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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-इस तरह की भयावह घटनाएं कब बंद होंगी?

बिहार के बाद उत्तर प्रदेश के शेल्टर होम में लड़कियों के साथ दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न की घटनाओं से सुप्रीम कोर्ट...

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2018, 02:11 AM IST
बिहार के बाद उत्तर प्रदेश के शेल्टर होम में लड़कियों के साथ दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न की घटनाओं से सुप्रीम कोर्ट चिंतित है। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि ऐसी भयावह घटनाएं कब बंद होंगी? आश्रयगृहों में बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामले की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल किया। कोर्ट ने जानकारी छुपाने को लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार सरकार को फटकार भी लगाई। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि इस पर कैसे रोक लगाई जाए? केंद्र सरकार ने कहा कि शेल्टर होम को लेकर यूपी और बिहार ने अभी तक सारे रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाए हैं।

जस्टिस मदन बी लोकुर, एस अब्दुल नजीर और दीपक गुप्ता की बेंच ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक शेल्टर होम से 26 महिलाओं के लापता होने के मामले का जिक्र करते हुए कहा, “हमे बताइए कि यह हो क्या रहा है?’ जस्टिस लोकुर ने कहा, “कल मैंने पढ़ा कि प्रतापगढ़ में इतनी सारी महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ। यह सब कब खत्म होगा? यह कब बंद होने जा रहा है?’ कोर्ट ने मामले में केंद्र की ओर से वकील के मौजूद न रहने पर भी सवाल किया और कहा कि केंद्र सरकार के वकीलों की मौजूदगी के बगैर हम कुछ नहीं कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट फटकार के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से वकील पेश हुए। सुप्रीम कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा कि हम समझ सकते हैं कि दोनों राज्य क्यों जानकारी छुपा रहे हैं, क्योंकि जिन राज्यों में इस प्रकार की घटना हो रही है वे डेटा कैसे दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से देश भर के सारे शेल्टर होम की जानकारी मांगी। सुप्रीम कोर्ट 21 अगस्त को मामले में अगली सुनवाई करेगा। हाल ही में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़, देवरिया और उससे पहले बिहार के मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में महिलाओं और लड़कियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

‘यौन हमलों की मीडिया रिपोर्टिंग से जुड़े नियम जांचेंगे’

नई दिल्ली
| सुप्रीम कोर्ट यौन हमलों की घटनाओं की मीडिया रिपोर्टिंग के लिए नियंत्रण और संतुलन से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जांच करेगा। इन प्रावधानों का नियमित रूप से उल्लंघन होने की जानकारी मिलने के बाद शुक्रवार को कोर्ट ने यह बात कही। कोर्ट को बताया गया कि आजकल मामला अदालत में लंबित रहने के दौरान भी समानांतर मीडिया ट्रायल चलते रहते हैं। कठुआ सामूहिक दुष्कर्म हत्याकांड में भी ऐसा ही हुआ था। एमिकस क्यूरी इंदिरा जय सिंह ने जस्टिस मदन बी लाेकुर की बेंच के समक्ष कहा कि यौन हमले की पीड़िता की पहचान उजागर करना उसकी निजता में दखल है। इसकी इजाजत नहीं देनी चाहिए। उनकी दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि इस मामले में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया जाएगा। अगली सुनवाई 5 सितंबर को होगी।

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