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दहेज उत्पीड़न के मामलों में अब फिर तुरंत गिरफ्तार हो सकेंगे पति और ससुराल वाले

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच ने शुक्रवार को 27 जुलाई 2017 को दहेज कानून पर दिए फैसले में...

Danik Bhaskar | Sep 15, 2018, 02:12 AM IST
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच ने शुक्रवार को 27 जुलाई 2017 को दहेज कानून पर दिए फैसले में बदलाव कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दहेज पीड़िता की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है। कोर्ट इस तरह कानून की खामियां नहीं भर सकता। इसके लिए विधायिका को कानून बनाना होगा। कोर्ट नहीं चाहता कि पति-प|ी में झगड़ा हो। शेष|पेज 7 पर

27 जुलाई 17|यह था फैसला

परिवार कल्याण समिति करेगी

जांच, उसके बाद गिरफ्तारी हो

27 जुलाई 2017 को कहा गया था कि दहेज प्रताड़ना से जुड़े कानून का दुरुपयोग होता है। आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी जरूरी नहीं। लीगल सर्विसेज अथॉरिटी हर जिले में परिवार कल्याण समिति गठित करें। इसके तहत पुलिस या मजिस्ट्रेट को मिली शिकायतें इस समिति को भेजी जाएं। समिति महीनेभर में रिपोर्ट देगी। तब तक गिरफ्तारी नहीं की जाए। रिपोर्ट पर जांच अधिकारी या मजिस्ट्रेट विचार करेंगे। समिति में सिविल सोसायटी को भी शामिल किया जाना था।

14 सितंबर 18| अब यह हुआ

कोर्ट का आदेश गलत; समिति नहीं, पुलिस ही करेगी जांच:

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामले की जांच किसी समिति को सौंपना और उसी आधार पर केस निपटाना अस्वीकार्य है। कोर्ट ऐसा आदेश नहीं दे सकता। यह काम विधायिका का है। ऐसे मामलों की जांच पुलिस ही करेगी। गिरफ्तारी भी कर सकते हैं। जांच अधिकारी सावधानीपूर्वक काम करेंगे। जरूरी है कि वह इस काम में प्रशिक्षित हों। डीजीपी सुनिश्चित करेंगे कि इस निर्देश की कोताही न हो। समझौते के आधार पर केस रद्द करने का अधिकार सिर्फ हाईकोर्ट का है।