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दोस्त का दर्द नहीं सहन हुआ तो इस 17 साल के लड़के ने महज 2500 रुपए के खर्च में बना डाली ये डिवाइस, ताकि किसी और के साथ न हो ऐसा

3 वर्ष पहले
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नई दिल्ली दिल्ली का माधव लवकारे की उम्र महज 17 साल है। उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए चुना गया है। माधव ने एक ऐसा स्मार्ट ग्लास बनाया है जो बधिरों (बहरापन) के काम आता है। ये डिवाइस 132 भाषाओं को टैक्स्ट में बदलकर स्क्रीन पर डिस्पले करता है। आइए जानते हैं माधव की पूरी कहानी......

डिवाइस को नाम दिया ट्रांसक्राइब

- माधव को भरोसा है कि भारत में जो काम गूगल ग्लास नहीं कर पाया, वह उसका इनोवेशन करेगा। एक निजी स्कूल के छात्र माधव का एक दोस्त सुन नहीं सकता था।
- दूसरे छात्रों से बातचीत में रोज समस्या आने के कारण उस दोस्त ने स्कूल आना छोड़ दिया। ऐसे में माधव ने ट्रांसक्राइब नाम से एक स्मार्ट ग्लास बनाया, जो लोग सुन नहीं सकते, उनके लिए यह ग्लास बातों को टेक्स्ट के रूप में दिखाता है।

अभी पढ़े-लिखे लोग ही कर सकते हैं ट्रांसक्राइब का इस्तेमाल

- ट्रांसक्राइब को इसी साल नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इग्नाइट अवॉर्ड दिया था। माधव का लक्ष्य अब अच्छी क्वालिटी के इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स लेकर ट्रांसक्राइब का नया डिजाइन बनाना है।
- ऐसा होने पर ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों को इसका लाभ मिल सकेगा। अभी ट्रांसक्राइब का इस्तेमाल पढ़े-लिखे लोग ही कर सकते हैं।
- सूचनाओं का आदान-प्रदान संकेतों से भी हो सकता है। माधव इसी का प्रोटोटाइप बना रहा है। ट्रांसक्राइब बनाने पर उसे करीब 2,500 रुपए का खर्च आया।
- नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने माधव के लिए ट्रांसक्राइब का पेटेंट कराया है। माधव का कहना है कि वह इससे मुनाफा नहीं कमाना चाहता। वह चाहता है इसे बनाने और आगे रिसर्च एंड डेवलपमेंट में आने वाला खर्च निकल जाए।

132 भाषाओं में आवाज को टेक्स्ट में बदल सकती है ट्रांसक्राइब

- माधव ने यह डिवाइस सस्ते माइक्रोचिप से बनाई है। इसे यूजर के स्मार्टफोन के साथ ब्लूटूथ के जरिए जोड़ा जाता है। गूगल के एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) के जरिए यह 132 भाषाओं में आवाज को टेक्स्ट में बदल सकता है।
- बदला हुआ डेटा ब्लूटूथ के जरिए ग्लास पर डिस्पले होता है। यह डिवाइस किसी भी चश्मे के फ्रेम के साथ अटैच की जा सकती है, भले ही उसमें कोई भी पावर हो।

क्राउडफंडिंग से मिली मदद

- माधव का कहना है, अभी मैं छोटा हूं, इसलिए निवेशकों के पास नहीं जा सकता। लोग क्राउडफंडिंग से मेरी मदद कर रहे हैं। एक क्राउडफंडिंग साइट की मदद से वह 3 लाख रुपए जुटाना चाहता था।
- उसे 2.5 लाख रुपए मिले भी, साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट पर भी क्राउडफंडिंग के लिए प्रयास करना चाहता है। स्टैटिस्टा के अनुसार भारत में क्राउडफंडिंग इंडस्ट्री अभी सिर्फ 8 करोड़ रुपए की है।

6 साल की उम्र में बनाया सोलर ओवन

- माधव का जन्म कैलिफोर्निया में हुआ था। वहां माधव ने महज 6 साल की उम्र में बच्चों के लिए सोलर ओवन सिर्फ इसलिए बना दिया था क्योंकि आमतौर पर घरों में इस्तेमाल होने वाले ओवन बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं माने जाते।
- दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके के संस्कृति स्कूल से पढ़ाई करने वाले माधव जब 8 साल का था, तब उनकी फैमिली दिल्ली शिफ्ट हो गई थी।
- माधव ने 13 साल की उम्र में वॉइस कंट्रोल्ड होम ऑटोमेशन सिस्टम इसलिए डेवलप कर दिया था। माधव के पेरेंट्स हमेशा उसे लाइट-पंखों के बटन ऑफ करने के लिए कहते थे। ऐसे में माधव ने बिना बटन छुए लाइट ऑफ करने के लिए ये सिस्टम तैयार किया था।

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