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गंगा के लिए 111 दिन के अनशन बैठे प्रो. जीडी अग्रवाल का निधन, 1932 में IIT और अमेरिका से की थी पीएचडी, सामने आई आखिरी चिट्ठी

एक महीने पहले ही कह दिया था- नवरात्र में पानी भी छोड़ दूंगा।

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2018, 01:46 PM IST
granga crusader professor gd agrawal dies after 111 days of fast

हरिद्वार/नई दिल्ली। गंगा की सफाई के मुद्दे पर 22 जून से अनशन पर बैठे पर्या वरणवि द प्रो. जीडी अग्रवाल का गुरुवार दोपहर निधन हो गया। 86 साल के प्रो. अग्रवाल 111 दि न से अनशन पर थे। पुलिस ने बुधवार दोपहर उन्हें जबरदस्ती एम्स ऋषि केश में भर्ती करवा दिया था। प्रो. अग्रवाल ने गुरुवार सुबह 6.45 बजे हाथ से प्रेस नोट लिखकर बताया कि उनकी इजाजत से डॉक्टरों ने उन्हें मुंह और आईवी के जरिये पोटेशियम की खुराक दी है।

स्वामी शिवानंद सरस्वती ने उनकी मौत को बताया हत्या

हालांकि, दोपहर करीब 2.00 बजे हरिद्वार से दिल्ली लेकर जाते समय उनका निधन हो गया। इस बीच मातृ सदन के प्रमुख स्वामी शिवानंद सरस्वती ने प्रोफेसर जीडी अग्रवाल की मौत को सरकार के इशारे पर की गई हत्या बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हरिद्वार प्रशासन, एम्स और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी हत्या के जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि मां गंगा ने उन्हें क्या इसीलिए बुलाया था कि वे गंगा भक्तों का बलिदान लेते रहें। गंगा के मुद्दे पर 2011 में 115 दि न के अनशन के बाद स्वा मी नि गमानंद भी दम तोड़ चुके थे।

अमेरिका में पीएचडी की, 2011 में संन्यास ले लिया

20 जुलाई 1932 को यूपी के मुजफ्फरनगर के कंधाला गांव में किसान परिवार में जन्मे प्रो. अग्रवाल सिविल यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की (अब आईआईटी रुड़की) में इंजीनिरिंग की। कैलिफोर्निया यूनिवर्सि टी से एन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग में पीएचडी की। आईआईटी कानपुर में प्रोफेसर रहे। 2011 में संन्यास ले लिया।

आखिरी चिट्ठी: गुरुवार सुबह हाथ से प्रेस रिलीज लिखा

बुधवार दोपहर हरिद्वार प्रशासन ने मुझे मातृ सदन से जबरदस्ती उठा एम्स ऋषि केश में दाखिल करा दिया था। मां गंगाजी के संरक्षण को लेकर मेरी तपस्या के प्रति यहां के डॉक्टर काफी सहयोगी रहे। पेशेवर चिकित्सा संस्थान की तरह डॉक्टरों ने मेरे सामने तीन विकल्प रखे। पहला- मुझे मुंह और नाक से जबरदस्ती खाना दिया जाए। दूसरा- जबरदस्ती आईवी लगाई जाए। तीसरा- अस्पताल में दाखिल न किया जाए। जांच से पता चला कि रक्त में पोटेशियम की मात्रा 1.7 रह गई है। जो 3.5 होनी चाहिए। डॉक्टरों के आग्रह पर मैंने मुंह व आईवी से 500 मिली प्रतिदिन की खुराक पर सहमति जता दी। मेरी तपस्या के प्रति सहयोग के लिए मैं एम्स का शुक्रगुजार हूं।’ -प्रो. जीडी अग्रवाल (आखिरी चिट्टी में)

करीब महीनेभर पहले ही कह दिया था- नवरात्र में पानी भी छोड़ दूंगा

उसके बाद प्राण भी त्याग दूंगा शरद पाण्डेय| प्रो. जीडी अग्रवाल ने पि छले माह ही मृत्यु का समय बता दिया था। कहा था नवरात्र में प्राण त्या ग दूंगा। जहां वे अनशन पर बैठे थे, वह जगह 2011 में गंगाजी के लिए प्राण त्या गने वाले स्वा मी नि गमानंद की समाधि से महज 50 मीटर दूरी पर थी। जीडी अग्रवाल ने नवरात्र (10 अक्टू बर) से जल छोड़ने की घोषणा की थी। बुधवार से पानी नहीं ले रहे थे। अनशन में भी वे रोज सुबह साढ़े 5 बजे उठ जाते। साढ़े 7 बजे 2 गि लास पानी, नींबू, शहद और नमक मि लाकर पीते। 9 बजे से अखबार पढ़ना शुरू करते। दोपहर 1 बजे के अासपास दो गि लास पानी पीते। शाम साढ़े 6 बजे गंगा आरती में शामि ल होते थे। रात साढ़े 8 बजे नींबू पानी लेते और साढ़े 9 बजे सोने चले जाते थे।

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