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1 महीने की बस की रैकी, रखी नजर, पकड़वा दिया मोबाइल चोर

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:05 AM IST

News - जो काम पुलिस को करना था, वह डीयू में पढ़ने वाले दो भाइयों ने कर दिखाया नीरज आर्या|नई दिल्ली neeraj.arya@dbcorp.in मोबाइल चोरी...

1 महीने की बस की रैकी, रखी नजर, पकड़वा दिया मोबाइल चोर
जो काम पुलिस को करना था, वह डीयू में पढ़ने वाले दो भाइयों ने कर दिखाया

नीरज आर्या|नई दिल्ली neeraj.arya@dbcorp.in

मोबाइल चोरी की शिकायत पर जो काम पुलिस को करना था, वह डीयू में पढ़ने वाले दो भाइयों ने कर दिखाया। बदमाश को पकड़ने के लिए एक माह तक रेकी की और पहचान होते ही प्लानिंग कर पकड़वा दिया। इसमें उनके पिता का विशेष योगदान रहा। बदमाश को कैसे और कब पकड़ना है, इसके सूत्रधार वही थे। हालांकि बदमाश से उनको मोबाइल नहीं मिला। 29 वर्षीय आरोपी विनोद बदरपुर थाने का घोषित अपराधी है, जिस पर 44 आपराधिक केस हैं।

16 जनवरी को 764 रूट नंबर की बस में चोरी हुआ था मोबाइल, पुलिस नहीं पकड़ पाई तो भाइयों ने शुरू कर दी तलाश

जेबतराशी की वारदात से लेकर पकड़े जाने की पूरी कहानी...

दोनों भाई चिराग दिल्ली में रहते हैं। 20 वर्षीय रक्षांत अंबेडकर विश्वविद्यालय में बीए इंग्लिश आनर्स सेकंड ईयर का छात्र है, वहीं 18 वर्षीय विधान रामानुजन कॉलेज कालकाजी में बीकॉम प्रथम वर्ष का छात्र है। 16 जनवरी को बस में कॉलेज जाते समय विधान का मोबाइल चोरी हो गया। इसकी शिकायत हौजखास थाने में दर्ज कराई। दो महीने में भी आरोपी और मोबाइल का पता नहीं चला तो दोनों भाइयों ने घर में किसी को बताए बगैर आरोपी की तलाश शुरू कर दी। उन्होंने एक महीने तक बसों में रेकी की। उस बस स्टैंड पर नजर रखी, जहां से बस में चढ़ने के बाद विधान का मोबाइल चोरी हो गया था। बुधवार सुबह स्वामी नगर बस स्टैंड पर दोनों भाई खड़े थे। करीब साढ़े नौ बजे एक बस से पांच छह लड़के उतरे। जामुनी रंग की शर्ट और जींस पैंट पहने एक युवक को देख विधान ने पहचान लिया कि उस दिन यही उसके पीछे खड़ा था और इसी ने उसका मोबाइल निकाला था। दोनों भाइयों ने इसकी जानकारी पिता रमेश सहरावत को दी। वह पीसीआर में तैनात हैं। उन्होंने छोटे बेटे को वहीं रहने की हिदायत दी और बड़े बेटे को बदमाशों के पीछे बस में चढ़ने के लिए कहा। आगे एक प्वाइंट पर वह खुद पीसीआर के साथ पहुंच गए। बदमाश साथियों के साथ रूट नंबर 764 की बस में चढ़ गया। रक्षांत को इस बदमाश के ठीक पीछे खड़े रहने की हिदायत दी गई थी। विधान पिता को बस का रूट नंबर पहले ही बता चुका था। मस्जिद मोड के पास इस बस को रमेश ने रुकवा बदमाश को खींचकर नीचे उतार दिया। तलाशी में इसके पास से एक बटनदार चाकू मिला। 100 नंबर पर फोन कर उसे हौजखास पुलिस को सौंप दिया गया। उसे आर्म्स एक्ट में तिहाड़ भेज दिया गया।

पूरी टीम के साथ चलता था बदमाश

गौतमपुरी बदरपुर में रहने वाला बदमाश पूरी टीम के साथ चलता था। आरोपी ने पुलिस को बताया कि कोई उस पर शक ना करे, इसलिए वह बढ़िया कपड़े पहनकर चलता था। चश्मा लगाता था। साथ में बैग होता था, ताकि वर्किंग लोगाें की तरह नजर आए। बस में चार से पांच युवक एक साथ चढ़ते थे। पीछे किसी का मोबाइल चुराते ही उसे आगे पास कर दिया जाता था। एक हाथ से दूसरे हाथों में होते हुए सबसे आगे वाला फोन लेकर नीचे उतर जाता था। बस के पीछे एक सदस्य ऑटो में चलता था, जो मोबाइल चुराने वाले को बैठाकर मौके से फरार हो जाता था। चोरी के मोबाइल गोविंदपुरी इलाके में ही बेच देते थे।

अच्छे नंबर का इनाम था मोबाइल : विधान ने बताया 12वीं में 86 प्रतिशत अंक आने पर परिवार ने उसे मोबाइल गिफ्ट किया था। यह उसका पहला निजी फोन था। बदमाश को पकड़ने के लिए का वह पहले भी प्रयास चुके थे, लेकिन पुख्ता प्लानिंग न होने से हाथ से निकल गया था।

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