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येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं लगाई रोक, सुबह 9 बजे लेंगे शपथ

सुप्रीम कोर्ट का येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने से किया इनकार

Bhaskar News | Last Modified - May 17, 2018, 06:42 AM IST

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    नई दिल्ली.सुप्रीम कोर्ट ने बीएस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण समारोह पर रोक लगाने की मांग को इनकार कर दिया। येदियुरप्पा आज सुबह 9 बजे कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, लेकिन मंत्रिमंडल का गठन अभी नहीं होगा SC ने BJP से समर्थक MLA की लिस्ट भी मांगी है। बता दें कि कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला ने 104 सीटों वाले सबसे बड़े दल भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया है। राज्यपाल के भाजपा को बहुमत साबित करने 15 दिन का वक्त दिए जाने के फैसले के खिलाफ बुधवार रात 11 बजे कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई और अर्जी दाखिल की। कांग्रेस ने रात को ही इस पर सुनवाई का आग्रह किया था। जिसके बाद सीजेअाई दीपक मिश्रा की बनाई 3 जजों की बेंच ने सुप्रीम कोर्ट में रात 02:10 पर शुरु हुई सुनवाई में करीब साढ़े तीन घंटे की जिरह के बाद येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने मना कर दिया। हालांकि, मामले में कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीले सुनने के बाद सुनवाई शुक्रवार सुबह 10:30 बजे तक के लिए टाल दी है। मामले में कोर्ट ने कांग्रेस की अर्जी को पूरी तरह से खारिज न करते हुए कहा, "इस अर्जी पर बाद में भी सुनवाई की जा सकती है।" सुप्रीम कोर्ट ने येदियुरप्पा समेत संबंधित लोगों को नाेटिस जारी करते हुए जवाब देने का आदेश दिया।

    सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस-जेडीएस ने रखी ये दलीलें

    - सिंघवी ने बेंच के सामने कहा कि कोर्ट या तो गवर्नर के उस आदेश को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दें, जिसमें येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दिया गया है या फिर 112 विधायकों से ज्यादा के समर्थन वाले कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन को न्योता देने का निर्देश पास करें।
    - सिंघवी ने ये भी कहा कि बुधवार को कांग्रेस विधायक दल ने प्रस्ताव पारित कर जेडीएस को समर्थन का ऐलान किया था। एचडी कुमारस्वामी ने 37 विधायकों के हस्ताक्षर भी गवर्नर को सौंपे थे, जिसमें कांग्रेस के समर्थन का जिक्र था।

    - सिंघवी ने कहा, “भाजपा के पास 104 विधायकों का समर्थन है और गवर्नर ने भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने न्योता दिया। ये पूरी तरह असंवैधानिक है। ये कभी नहीं सुना गया कि वो पार्टी जिसके पास 104 सीटें हों उसे 112 सीटों का बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन दिए जाएं। पहले ऐसे किसी भी मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से 48 घंटे ही दिए जाते थे।"

    - साथ ही सिंघवी ने गोवा मामले का हवाला देते हुए कहा, “गोवा में कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद हमें सरकार बनाने से रोक दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी बीजेपी के सरकार बनाने को सही ठहराया था।”

    - बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में पूर्व कांग्रेस-जेडीएस की ओर से वकील अभिषेक मनु सिंघवी मामले की पैरवी की। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी बीजेपी का पक्ष रखा। वहीं, केंद्र की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता मौजूद थे।

    वह लेटर कहां है, जिस पर गवर्नर ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया?- बेंच

    - कोर्ट ने सिंघवी से पूछा कि क्या ये प्रथा नहीं रही है कि गवर्नर सबसे बड़ी पार्टी को ही बहुमत साबित करने के लिए न्योता देता हो?
    - सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट गवर्नर को किसी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता देने से रोक सकता है? इस पर सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ये पहले भी किया है।
    - कोर्ट ने पूछा कि कर्नाटक में अभी किसका प्रभार है? सिंघवी ने जवाब में कहा कि केयरटेकर सरकार का।
    - सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा, “हम इस पर विचार कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट गवर्नर को रोक सकती है, जो राज्य में संवैधानिक निर्वात(वैक्यूम) का कारण होगा।”

    - बेंच के जजों ने सिंघवी से पूछा कि वह लेटर कहां है, जिस पर गवर्नर ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया?

    - जस्टिस एसए बोबड़े ने कहा, " हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि बीएस येदियुरप्पा किस आधार पर बहुतम का दावा कर रहे हैं। जब तक हम वह लेटर नहीं देख लेते, हम इस बात का अंदाजा नहीं लगा सकते।"

    यदि कोई शपथ ले लेता है तो कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा- वकील रोहतगी

    - बीजेपी के वकील रोहतगी ने सुनवाई के दौरान कहा, "इस मामले में देर रात सुनवाई जरूरी नहीं है। यदि कोई शपथ ले लेता है तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केवल याकूब मेनन के मामले में देर रात सुनवाई की थी, क्योंकि वह फांसी दिए जाने का मामला था।"

    - केन्द्र के वकील अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट में कहा, "इस याचिक को लगाया ही नहीं जाना चाहिए था। कांग्रेस और जेडीएस को बहुमत साबित होने तक इंतजार किया जाना चााहिए था।"

    - रोहतगी ने कांग्रेस-जेडीएस की अर्जी को खारिज करने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि शपथ के लिए न्योता देना राज्यपाल का काम है। राष्ट्रपति और राज्यपाल किसी कोर्ट को इसे लिए जवाबदेह नहीं हैं। कोर्ट को किसी संवैधानिक पदाधिकारी को उसके अधिकारिक कर्तव्यों को किए जाने से नहीं रोका जाना चााहिए।

    बेंच में ये जज कर रहे हैं सुनवाई

    बता दें कि देर रात सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार कांग्रेस-जेडीएस की अर्जी लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के घर पहुंचे थे। जहां सीजेआई ने मामले में सुनवाई करने तीन जजों की बेंच बनाई। इसमें जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस बोबड़े शामिल हैं।

    कांग्रेस-जेडीएस के दावे के 4 घंटे बाद राज्यपाल का बीजेपी को न्योता

    इससे पहले करीब शाम 5 बजे कांग्रेस-जेडीएस ने राज्यपाल से मुलाकात की और जरूरी बहुमत होने के दस्तावेज दिखाए और सरकार बनाने का दावा पेश किया था। हालांकि, इसके 4 घंटे बाद ही वजूभाई वाला ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए बुलाया। कर्नाटक भाजपा के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर किए गए ट्वीट में गुरुवार सुबह 9.00 बजे विधायक दल के नेता बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की बात कही थी। बता दें कि 1996 में जब देवेगौड़ा प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने गुजरात की सरकार भंग करने की सिफारिश राष्ट्रपति से की थी और उस वक्त वजूभाई वाला भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे।

    कांग्रेस-जेडीएस के 14 विधायक सदन से गैरहाजिर हो जाएं तो भाजपा के पास मौका

    # कुल सीटें: 224

    # 2 सीटों पर मतदान नहीं हुआ इसलिए कुल सीटें: 222

    # एचडी कुमारस्वामी 2 सीटों से जीते इसलिए सदन में कुल विधायकों की संख्या: 221

    # अगर 14 विधायक फ्लोर टेस्ट के दौरान सदन से गैरहाजिर हो जाएं तो विधायकों की संख्या: 207

    # सदन में विधायकों की संख्या 207 होने पर बहुमत का आंकड़ा: 104

    # बहुमत का आंकड़ा भाजपा के पास: 104

    कांग्रेस-जेडीएस के पास क्या हैं विकल्प?

    - जेडीएस-कांग्रेस को अपने सभी 116 विधायकों को एकजुट रखना होगा। कांग्रेस ने बुधवार देर शाम अपने सभी विधायकों को बेंगलुरु के पास इगलटन रिसॉर्ट में इकट्ठा भी कर लिया। सभी को एक बस में वहां ले जाया गया।

    मौजूदा स्थिति : भाजपा सबसे बड़ी पार्टी, बहुमत से 8 सीटें दूर

    - राज्य में कुल सीटें 224 हैं। बहुमत के लिए 113 जरूरी।

    - 2 सीटों पर मतदान बाकी है। इसलिए बहुमत का आंकड़ा 112 है।

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