500 सेवकों (पंडों) की पीढ़ियां काम कर रही हैं। मंदिर समिति उन्हें कोई मानदेय या वेतन नहीं देती।

लाइव : स्टेशन से ही रखते हैं नजर, फंसाकर करते कमाई

भास्कर टीम 10 जून की सुबह पुरी जगन्नाथ मंदिर पहुंची। मंदिर से जुड़ा होने का दावा कर कुछ लोग स्टेशन से ही जल्दी दर्शन, पूजा, प्रसाद दिलाने और सस्ते होटल को लेकर डील करने लगते हैं। मंदिर के मुख्य द्वार (पूर्व दिशा द्वार) पर लगने वाली लाइन पर डील की कोशिश करते हैं। उनके टारगेट परिवार, बुजुर्ग और नए शादीशुदा जोड़े होते हैं। जैसे ही कोई उनकी बातों में उलझा, वह उन्हें मंदिर के दूसरे दिशा के द्वार ले जाएंगे, जहां कम भीड़ रहती है।


इसके बाद अंदर अलग-अलग भगवानों के मंदिर में चढ़ावा और जगन्नाथ के गर्भगृह से स्पेशल प्रसाद फूल दिलाने के नाम पर पैसे लेते हैं। अगर आप परिसर में बिना पंडे के पहुंच गए तो यहां भी सेवकों का झुंड मिल जाएगा। ये भी आसानी से सब कुछ कराने का दावा करते हैं। अधिकतर लोग यहीं फंसते हैं। दर्शन की लाइन के बाहर भी सेवक रहते हैं। मंदिर परिसर में सेवक कितने लोगों को दर्शन कराएंगे, बदले में कितने पैसे मिलेंगे यह पहले ही तय हो जाता है। 50 या 100 रुपए पर तो वह हां भी नहीं करते। कुछ पंडे कम पैसे पर श्रद्धालुओं से झगड़ते दिख जाते हैं। दबाव बनाने के लिए अन्य पंडे भी घेरा बनाकर खड़े हो जाते हैं। ये भगवान के चरणों में चढ़े प्रसाद और फूल-तुलसी पत्ती दिलाने के नाम पर 100-200 रुपए ऐंठते हैं। यहां कर्मकांड या अन्य पूजा कराने को लेकर भी होड़ है। कोई 200 रुपए में तो कोई 2 हजार में कराता है। अगर किसी पंडे से इस बारे में जानकारी लेकर दूसरे से पूछ लिया तो विवाद हो जाता है।


सेवकों को काम की अनुमति, वेतन नहीं: मंदिर समिति
जब जगन्नाथ मंदिर प्रशासन समिति से इस बारे में पूछा तो सूचना अधिकारी सुदीप कुमार चटर्जी ने कहा- शिकायतें मिलती हैं। लेकिन 20-30 साल पहले से आज की स्थिति काफी सुधरी है। समिति मंदिर के अंदर सेवकों को काम की अनुमति देती है। उनके लिए किसी मानदेय की व्यवस्था नहीं है। उनकी आजीविका श्रद्धालुओं के पैसों से चलती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेवकों के सभी समूहों को बुलाया है, उन्हें व्यवहार सुधारने और लोगों से जबरन पैसे लेने पर समझाया जाएगा।

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Web Title: DB SPL: puri jgannaath mandir mein 11 sau saal se sevkon ki piढ़i kam kar rhi
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