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15 दिन में पांच बार आ चुकी है आंधी; कभी मौसम विभाग का अनुमान गलत निकला तो कभी अलर्ट तक जारी नहीं कर पाए

राहुल मानव | नई दिल्ली rahul.manav@dbcorp.in राजधानी में पिछले 15 दिन (2 मई से 16 मई के बीच) के भीतर पांच बार आंधी-तूफान आ चुका है। मगर...

Dainik Bhaskar

May 17, 2018, 02:05 AM IST
15 दिन में पांच बार आ चुकी है आंधी; कभी मौसम विभाग का अनुमान गलत निकला तो कभी अलर्ट तक जारी नहीं कर पाए
राहुल मानव | नई दिल्ली rahul.manav@dbcorp.in

राजधानी में पिछले 15 दिन (2 मई से 16 मई के बीच) के भीतर पांच बार आंधी-तूफान आ चुका है। मगर कभी मौसम विभाग के अनुमान से पहले आंधी आ गई तो कभी विभाग ने कोई अलर्ट ही जारी नहीं किया।

16 मई को तड़के 2 बजकर 53 मिनट पर सफदरजंग में 98 किलोमीटर की रफ्तार से आंधी चली। वहीं, पालम आईजीआई एयरपोर्ट पर 3 बजकर 2 मिनट पर 105 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। मौसम विभाग से जब सवाल किया गया कि 16 मई को इतनी तेज तूफान का अलर्ट नहीं दिया गया तो विभाग ने कहा कि तेज आंधी-तूफान चलने की सूचना दी गई थी। कई बार भविष्यवाणी करते समय यह बताया जाता है कि सुबह या शाम को तेज-आंधी तूफान आ सकता है। लेकिन समय की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती कि ये किस वक्त आएगा। हालांकि, जिस समय तूफान आता है और जो अनुमान लगाया जाता है, उसमें 3 से 4 घंटे का गैप होता है।

मौसम विभाग ने कहा- अनुमान और वास्तविकता में लगभग 3 से 4 घंटे तक का गैप होता है

16 मई को तड़के 2 बजकर 53 मिनट पर सफदरजंग में 98 किमी की रफ्तार से आंधी चली

2014 में 11 बार आई थी आंधी, क्योंकि तब भी 7 पश्चिमी विक्षोभ उ. भारत पहुंचे थे

इसलिए ज्यादा तूफान... 50 से 100 किमी क्षेत्र में छाए नमी वाले बादल

मौसम विभाग के वैज्ञानिक कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि इस साल 50 से 100 किलोमीटर के दायरे में क्लाउड सेल बने हैं। इन क्लाउड सेल का अर्थ है कि 50 किलोमीटर से ज्यादा के दायरे में आसमान में बादल छाते हैं तो ये आंधी-तूफान लाते हैं। इनका प्रभाव 100 किमी तक के दायरे में 4 से 5 घंटे तक भी रह सकता है। 8 मई, 9 मई और 13 मई के दिन इसी तरह का क्लाउड सेल बना था। इस साल मैदानी इलाकों में बेहद ज्यादा गर्मी पड़ी और इससे हीटिंग भी वातावरण में फैली। यह हीटिंग आसमान में पहुंचकर नमी वाले बादलों के साथ मिल गई और इससे तूफान बन गया।

दिल्ली सिविक सेंटर के पास 16 मई को आंधी के बाद क्षतिग्रस्त पेड़ और कारें।

इसलिए पता नहीं चलता... ज्यादा गर्मी से आधे घंटे में बनता है सिस्टम

वैज्ञानिक कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि मैदानी इलाकों में कई बार लोकल वेदर सिस्टम से मौसम का सिस्टम बन जाता है। इस सिस्टम को चक्रवाती हवाओं का सिस्टम भी कहते हैं। कभी भी ज्यादा गर्मी के कारण महज आधे घंटे के अंदर ही यह सिस्टम बन जाते हैं। यह आधे घंटे में तब बनता है जब सिंगल क्लाउड सेल बनता है। सिंगल क्लाउड सेल से 2 से 5 किलोमीटर के दायरे में ही बादल बनते हैं जिनमें नमी मौजूद होती है। इनकी रेंज 10 से 20 किलोमीटर तक ही होती है और यह सिर्फ 1 से डेढ़ घंटे तक ही एक्टिव रहता है।

इस बार ये हुआ... इस साल 3-4 पश्चिमी विक्षोभ ने बदला मौसम

मौसम विभाग के वैज्ञानिक कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि इस साल मैदानी इलाकों में असर डालने वाले पश्चिमी विक्षोभ के सिस्टम ज्यादा बने हैं। मौसम में ऐसा परिवर्तन 10 सालों में भी होता है और 4 से 6 सालों में भी। लेकिन इस साल 3 से 4 पश्चिमी विक्षोभ के सिस्टम ने दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य राज्यों के मैदानी इलाकों में मौसम पर असर डाला है। इससे 6 अप्रैल से 16 मई के बीच 6 बार तेज-आंधी तूफान दिल्ली पहुंचा है। इससे पहले साल 2014 में भी अप्रैल-मई में 6 से 7 पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में पहुंचे थे। तब 10 से 11 बार आंधी ने दिल्ली-एनसीआर में दस्तक दी थी।

इस साल 6 बार चल चुकी हैं तेज हवाएं

6 अप्रैल... दिन में 98 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं

02 मई... के दिन 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं

8 मई... रात को 12.45 बजे 81 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं

9 मई... शाम को 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं

13 मई... के दिन सफदरजंग में 109 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं

16 मई... तड़के 3 बजकर 2 मिनट पर सफदरजंग में 98 किमी और पालम में 2 बजकर 53 मिनट तक 105 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं

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