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जेएनयू में तैयार होंगे प्रशिक्षित पंडित और धार्मिक पर्यटन के विशेषज्ञ, हर धर्म और समुदाय के छात्र ऐसे ले सकेंगे एडमिशन

यूनिवर्सिटी की संस्कृत एवं भारतीय अध्ययन शाला में 2019 के नए सत्र से होंगे एडमिशन

Bhaskar News | Last Modified - Apr 15, 2018, 09:27 AM IST

  • जेएनयू में तैयार होंगे प्रशिक्षित पंडित और धार्मिक पर्यटन के विशेषज्ञ, हर धर्म और समुदाय के छात्र ऐसे ले सकेंगे एडमिशन
    डेमो फोटो।

    नई दिल्ली.देश भर के मंदिरों में जल्द ही दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिर्वसिटी (जेएनयू) से प्रशिक्षित पंडित पूजा-अर्चना करते दिखेंगे। इतना ही नहीं, यूनिवर्सिटी धार्मिक पर्यटन और वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञ भी तैयार करेगी। दरअसल, जेएनयू में हाल ही में स्थापित स्कूल ऑफ संस्कृत एंड इंडिक स्टडीज(एसएसआईएस) ने इसका प्रस्ताव तैयार किया है। खास बात यह है कि इस कोर्स में हर धर्म, जाति और समुदाय के छात्र एडमिशन ले सकेंगे। 2019 के सत्र से इन पाठ्यक्रमों को शुरू कर दिया जाएगा...

    इन कोर्स के जरिए जेएनयू का संस्कृत को एक रोजगारपरक भाषा बनाने की भी योजना है। एसएसआईएस के डीन गिरीश नाथ झा बताते हैं, ‘हम संस्कृत की छवि तोड़ना चाहते हैं। यह प्राचीन भाषा है जो अल्ट्रा-मॉडर्न भी है और कंप्यूटर के लिए भी उपयुक्त है।’ जेएनयू में उपरोक्त कोर्स 2019 के नए सत्र से शुरू होंगे। इनमें हर धर्म, जाति, समुदाय और लिंग के छात्र एडमिशन ले सकेंगे। झा कहते हैं कि आने वाले वक्त में देश भर के मंदिरों में जेएनयू से प्रशिक्षित पंडितों को पूजा-पाठ करते देखना चाहते हैं।

    पंडित प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को श्रुति पर आधारित स्रोतसूत्र, स्मृति या परंपरा पर आधारित स्मृतसूत्र जैसे पाठ पढ़ाए जाएंगे। इन कोर्स को कराने का प्रस्ताव 23 ‌फरवरी को एसएसआईएस की स्कूल कॉर्डिनेशन कमेटी में लिया गया था। इस बैठक में स्कूल ऑफ साइंस और ई-लर्निग कोर्स के विशेषज्ञों को खास तौर पर आमंत्रित किया गया था। बैठक में मौजूदा कोर्स के अतिरिक्त कुछ नए कोर्स शुरू करने पर भी फैसला किया गया। एक बार ड्राफ्ट तैयार होने के बाद बोर्ड ऑफ स्टडीज को भेजा जाएगा इसके बाद इसे अकादमिक काउंसिल की बैठक में पेश किया जाएगा। काउंसिल को मंजूरी मिलने के बाद 2019 के सत्र से इन पाठ्यक्रमों को शुरू कर दिया जाएगा। जेएनयू में 2001 में स्थापित स्पेशल सेंटर फॉर संस्कृत स्टडीज को पूरी तरह अपग्रेड कर दिसंबर 2017 में स्कूल ऑफ संस्कृत एंड इंडिक स्टडीज के रूप में तब्दील किया गया है।

    नए सत्र से इन पाठ्यक्रमों में होगा एडमिशन

    - देश भर में धार्मिक स्थलों और मान्यताओं को देखते हुए धार्मिक पर्यटन का पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा करवाया जाएगा।

    - वास्तु शास्त्र में एक साल का पीजी डिप्लोमा। इस कोर्स के बाद सिविल इंजीनियरिंग क्षेत्र में नौकरियां मिलने की उम्मीद है।
    - योग और योग केंद्रों में लोगों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए योग में एमए की डिग्री। आयुर्वेद में बीएसएसी का डिग्री कोर्स भी करवाया जाएगा।

    - अगले चरण में संस्कृत पत्रकारिता, शास्त्रीय संगीत जैसे नए कोर्स शुरू किए जाएंगे। इनके अलावा बीए(संस्कृत) ऑनलाइन-ऑफलाइन और कल्प वेदांग के कोर्स भी शामिल किए जाएंगे।

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Web Title: JNU Will Be Trained, Trained Pundits And Religious Tourism Experts
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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