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कॉलेज में लर्निंग लाइसेंस बनवाने के प्रोजेक्ट पर रोक

अखिलेश कुमार | नई दिल्ली akhilesh.kumar4@dbcorp.in दिल्ली परिवहन विभाग के यूनिवर्सिटी, कॉलेज और पॉलीटेक्निक कॉलेजों में...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 02:05 AM IST

अखिलेश कुमार | नई दिल्ली akhilesh.kumar4@dbcorp.in

दिल्ली परिवहन विभाग के यूनिवर्सिटी, कॉलेज और पॉलीटेक्निक कॉलेजों में लर्निंग लाइसेंस बनाने के ड्रीम प्रोजेक्ट को रोक दिया है। सात स्टेट यूनिवर्सिटी, दिल्ली सरकार के 9 पॉलीटेक्निक कॉलेज और डीयू के 80 व आईपीयू के 34 कॉलेजों में लर्निंग लाइसेंस बनाने के लिए प्रिंसिपल को लाइसेंसिंग अथॉरिटी अधिसूचित करने के ड्राफ्ट पर कानून विभाग ने आपत्ति जताई है। साथ ही कहा है कि केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम एक्ट-1988 और दिल्ली मोटर वाहन नियम-1993 में बदलाव के बिना प्रिंसिपल को लाइसेंसिंग अथॉरिटी नियुक्त नहीं कर सकते। कानून विभाग ने यह भी तर्क दिया है कि परिवहन विभाग ने बेशक कहा है कि सारथी सॉफ्टवेयर में काम शुरू होने के कारण लाइसेंसिंग अथॉरिटी को रजिस्टर रखने की जरूरत नहीं है। नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर के सॉफ्टवेयर से डाटा सीधे सर्वर में चला जाता है। लेकिन केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम-1988 की धारा 26 और दिल्ली मोटर वाहन नियम-1993 के नियम 13 में साफ नहीं किया गया है कि रजिस्टर रखने की जरूरत नहीं है।

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विभाग का तर्क- महाराष्ट्र-पंजाब में संभव है तो यहां क्यों नहीं

परिवहन विभाग ने डीयू, आईपीयू, पॉलीटेक्निक और स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रिंसिपल व अधिकारी को लाइसेंसिंग अथॉरिटी अधिसूचित करने की जो अधिसूचना भेजी थी, उसमें तर्क था कि ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, टैक्स ऑनलाइन, ड्राइविंग टेस्ट की वीडियोग्राफी, ऑटोमेटेड ट्रैक, फैंसी नंबर ऑनलाइन नीलामी, वाहन ट्रांसफर ऑनलाइन अधिनियम में बदलाव का इंतजार करते तो नहीं हो पाता। विभाग के विशेष आयुक्त केके दहिया से भास्कर ने बात की तो उन्होंने कहा कि आपत्तियां जो आई हैं, उनमें फिर से कानून विभाग को बताएंगे कि महाराष्ट्र और पंजाब में जब अधिसूचित किया गया है तो यहां भी संभव है।

परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर पर होना है टेस्ट

दिल्ली में सालाना 4 लाख लर्निंग लाइसेंस बनते हैं। इसमें 53 फीसदी लाइसेंस 18 से 25 वर्ष के युवा बनवाते हैं। यूनिवर्सिटी, कॉलेज या पॉलीटेक्निक के कंप्यूटर लैब में टेस्ट कराए जा सकते हैं। प्रश्न बैंक विभाग का होगा। कागजात चेक कर फीस भुगतान और टेस्ट का काम प्रिंसिपल देखेंगे। जो प्रिंसिपल इसे लागू न करना चाहे, उसके लिए कोई अनिवार्यता नहीं है। दुपहिया 500 और कार को शामिल कर लें तो फीस 950 रुपए होगी।

प्राइवेट डीएल पर ऑटो-टैक्सी चलाने के लिए ट्रेनिंग हो

दिल्ली-समेत देशभर में ऑटो-टैक्सी या अन्य लाइट कॉमर्शियल वाहन अब प्राइवेट लाइसेंस पर चला सकेंगे। लेकिन महिला सुरक्षा व सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी रिफ्रेशर कोर्स, पुलिस सत्यापन के साथ पीएसवी बैज व अलग चालक है तो परिवहन विभाग ऑथराइजेशन सर्टिफिकेट जारी करने के पक्ष में है। केंद्र सरकार से जारी सर्कुलर की प्रति परिवहन विभाग ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को भेजी है। आयुक्त केके दहिया ने बताया कि रिफ्रेशर कोर्स व ट्रेनिंग प्राइवेट लाइसेंस होने के बावजूद पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहन चलाने को किस तरह दिया जाए।

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