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फिच रेटिंग्स ने ग्रोथ का अनुमान 7.3% से बढ़ाकर 7.4% किया

फिच रेटिंग्स ने 2018-19 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 7.3% से बढ़ाकर 7.4% कर दिया है। लेकिन महंगे कर्ज और तेल की बढ़ती...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 14, 2018, 03:05 AM IST

फिच रेटिंग्स ने 2018-19 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 7.3% से बढ़ाकर 7.4% कर दिया है। लेकिन महंगे कर्ज और तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जताई है। फिच ने ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक में 2019-20 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.5% की दर से बढ़ने का अनुमान जताया है। बीते वित्त वर्ष 2017-18 में देश की अर्थव्यवस्था 6.7% और मार्च तिमाही में में 7.7% रही थी। फिच ने कहा कि भारतीय रुपया इस साल एशिया की सबसे ज्यादा खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी में से एक रहा है। रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘2013 की तुलना में भारत के मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल बेहतर हैं। घरेलू सरकारी बॉन्ड मार्केट में विदेशी स्वामित्व की दर काफी कम है। लेकिन तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, घरेलू मांग बढ़ने और मेन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट के कमजोर प्रदर्शन से चालू खाते का घाटा बढ़ता जा रहा है।’ पिछले महीने अमेरिकी एजेंसी मूडीज ने 2018-19 के लिए भारत के ग्रोथ अनुमान को 7.5% से घटाकर 7.3% कर दिया था। इसके लिए मूडीज कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला दिया था।

वैश्विक ग्रोथ की अच्छी संभावनाएं

फिच के मुताबिक दुनिया में व्यापारिक तनाव और राजनीतिक जोखिम बढ़ने के बावजूद निकट भविष्य में वैश्विक ग्रोथ की संभावनाएं अच्छी बनी हुई हैं। रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘इस साल दुनिया में व्यापारिक तनाव में खासी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन इस स्थिति में भी लगाए गए आयात शुल्क ज्यादा नहीं हैं। इसका वैश्विक ग्रोथ के आउटलुक पर मामूली प्रभाव पड़ने का अनुमान है।’

एसबीआई और बॉब की रेटिंग घटाई

फिच ने एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा की वायबिलिटी रेटिंग ‘बीबी+’ से एक ग्रेड घटाकर ‘बीबी’ कर दी है। एजेंसी ने यह कदम इन बैंकों की कमजोर एसेट क्वालिटी के मद्देनजर उठाया है। एजेंसी ने भारतीय बैंकों पर निगेटिव आउटलुक दे रखा है। एजेंसी ने कहा कि 2017-18 में देश के 21 में 19 सरकारी बैंकों को घाटा हुआ है। इससे वर्ष में केंद्र सरकार द्वारा इन बैंकों में डाली गई 88,139 करोड़ रुपए की पूंजी लगभग साफ हो गई है।

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