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खराब अनाज, मक्का और शकरकंद से बने एथनॉल को पेट्रोल में मिला सकेंगे

कैबिनेट ने बुधवार को नेशनल बायोफ्यूल पॉलिसी को मंजूरी दे दी। इसके मुताबिक खराब हो चुके गेहूं-चावल, सड़े आलू, मक्का...

Dainik Bhaskar

May 17, 2018, 02:10 AM IST
कैबिनेट ने बुधवार को नेशनल बायोफ्यूल पॉलिसी को मंजूरी दे दी। इसके मुताबिक खराब हो चुके गेहूं-चावल, सड़े आलू, मक्का और शकरकंद से बने एथनॉल को पेट्रोल में मिलाने की अनुमति होगी। इससे ईंधन के आयात के बिल में हर साल 4,000 करोड़ रु. तक कमी आएगी। अभी गन्ने से बने एथनॉल को ही पेट्रोल में मिलाने की अनुमति है। बायोफ्यूल को-ऑर्डिनेशन कमेटी की मंजूरी से सरप्लस खाद्यान्न के इस्तेमाल की भी अनुमति दी गई है।

बायोफ्यूल की तीन श्रेणी बनाई गई हैं। शीरे से बने एथनॉल और गैर-खाद्य तिलहन से बने बायो-डीजल को पहली पीढ़ी (1जी) में रखा गया है। नगरीय निकायों से निकलने वाले ठोस कचरे से बना एथनॉल दूसरी पीढ़ी (2जी) का होगा। बायो-सीएनजी तीसरी पीढ़ी (3जी) का बायोफ्यूल होगा। सरकार यूज्ड कुकिंग ऑयल और कम अवधि की फसलों से बायो-डीजल के लिए सप्लाई चेन मैकेनिज्म बनाने को बढ़ावा देगी।

5,000 करोड़ का वायबिलिटी गैप फंड: छह साल के लिए 5,000 करोड़ रु. का वायबिलिटी गैप फंड बनेगा। इससे कंपनियों के नुकसान की भरपाई होगी। कंपनियां 1जी के मुकाबले 2जी एथनॉल की कीमत ज्यादा रख सकेंगी। टैक्स इन्सेंटिव भी मिलेगा।


एथनॉल से आयात बिल में सालाना 4,000 करोड़ रु. की बचत

एक करोड़ लीटर बायो-एथनॉल पेट्रोल में मिलाने से तेल आयात बिल में 28 करोड़ रुपए विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इस वर्ष 150 करोड़ लीटर एथनॉल की सप्लाई होने की संभावना है। इसके मुताबिक आयात बिल में 4,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत होगी। इसके अलावा नगरीय निकायों में हर साल 6.2 करोड़ ठोस कचरा निकलता है। इससे ईंधन बनाने की टेक्नोलॉजी मौजूद है। एक टन कचरा ईंधन में 20% की बचत करवा सकता है। तेल कंपनियां 10 हजार करोड़ के निवेश से 12 बायो रिफाइनरी लगा रही हैं।

कैबिनेट के तीन अन्य महत्वपूर्ण फैसले

दाल निर्यात को मंजूरी, कुछ किस्मों के आयात पर ड्यूटी बढ़ाई

चने के निर्यात पर मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) के तहत 7% इन्सेंटिव को मंजूरी दी गई है। चने पर 60%, पीले मटर पर 50% आयात इम्पोर्ट ड्यूटी लगाई गई है। मसूर पर इसे 10% से बढ़ाकर 30% किया गया है। वर्ष 2016-17 में 66 लाख टन दालों का आयात हुआ था, जो 2017-18 में यह 56.5 लाख टन रह गया था।

लघु सिंचाई बढ़ाने के लिए 5,000 करोड़ रुपए का फंड बनेगा

लघु सिंचाई में ज्यादा जमीन लाने के लिए नाबार्ड के अधीन 5,000 करोड़ का फंड बनेगा। इसमें 2,000 करोड़ इस साल के लिए और 3,000 करोड़ 2019-20 के लिए हैं। नाबार्ड कम ब्याज पर राज्यों को पैसे उपलब्ध कराएगा। योजना के तहत 3 फीसदी ब्याज पर कर्ज दिया जाएगा। अभी लघु सिंचाई के दायरे में सिर्फ एक करोड़ एकड़ भूमि है, जबकि क्षमता 7 करोड़ एकड़ की है।

आपसी विवाद में कोर्ट नहीं जा सकेंगी सरकारी कंपनियां

सरकारी विभागों और कंपनियों के बीच विवाद सुलझाने की नई व्यवस्था बनाई गई है। कंपनियां या विभाग एक दूसरे के खिलाफ कोर्ट नहीं जा सकेंगे। विवाद निपटाने के लिए दो स्तर की व्यवस्था होगी। पहले संबंधित मंत्रालयों के सचिवों की समिति इन पर गौर करेगी। वहां कोई निर्णय नहीं हुआ तो कैबिनेट सचिव का निर्देश आखिरी होगा।

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