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दुनिया के 24 देशों में हैं भारत के 121 मोस्ट वांटेड, ब्रिटेन पसंदीदा देश, देश से 40 हजार करोड़ रुपए लेकर भागे हैं

जिन 24 देशों में भारतीस भगोड़े छुपे हुए हैं, उनमें 19 के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है।

Dainik Bhaskar

Jun 17, 2018, 07:02 AM IST
ब्रिटेन नीरव मोदी और माल्या को ब्रिटेन नीरव मोदी और माल्या को

  • 70 फीसदी भारतीय भगोड़े ब्रिटेन, अमेरिका, यूएई, कनाडा में हैं
  • 5 साल में 5500 भारतीय नागरिकों ने ब्रिटेन से राजनीतिक शरण मांगी है

नई दिल्ली. ब्रिटेन भारतीय भगोड़ों के लिए पसंदीदा स्थान बनता जा रहा है। पंजाब नेशनल बैंक को 13,500 करोड़ रुपए का चूना लगाने वाले हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने ब्रिटेन में राजनीतिक शरण मांगी है। नीरव से पहले ब्रिटेन में भारत के कई भगोड़े पनाह ले चुके हैं। इनमें ललित मोदी, विजय माल्या, म्यूजिक डायरेक्टर नदीम शैफी, टाइगर हनीफ, संजीव चावला, रवि शंकरन, लॉर्ड सुधीर चौधरी, राजकुमार पटेल, राजेश कपूर और अब्दुल शाकूर जैसे नाम शामिल हैं। 2013 से अब तक भारत से गए 5,500 से ज्यादा लोगों ने ब्रिटेन में राजनीतिक शरण के लिए अर्जी दी। हालांकि, ये सभी अपराधी नहीं हैं।

भारत के 121 मोस्ट वांटेंड भगोड़े दुनिया के 24 देशों में रह रहे हैं। इनके प्रत्यर्पण के लिए भारत सरकार विभिन्न देशों से अपील भी कर चुकी है। भारतीय भगोड़ों का सबसे पसंदीदा देश ब्रिटेन, अमेरिका, यूएई, कनाडा हैं। 70% यानी 83 भगोड़े इन्हीं 4 देशों में रह रहे हैं। जानकारी पिछले साल विदेश मंत्रालय में एक आरटीआई के जवाब में दिया था।

सबसे ज्यादा 13500 करोड़ लेकर नीरव मोदी भागा

नीरव मोदी, माल्या, मेहुल चौकसे, जतिन मेहता, ललित मोदी समेत 31 भारतीय भगोड़े देश से 40 हजार करोड़ रु से ज्यादा रकम लेकर भागे हैं। ये रकम बैंकों और सार्वजनिक संस्थानों की है। ये 31 नाम फ्राॅड और वित्तीय अपराध में शामिल हैं। इन पर ईडी और सीबीआई 15 अलग-अलग मामलों में केस दर्ज कर चुकी है। विदेश मंत्रालय ने अप्रैल में लोकसभा में पेश अपनी रिपोर्ट में इन नामों की जिक्र किया था।

देश भगोड़े
अमेरिका 38
यूएई 20
कनाडा 13
ब्रिटेन 12
जर्मनी 05
सिंगापुर 05
बांग्लादेश 03
इटली 03
नेपाल 03
अन्य 19

(जिन 24 देशों में भगोड़े हैं, उनमें 24 के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है। आंकड़े नवंबर-2017 तक के हैं। स्रोत- भारतीय विदेश मंत्रालय)

ब्रिटेन में 75 हजार अवैध भारतीय अप्रवासी

ब्रिटेन में 60 बड़े नाम हैं: ब्रिटेन मोदी, माल्या को अवैध अप्रावसियों की लिस्ट में डालकर भारत को प्रत्यर्पित कर सकता है। हाल में भारत ने अवैध अप्रवासियों के प्रत्यर्पण को लेकर ब्रिटेन से 2 एमओयू साइन किए हैं। इसके अमल में आने के बाद मोदी, माल्या के साथ करीब 75 हजार भारतीयों के प्रत्यर्पण की सुविधा मिलेगी। जो भारत में मनी लॉन्ड्रिंग में आरोपों का सामना कर रहे हैं। इनमें 60 बड़े नाम हैं, जिनका भारत प्रत्यर्पण चाहता है। सरकार ने हाल में ब्रिटेन को 14 लोगों की लिस्ट भी सौंपी है।

भारत की 48 देशों से प्रत्यर्पण संधि, ब्रिटेन से 26 साल पहले हुई थी
भारत का दुनिया के 48 देशों के साथ प्रत्यपर्ण संधि है। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, यूएई, हांगकांग, बेल्जियम, बुल्गेरिया, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीट्जरलैंड आदि देश शामिल हैं। ब्रिटेन के साथ यह संधि 1992 में हुई थी।

भारत 16 साल में विदेश से सिर्फ 65 लोगों का प्रत्यर्पण करवा सका है

भारत सरकार के मुताबिक 2002 से मार्च 2018 तक विदेशों से 65 व्यक्तियों का प्रत्यर्पण कराया गया है। इनमें मोनिका बेदी, अबू सलेम, अब्दुल सत्तार, छोटा राजन, अनूप चेतिया, अब्दुल राउफ मर्चेंट जैसे नाम शामिल हैं। सबसे ज्यादा 17 प्रत्यर्पण यूएई से हुआ है।

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क्यों ब्रिटेन लोगों के लिए सेफ जगह है ?
यूरोपियन कन्वेंशन ऑन ह्यूमन राइट्स(ईसीएचआर) पर ब्रिटेन ने दस्तखत किए हैं। इसके तहत यदि ब्रिटेन की अदालतों को ऐसा लगता है कि किसी व्यक्ति को प्रत्यर्पित किया गया तो उसे प्रताड़ित किया जा सकता है, मौत की सजा दी जा सकती है या फिर राजनीतिक कारणों से ऐसा कुछ हो रहा है तो वह प्रत्यर्पण के अनुरोध को खारिज कर सकता है।

कौन ब्रिटेन में ले सकता है पनाह ?
ब्रिटेन में वो कोई भी व्यक्ति पनाह ले सकता है, जिसे अपने देश में धर्म, नस्ल, जाति, राष्ट्रीयता या मत की वजह से खतरा महसूस कर रहा हो। वह बतौर रिफ्यूजी 5 साल ब्रिटेन में रह सकता है। यदि 5 साल में हालात अच्छे नहीं होते तो वह इसे आगे भी बढ़ावा सकता है।

कैसे कोई बन सकता है रिफ्यूजी ?
इसके लिए ब्रिटेन के माइग्रेंट डिपार्टमेंट में सिर्फ आवेदन करना होता है। छह महीने के अंदर इसे स्वीकृति मिल जाती है। कानूनी पेंच फंसने पर इसमें 1 साल भी लग सकता है। अब फास्ट ट्रैक डिपार्टमेंट बनाया गया है। जिसमें सिर्फ 22 दिन में ही प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

क्या सरकार आर्थिक मदद भी करती है?
ब्रिटेन सरकार रिफ्यूजी की आर्थिक मदद भी करती है। सरकार रिफ्यूजी के रहने की व्यवस्था करती है। अकेले व्यक्ति को 3364 रुपए हर हफ्ते देती है। सिंगिल पैरेंट्स को 6728 रुपए और कपल को 13365 रु. मिलते हैं।

हर साल ब्रिटेन में कितने लोग आते हैं ?
2018 में मार्च तक ब्रिटेन ने 1.31 लाख लोंगों का वीसा स्वीकृत हुआ है। इनमें सबसे ज्यादा भारतीय हैं, इनकी संख्या 45.89 हजार है। रूस के 23.6 हजार और पाकिस्तान के 15 हजार लोग शामिल हैं।

कितने रिफ्यूजी के लिए आवेदन हैं?
मार्च तक 14,166 लोगों को रिफ्यूजी फॉर्म स्वीकृत हुए हैं। हालांकि ये पिछले साल से 11% कम है। इनमें प्रोटेक्शन और रीसेटलमेंट आवेदन भी शमिल हैं।

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