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डीएमआरसी के सिस्टम पर लंदन, पेरिस और हॉन्ग कॉन्ग के सिस्टम से ज्यादा खर्च होता है

सीएसई का दावा, खर्च कम नहीं किए गए तो यात्री अपने निजी साधनों का करने लगेंगे इस्तेमाल

Danik Bhaskar | Sep 08, 2018, 06:34 AM IST

नई दिल्ली. दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के मेट्रो ट्रेन के सिस्टम पर लंदन, पेरिस और हॉन्ग कॉन्ग के सिस्टम से ज्यादा खर्च होता है। यह दावा सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने अपनी हालिया रिपोर्ट के जरिए किया है। सीएसई ने ये बयान डीएमआरसी की ओर से रिपोर्ट पर सवाल उठाए जाने के बाद जारी किया है। सीएसई ने कहा है कि विदेशों में घर से निकलकर गंतव्य तक पहुंचने के लिए अगर परिवहन का साधन बदलना पड़ता है ताे उसके लिए अलग से किराया नहीं देना हाेगा, जबकि दिल्ली मेट्राे स्टेशनाें तक पहुंचने या गंतव्य तक पहुंचने के लिए एेसी काेई व्यवस्था नहीं है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली मेट्रो के स्ट्रक्चर पर आय का करीब 14 फीसदी खर्च होता है, जोकि दुनिया के 7 देशों से ज्यादा है। हॉन्ग कॉन्ग में ये 2.9, पेरिस में 6.6, बीजिंग में 5.3, सियोल में 5.2, शंघाई में 5.7, न्यूयॉर्क में 4.6 और लंदन में 13.4 फीसदी है। सीएसई ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली मेट्रो की गिरती यात्री संख्या पर उसका हालिया अध्ययन सिर्फ यात्रा लागत के बारे में नहीं था बल्कि यात्रियों की ओर से वहन की जाने वाली कुल यात्रा लागत के बारे में था।

हल नहीं निकला तो लोग दो-पहिया व कार का इस्तेमाल करेंगे

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले साल किराये में वृद्धि के बाद दिल्ली मेट्रो उन शहरों की परिवहन सुविधाओं में दूसरी सबसे महंगी सेवा बन गई थी, जहां प्रति यात्रा के लिए एक डॉलर से कम का शुल्क वसूला जाता है। यदि इसका तुरंत हल नहीं निकाला गया तो दिल्ली और दूसरे शहरों को मेट्रो की सवारी के मामले में नुकसान उठाते रहना पड़ेगा और लोग दो-पहिया और कार का इस्तेमाल करने लगेंगे, जो उन शहरों में स्वीकार्य नहीं है जहां लोग गंभीर जनस्वास्थ्य परेशानियों से जूझ रहे हैं।