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दुनिया में पहली बार भारत में बनी डेंगू की दवा, पूरी तरह आयुर्वेदिक, 3 अस्पतालों में सफल रहा ट्रायल

दिन में दो बार एक-एक टैबलेट लेनी होगी। कीमत को लेकर कहा जा रहा है कि इस दवा के दाम बहुत ज्यादा नहीं होंगे।

पवन कुमार | Last Modified - Apr 16, 2018, 06:32 AM IST

दुनिया में पहली बार भारत में बनी डेंगू की दवा, पूरी तरह आयुर्वेदिक, 3 अस्पतालों में सफल रहा ट्रायल

नई दिल्ली.न सिर्फ देश बल्कि दुनिया में पहली बार भारतीय वैज्ञानिकों ने डेंगू के इलाज के लिए दवा तैयार कर ली है। इस दवा की मरीजों पर की गई पायलट स्टडी भी सफल रही है। अब इस दवा के बाजार में उतारने से पहले ग्लोबल स्टैंडर्ड के तहत बड़े स्तर पर क्लीनिकल ट्रॉयल किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि वर्ष-2019 तक डेंगू के आम मरीजों के लिए यह दवा बाजार में उपलब्ध हो जाएगी। पूरी तरह से आयुर्वेदिक इस दवा को सात तरह के औषधीय पौधों से तैयार किया गया है।

दवा तैयार करने में लगा 2 साल से ज्यादा का वक्त

डेंगू की इस दवा को आयुष मंत्रालय के शोध संस्थान सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद (सीसीआरएएस) के वैज्ञानिकों ने बनाया है। दवा तैयार करने में सीसीआरएएस के एक दर्जन से अधिक वैद्य (विशेषज्ञ) को दो साल से ज्यादा का समय लगा है।

सितंबर-2019 तक पूरा हो जाएगा क्लीनिकल ट्रायल

पायलट स्टडी के परिणामों के बाद सीसीआरएएस अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर बेलगाम और कोलार मेडिकल कॉलेज में डेंगू मरीजों पर बड़े स्तर पर क्लीनिकल ट्रायल कर रहा है। तीन स्तर पर क्लीनिकल ट्रायल करने का निर्णय लिया गया है। क्लीनिकल ट्रायल सितंबर-2019 तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद परिणामों का विश्लेषण किया जाएगा।

काढ़े जैसा था फॉर्मूला, बाजार में टैबलेट की तरह मिलेगी

- गुड़गांव के मेदांता अस्पताल, कर्नाटक के बेलगाम और कोलार मेडिकल कॉलेज में हुए थे पायलट ट्रायल।

- एक दर्जन से अधिक आयुर्वेद विशेषज्ञों ने दो साल से लंबे चले शोध के बाद तैयार किया दवा का फॉर्मूला।

- 2019 में बाजार में आ सकती है दवा, सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद ने डेवलप की है।

हर दिन दो टैबलेट, सात दिन का है कोर्स
पायलट स्टडी में 90 मरीजों को जो दवा दी गई थी वह काढ़े के तौर पर लिक्विड फॉर्म में दी गई थी। लेकिन अभी जो क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं उसमें मरीज को टैबलेट के फॉर्म में दवा दी जा रही है। दवा का डोज सात दिनों का तय किया गया है। दिन में दो बार एक-एक टैबलेट लेनी होगी। कीमत को लेकर कहा जा रहा है कि इस दवा के दाम बहुत ज्यादा नहीं होंगे।

अभी तक डेंगू के लिए कोई दवा नहीं

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, दुनिया में हर साल डेंगू इंफेक्शन के पांच से 10 करोड़ नए मामले सामने आते हैं। बच्चे इसकी चपेट में ज्यादा आते हैं। डेंगू के इलाज के लिए अभी तक कोई दवा मौजूद नहीं थी। केवल बुखार कम करने के लिए पैरासिटामॉल दी जाती है। ब्लड में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने के लिए डॉक्टर ज्यादा से ज्यादा लिक्विड लेने की सलाह देते हैं।

90 मरीजों पर हुआ ट्रायल:एक भी साइड इफेक्ट्स नहीं |

दवा का चूहों और खरगोश पर सफल अध्ययन होने के बाद पायलट स्टडी की तौर पर गुड़गांव के मेदांता अस्पताल, कर्नाटक के बेलगाम और कोलार मेडिकल कॉलेज में भर्ती डेंगू के 30-30 मरीजों को यह दवा दी गई। पता चला कि दवा देने के बाद मरीज के ब्लड में प्लेटलेट्स की मात्रा जरुरत के अनुसार बढ़ती गई। एक भी मरीज पर किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट्स नहीं देखने को मिले।

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Web Title: duniyaa mein pehli baar bharat mein bani dengau ki dvaa, puri trh aayurvedik, 3 aspatalon mein sfl raha traayl
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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