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सेट-टॉप बॉक्स में चिप लगाकर आपकी टीवी पर नजर रखना चाहती है सरकार, ट्राई को भेजा प्रस्ताव

नई चिप लगने के बाद सभी ग्राहकों का डेटा सरकार हासिल करेगी, लेकिन इसके लिए ग्राहक से कोई मंजूरी नहीं ली जाएगी।

Bhaskar News | Last Modified - Apr 16, 2018, 11:38 AM IST

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    बीएआरएसी ने 22,000 घरों में बीएआर-ओ मीटर लगाए हैं, जिसके जरिए वह टीआरपी के बारे में आंकड़े एकत्र करता है। (फाइल)

    नई दिल्ली. आप कौन-कौन सा चैनल कितनी देर तक देखते हैं, यह पता लगाने के लिए सरकार नए सेट-टॉप बॉक्स में चिप लगाने की तैयारी में है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (ट्राई) के पास यह प्रस्ताव भेजा है। स्मृति ईरानी के मंत्रालय से जुड़े एक सीनियर अफसर ने बताया कि इसका मकसद हर चैनल के लिए विश्वसनीय व्यूअरशिप डेटा जुटाना है। वहीं, सरकार का यह कदम ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया ऑफ इंडिया (बार्क) का एकाधिकार खत्म करने के तौर पर भी देखा जा रहा है। बार्क भारत में हर हफ्ते टीवी व्यूअरशिप के डेटा जारी करता है। मंत्रालय का मानना है कि दूरदर्शन की व्यूअरशिप कम करके बताई जाती है।

    ट्राई ने कहा- चिप लगाने के मसले पर मंत्रालय अलग से रेफरेंस भेजे

    - डीएवीपी विभिन्न मंत्रालयों और इनके संगठनों के विज्ञापन जारी करने के लिए सरकार की नोडल एजेंसी है। मंत्रालय ने नए डीटीएच लाइसेंस से जुड़े कई मुद्दों पर ट्राई की सिफारिशों पर प्रतिक्रिया के तौर पर यह प्रस्ताव रखा है। हालांकि, हाल ही में भेजे गए जवाब में ट्राई ने कहा कि सेट-टॉप बॉक्स में चिप लगाने के मसले पर मंत्रालय को अलग से रेफरेंस भेजना होगा।

    चिप पर तर्क: टीआरपी का सही आंकड़ा मिलेगा

    - चिप के जरिए आसानी से ग्राहक कौन सा चैनल कितनी देर देख रहा है। इसकी जानकारी हासिल की जा सकेगी। इससे विज्ञापनदाता और डीएवीपी अपने विज्ञापनों पर सोच-समझकर खर्च कर सकेंगे। केवल उन्हीं चैनलों को प्रोत्साहन मिलेगा, जो व्यापक तौर पर देखे जाते हैं।

    अभी 22 हजार घरों से आते हैं टीआरपी के आंकड़े

    - अभी तक बीएआरएसी ने 22,000 घरों में बीएआर-ओ मीटर लगाए हैं, जिसके जरिए वह टीआरपी के बारे में आंकड़े एकत्र करता है। जबकि नई चिप लगने के बाद इस मीटर की जरूरत नहीं पड़ेगी। बता दें कि बार्क इन मीटर को ग्राहक की मंजूरी के बाद उनके घरों में लगाती है।

    वजह: बार्क नहीं बताता व्यूअरशिप के यह आंकड़े कैसे मिले?

    - मंत्रालय के एक अफसर ने बताया कि बार्क यह भी नहीं बताता कि उसने व्यूअरशिप के आंकड़े कैसे जुटाए हैं? उसकी प्रक्रिया और सर्वे का इलाका कौन-सा है।

    - चिप लगाने के बाद चैनल के असल व्यूअरशिप आंकड़े पता चल सकेंगे। हालांकि, बार्क के प्रवक्ता का कहना है कि वह लोग वक्त-वक्त पर मंत्रालय के अधिकारियों को अपने काम की अपडेट्स देते रहते हैं।

    मुश्किल :बिना मंजूरी आपका डेटा सरकार का

    - नई चिप लगने के बाद सभी ग्राहकों का डेटा सरकार हासिल करेगी, लेकिन इसके लिए ग्राहक से कोई मंजूरी नहीं ली जाएगी। जबकि अब तक ऐसा नहीं होता था।

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    नई चिप लगने के बाद आंकड़े तेजी से मिलेंगे। (फाइल)
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