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चीफ जस्टिस ने पूछा- तुम बालिग हो, बताओ पति के साथ जाना है या पिता के साथ? युवती बोली- मेरी शादी ही नहीं हुई तो पति कैसा?

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने युवती से मामले को लेकर सीधे तौर पर 10 सवाल ओपन कोर्ट में किए।

Bhaskar News | Last Modified - May 18, 2018, 06:52 AM IST

चीफ जस्टिस ने पूछा- तुम बालिग हो, बताओ पति के साथ जाना है या पिता के साथ? युवती बोली- मेरी शादी ही नहीं हुई तो पति कैसा?

नई दिल्ली।उत्तराखंड में लव जिहाद के मामले में मुस्लिम पति द्वारा अपनी हिंदू पत्नी को उसके पिता की कस्टडी से छुड़ाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने युवती से मामले को लेकर सीधे तौर पर 10 सवाल ओपन कोर्ट में किए। इन सवालों का जवाब मिलने के बाद कोर्ट ने उसे उसके परिजन के साथ भेज दिया। उत्तराखंड की युवती अपने वकील मनोज गोरकेला और पुलिस इंस्पेक्टर कमाल हसन के साथ गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित हुई। उसके कथित पति दानिश की ओर से पेश वकील ने कहा कि युवती पर उसके परिजन और पुलिसकर्मियों ने दबाव बनाया है, जिससे वह दानिश से अपने निकाह को इनकार कर रही है और अपहरण का दबाव बना रही है। चीफ जस्टिस ने वकील को चुप कराते हुए कहा हम इस मामले में युवती से सीधे बातचीत कर निर्णय देंगे। इस दौरान वे किसी भी पक्ष के वकील को बीच में बोलने की अनुमति नहीं देंगे। उन्होंने 10 सवाल पूछे, जिनका युवती ने जवाब दिया।


कोर्ट रूम लाइव : चीफ जस्टिस के सवाल, युवती के जवाब
चीफ जस्टिस- आप कौन से कॉलेज में पढ़ती हैं?
युवती- ग्रैफिक ऐरा कॉलेज, भीमताल।
चीफ जस्टिस- क्या पढ़ती हैं?
युवती- बीबीए।
चीफ जस्टिस- यह किस तरह का कोर्स है?
युवती- यह ग्रेजुएशन कोर्स है। मैं फाइनल ईयर में हूं।
चीफ जस्टिस- आपकी सहेली, जिसकी शिकायत पर आपके अपहरण का केस दर्ज हुआ था। वह कहां पढ़ रही है?
युवती- वह मेरे साथ ही कॉलेज में तृतीय वर्ष की छात्रा है।
चीफ जस्टिस- तुम्हारे कॉलेज की दूरी तुम्हारे घर से कितनी है?
युवती- 40 किलोमीटर।
चीफ जस्टिस- क्या तुम आगे पढ़ना चाहती हो और क्या बनना चाहती हो?
युवती- मैं एमबीए करना चाहती हूं और आन्त्रप्रेन्योर बनना चाहती हूं।
चीफ जस्टिस- तुम बालिग हो। अपनी इच्छा की मालकिन हो। तुम अपनी इच्छानुसार कहीं भी जा सकती हो। कहीं भी रह सकती हो। तुम पर किसी भी प्रकार का कोई दबाव तो नहीं है?
युवती- नहीं कोई दबाव नहीं है।
चीफ जस्टिस- तुम अपनी बात खुलकर कर पा रही हो?
युवती- मैं अपनी बात खुलकर कह पा रही हूं।
चीफ जस्टिस- तुम्हें अपने पति के साथ रहना है या पिता के साथ?
युवती- मेरी शादी ही नहीं हुई तो पति कैसा? मैं अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती हूं।
चीफ जस्टिस- तुम्हारे साथ तुम्हें ले जाने के लिए कोई आया है?
युवती- मेरे माता-पिता आए हैं।


चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने युवती से बातचीत के बाद कहा उन्हें लगता है कि युवती किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं है। वह अपनी इच्छा से अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती है। इसलिए कोर्ट मामले में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज करती है। उत्तराखंड के देहरादून में एक युवती के अपहरण के मामले में जेल में बंद दानिश ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि उसका निकाह युवती से हुआ है और युवती ने धर्मपरिवर्तन कर उससे निकाह किया है। वह अपने परिजन के दबाव में उस पर व उसके परिजन पर अपहरण का आरोप लगा रही है। इसलिए उसकी पत्नी को उसके हवाले किया जाए।

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