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यूएन रिपोर्ट भ्रामक, हमारी संप्रभुता का उल्लंघन: भारत

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को भारत ने भ्रामक और पक्षपातपूर्ण बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह रिपोर्ट...

Danik Bhaskar | Jun 15, 2018, 02:05 AM IST
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को भारत ने भ्रामक और पक्षपातपूर्ण बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह रिपोर्ट पूर्वाग्रह से प्रेरित है और गलत तस्वीर पेश करने का प्रयास है। यह भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है। विदेश मंत्रालय ने रिपोर्ट की मंशा पर सवाल उठाए हैं। मंत्रालय ने कहा कि काफी हद तक अपुष्ट सूचनाएं चुनिंदा तरीके से जुटाकर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। भारत ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र ने जिन समूहों को बैन किया है, उन्हें रिपोर्ट में हथियारबंद समूह कहा गया है और आतंकियों को लीडर्स।’ बता दें कि इस रिपोर्ट का शीर्षक “कश्मीर में मानवाधिकारों के हालात पर रिपोर्ट: भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर में जून 2016 से अप्रैल 2018 तक की घटनाएं, और आजाद जम्मू-कश्मीर और गिलगित-बाल्टीस्तान में मानवाधिकारों से जुड़ी सामान्य चिंताएं’ हैं।


रिपोर्ट में भारत को अफ्स्पा हटाने की दी सलाह

रिपोर्ट में पाकिस्तान से अपने आतंक-निरोधक कानून का दुरुपयोग खत्म करने को कहा गया है। दावा है कि अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीकों से प्रदर्शन करने वालों को इस कानून के तहत प्रताड़ित किया जाता है। वहीं, भारत को भी आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर्स एक्ट (अफ्स्पा) तत्काल हटाने की सलाह दी गई है। मानवाधिकार उल्लंघन में लिप्त सैन्य कर्मियों के खिलाफ अदालतों में मुकदमे के लिए जरूरी अनुमतियां भी तत्काल प्रभाव से हटाने की जरूरत बताई गई है।

पाक सेना आतंकियों का करती है समर्थन

रिपोर्ट में कहा गया है कि 1980 के दशक के अंत से जम्मू-कश्मीर में विभिन्न हथियारबंद समूह सक्रिय हैं। इन समूहों के खिलाफ सबूत हैं कि यह मानवाधिकार उल्लंघन के साथ-साथ बड़े पैमाने पर अपहरण, हत्या और यौन हिंसा में लिप्त हैं। पाकिस्तान इन समूहों को समर्थन नहीं देने की बात कहता रहता है। वहीं पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा के पार भारत के हिस्से वाले कश्मीर में ऑपरेशन्स को समर्थन देती है। आतंकी बुरहान के मारे जाने के बाद विरोध प्रदर्शनों का जिक्र भी रिपोर्ट में है।