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12 साल पहले हाई टेंशन की चपेट में आकर गंवाए थे हाथ-पैर, कोर्ट के 28 चक्कर लगाने के बाद मिला 1.25 करोड़ का मुआवजा

पावर कॉर्पोरेशन दे रहा था 51 हजार, कोर्ट में दिलाया 1.25 करोड़ का मुआवजा

Bhaskar News | Last Modified - Apr 14, 2018, 07:26 AM IST

  • 12 साल पहले हाई टेंशन की चपेट में आकर गंवाए थे हाथ-पैर, कोर्ट के 28 चक्कर लगाने के बाद मिला 1.25 करोड़ का मुआवजा
    शिवरांसु के दोनों पैर और एक हाथ कृत्रिम है और एक हाथ 10% काम करता है।

    गाजियाबाद.इंदिरापुरम के अहिंसा खंड 2 की इंडिया मून सोसायटी में रहने वाले शिवरांसु ने 12 साल पहले हाई टेंशन की चपेट में आकर एक हाथ और दोनों पैर गवां दिए थे। एक हाथ भी सिर्फ 10 फीसदी ही काम रहा है। उस समय वह 9वीं कक्षा में पढ़ता था। पावर काॅरपोरेशन मुआवजे के रूप में महज 51 हजार रुपए दे रहा था। परिजन ने इंकार कर दिया और कोर्ट में मामला ले गए। इसके लिए बच्चे के पैरेंट्स ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 28 चक्कर लगाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 1.25 करोड़ का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।

    2009 में कोर्ट में पहुंचा था मामला, 8 साल तक नहीं हुई थी एक भी सुनवाई

    शिवरांसु के पिता विजय 2009 में मामले को हाईकोर्ट ले गए। चूंकि बेटे का इलाज भी चल रहा था, इसलिए माता-पिता में से एक कोई शिवरांसु के पास रहता था और एक इलाहाबाद कोर्ट जाता था। 2017 तक एक भी सुनवाई नहीं हुई। कभी विभाग के अधिकारी नहीं पहुुंचते तो कभी वकील की वजह से अगली तारीख मिल जाती। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अक्टूबर 2017 में अधिवक्ता समृद्धि अरोड़ा को मामला दिया गया। उन्होंने अरजेंट हियरिंग की एप्लीकेशन लगाकर मुकदमे की सुनवाई करवाई। खास बात यह है कि मामले 8 साल तक एक भी सुनवाई नहीं हुई लेकिन 6 माह में 1.25 करोड़ रुपए का मुआवजे का फैसला दिया गया।

    हादसे के बाद शिवरांसु ने अस्पताल में गुजारा एक साल

    विजय और मीनाक्षी का इकलौता बेटा शिवरांसु साल 2006 में क्रिकेट खेलते समय हाई टेंशन तार की चपेट में आए थे। 1 साल अस्पताल में रहने के बाद घर आए। इस दौरान संक्रमण की वजह से एक पैर और एक हाथ काट दिया गया। घर लौटने के बाद उनके दोस्तों ने भी उनसे दूरी बना ली और उनसे डरने लगे। शिवरांसु ने ओपन स्कूल से 10वीं की पढ़ाई शुरू की। क्योंकि उनका अकेला हाथ भी मूव नहीं करता था। इसलिए मां और कुछ दोस्तों की मदद से पढ़ाई करते रहे। 10वीं की पढ़ाई के बाद शिवरांसु का दूसरा पैर भी काटना पड़ गया।

    सेल्फ मोटिवेशन से मिली हिम्मत, जारी रखा संघर्ष


    शिवरांसु घर से बाहर निकल नहीं सकते थे। इसलिए घूमना, फिरना खेलना सबकुछ बंद था। इस दौरान घर की आर्थिक स्थितियां भी खराब हो गईं। कई बार हिम्मत हारते थे पर सेल्फ मोटिवेशन के जरिए खुद को संघर्ष के लिए फिर से तैयार करते। इस तरह उन्होंने 12वीं और बीसीए की पढ़ाई की। 2013 से नौकरी शुरू की और अब वह साॅफ्टवेयर इंजीनियर हैं। अब वह विदेश में नौकरी करना चाहता है।

    करंट के मामले में अब तक का सबसे ज्यादा मुआवजा

    करंट लगने के मामले में अब तक का सबसे ज्यादा मुआवजा दिया गया है। शिवरांसु ने हादसे के बाद हिम्मत नहीं हारी और लगातार संघर्ष जारी रखा। इतने सालों तक कोर्ट के चक्कर काटने के बाद आखिर उसे सफलता मिल ही गई। शिवरांसु अब साॅफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वह अब भी पूरी तरह स्वस्थ्य नहीं हैं और घर से काम करना चाहते हैं। शिवरांसु के मुताबिक ऐसी सुविधा उन्हें विदेश में ही मिल सकती है। इसलिए यह विदेश जाकर वहां नौकरी करना चाहते हैं।

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Web Title: Compensation Of 1.25 Crore Received After 28 Rounds Of Court Took Over
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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