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गोशाला के बचाव में कमेटी ने सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

गुड़गांव-फर्रुखनगर-झज्जर स्टेट हाईवे पर बनाए जा रहे बाइपास के बीच सुलतानपुर गांव की सीमा क्षेत्र में आ रही गोशाला...

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2018, 02:00 AM IST
गुड़गांव-फर्रुखनगर-झज्जर स्टेट हाईवे पर बनाए जा रहे बाइपास के बीच सुलतानपुर गांव की सीमा क्षेत्र में आ रही गोशाला को बचाव के लिए मंगलवार को गउशाला कमेटी के सदस्य एवं क्षेत्र के लोगों ने प्रदेश के सीएम मनोहर लाल के नाम पर डीसी को ज्ञापन सौंपा। लोगों ने इसका विरोध करते हुए सरकार से इस भूमि अधिग्रहण को वापस लेने व गोशाला को उजाड़ने से बचाने की मांग की। इससे पहले 10 जून को गोशाला में महापंचायत हुई थी, जिसमें आर-पार की लड़ाई का फैसला लिया गया था। इसके साथ ही महापंचायत ने सीएम के नाम डीसी को ज्ञापन सौंपने का फैसला लिया था। इसी क्रम में मंगलवार को गोशाला कमेटी के सदस्य डीसी से मिले और अपनी स्थिति स्पष्ट की। कमेटी सदस्यों ने कहा कि सुल्तानपुर गोशाला एक प्राचीन गोशाला है, जिसका निर्माण 1906 में हुआ था। गुड़गांव शहरी क्षेत्र में गौशाला में गौ की संख्या अधिक होने तथा जगह की कमी के चलते ग्राम सुलतानपुर (फर्रुखनगर) में करोड़ों रुपए की लागत से 12 वर्ष पहले गौशाला का विस्तार किया गया था जो आज भी प्रदेश की प्रमुख गोशालाओं में से एक है। इसमें आज भी लगभग 1500 से अधिक गाय की सेवा हो रही है। वर्ष 2013 के अंत में नए भूमि अधिग्रहण के तहत तत्कालीन सरकार ने भूमि अधिनियम के लिए सेक्शन 4 के नोटिस जारी किए हैं। हरियाणा सरकार के पूर्व डिप्टी स्पीकर गोपीचंद गहलोत ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत के चलते इसे दिनांक 31 दिसंबर 2013 में दिखाया गया, ताकी इसे ठीक माना जाए। यह नोटिफिकेशन सेक्टर-1 फर्रुखनगर के लिए किया गया था जिसमें दिसंबर 2014 में सेक्शन-6 का नोटिस दिया गया था। यह पूरी तरह से गैर कानूनी था। बाद में अपनी गलती का एहसास होने पर हुडा विभाग ने लगभग 16 एकड़ जमीन को छोड़कर शेष भूमि को डिनोटिफिकेशन कर अधिग्रहण से मुक्त कर दिया, लेकिन उसमें से सुल्तानपुर गांव कि लगभग 4 एकड़ जमीन अधिग्रहण की गई जिसमें गोशाला के सभी पक्के शेड व कर्मचारियों के कमरे, एक बड़ा गेट जो कि अधिग्रहण कि कार्रवाई से पहले बने हुए हैं उन को एनवायरमेंट में दिखाया गया है।

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