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दुनिया में पहली बार भारत में बनी डेंगू की दवा, पूरी तरह है आयुर्वेदिक, हॉस्पिटल में सफल रहा ट्रायल

2019 में बाजार में आ सकती है दवा, सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद ने डेवलप की है

Bhaskar News | Last Modified - Apr 16, 2018, 07:27 AM IST

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    डेमो फोटो।

    नई दिल्ली.न सिर्फ देश बल्कि दुनिया में पहली बार भारतीय वैज्ञानिकों ने डेंगू के इलाज के लिए दवा तैयार कर ली है। इस दवा की मरीजों पर की गई पायलट स्टडी भी सफल रही है। अब इस दवा के बाजार में उतारने से पहले ग्लोबल स्टैंडर्ड के तहत बड़े स्तर पर क्लीनिकल ट्रॉयल किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि वर्ष-2019 तक डेंगू के आम मरीजों के लिए यह दवा बाजार में उपलब्ध हो जाएगी। 90 मरीजों पर हुआ ट्रायल...


    पूरी तरह से आयुर्वेदिक इस दवा को सात तरह के औषधीय पौधों से तैयार किया गया है। डेंगू की इस दवा को आयुष मंत्रालय के शोध संस्थान सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद (सीसीआरएएस) के वैज्ञानिकों ने बनाया है। दवा तैयार करने में सीसीआरएएस के एक दर्जन से अधिक वैद्य (विशेषज्ञ) को दो वर्ष से अधिक का समय लगा है। पायलट स्टडी के परिणामों के बाद सीसीआरएएस अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर बेलगाम और कोलार मेडिकल कॉलेज में डेंगू मरीजों पर बड़े स्तर पर क्लीनिकल ट्रायल कर रहा है। तीन स्तर पर क्लीनिकल ट्रायल करने का निर्णय लिया गया है । क्लीनिकल ट्रायल सितंबर-2019 तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद परिणामों का विश्लेषण किया जाएगा।

    एक भी साइड इफेक्ट्स नहीं

    दवा का चूहों और खरगोश पर सफल अध्ययन होने के बाद पायलट स्टडी की तौर पर गुड़गांव के मेदांता अस्पताल, कर्नाटक के बेलगाम और कोलार मेडिकल कॉलेज में भर्ती डेंगू के 30-30 मरीजों को यह दवा दी गई। पता चला कि दवा देने के बाद मरीज के ब्लड में प्लेटलेट्स की मात्रा जरुरत के अनुसार बढ़ती गई। एक भी मरीज पर किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट्स नहीं देखने को मिले।

    अभी तक डेंगू के लिए कोई दवा नहीं

    डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनिया में हर साल डेंगू इंफेक्शन के पांच से 10 करोड़ नए मामले सामने आते हैं। बच्चे इसकी चपेट में ज्यादा आते हैं। डेंगू के इलाज के लिए अभी तक कोई दवा मौजूद नहीं थी। केवल बुखार कम करने के लिए पैरासिटामॉल दी जाती है। ब्लड में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने के लिए डॉक्टर ज्यादा से ज्यादा लिक्विड लेने की सलाह देते हैं।

    हर दिन दो टैबलेट, सात दिन का है कोर्स

    पायलट स्टडी में 90 मरीजों को जो दवा दी गई थी वह काढ़े के तौर पर लिक्विड फॉर्म में दी गई थी लेकिन अभी जो क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं उसमें मरीज को टैबलेट के फॉर्म में दवा दी जा रही है। दवा का डोज सात दिनों का तय किया गया है। दिन में दो बार एक-एक टैबलेट लेनी होगी। कीमत को लेकर कहा जा रहा है कि इस दवा के दाम बहुत ज्यादा नहीं होंगे।

    क्लीनिकल ट्रायल के बाद ट्रांसफर करेंगे तकनीक

    दुनिया में पहली बार डेंगू बीमारी के इलाज के लिए दवा विकसित की गई है। सबसे बड़ी बात है पायलेट स्टडी में इस दवा के कोई साइड इफेक्ट्स सामने नहीं आए हैं। अगले साल सितंबर तक क्लीनिकल ट्रायल पूरे हो जाएंगे। इसके बाद तय प्रोसिजर के तहत उस कंपनी को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की जाएगी, जो दवा को तैयार कर बाजार में लाने के लिए तैयार होगी। -वैद्य प्रो.के.एस.धिमान, महानिदेशक, सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद

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