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सौ शहरों में लांच होना है क्लीन एयर कैंपेन; विशेषज्ञों ने कहा-थर्मल पावर प्लांट और इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन रोकने के लिए भी कदम उठाएं

केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की ओर से देशभर के 100 शहरों में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) को शुरू किया...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:05 AM IST

केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की ओर से देशभर के 100 शहरों में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) को शुरू किया जाना है। इस प्रोग्राम का ड्राफ्ट मंत्रालय ने तैयार करने से पहले कई संगठनों व नागरिकों से सुझाव मांगे थे। मंत्रालय ने 17 अप्रैल से 17 मई 2018 तक क्लीन एयर प्रोग्राम के लिए अपनी वेबसाइट पर लोगों से सुझाव और प्रतिक्रियाएं मांगी थीं। सभी सुझाव क्लीन एयर कलेक्टिव नेटवर्क से जुड़े हैं। केंद्र सरकार को दिए गए इन सुझावों में विशेषज्ञों ने कहा है कि थर्मल पावर प्लांट और इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन रोकने के लिए प्रोग्राम के ड्राफ्ट में पॉइंट्स शामिल किए जाएं। ग्रीनपीस इंडिया के सीनियर कैंपेनर सुनील दहिया ने बताया कि अगर प्रदूषण को कम करने के लक्ष्य और विभिन्न प्रदूषकों से निपटने की योजना को इसमें शामिल नहीं किया जाता है तो फिर इस कार्यक्रम को लागू करने के लिए तैयारियां बेकार साबित होंगी। थर्मल पावर प्लांटों और औद्योगिक इकाइयों से फैलने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस प्लान तैयार किया जाए। इन जगहों में जो प्रदूषण के मानक हैं उसी के अनुसार निगरानी की जाए।

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मंत्रालय ने 17 अप्रैल से 17 मई 2018 तक क्लीन एयर प्रोग्राम के लिए अपनी वेबसाइट पर लोगों से सुझाव और प्रतिक्रियाएं मांगी थीं

ये पॉइंट्स शामिल करने को कहा...तीन साल में उत्सर्जन 35 फीसदी कम करने का लक्ष्य रखें

उत्सर्जन लक्ष्य|पर्यावरणमंत्रालय को उत्सर्जन को तीन साल में 35 प्रतिशत और पांच सालों में 50 प्रतिशत कम करने के लक्ष्य को एनसीएपी में शामिल करना चाहिए।

विभिन्न प्रदूषकों को लेकर लक्ष्य निर्धारण|एनसीएपीके ड्राफ्ट में उद्योग और थर्मल पावर प्लांट से होने वाले प्रदूषण को नजरअंदाज कर दिया गया है। इसे स्पष्ट समय सीमा और लक्ष्यों के साथ नियंत्रित किया जाना चाहिए।

धन|एनसीएपी में पराली जलाने के मुद्दे को लेकर व्यापक रुख अपनाने की जरूरत है। वर्तमान में यह योजना अलग-थलग रूप से शामिल किया गया है। पराली के प्रबंधन और खेतों से बाहर उसके इस्तेमाल को लेकर योजना को एनसीएपी में शामिल करना होगा।

गैर मोटरयुक्त परिवहनसड़कों का चौड़ीकरण और फ्लाईओवर जैसे संरचना के विकास जैसे सुझाव जिसे राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 2015 और 2016 में भेजा गया, इससे उत्सर्जन में बढ़ावा ही मिलेगा क्योंकि ऐसे विकास आधारित योजनाएं निजी वाहनों को प्रोत्साहित करेंगे।

अयोग्य शहरों के चयन प्रक्रिया|एनसीएपी में कई ऐसे शहरों को शामिल नहीं किया गया है जो वायु प्रदूषण के लिहाज से काफी खतरनाक स्तर पर पहुंच गए हैं। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, पटना, गया और मुजफ्फरपुर जैसे शहर गायब हैं।

100 अयोग्य शहरों से आगे |एनसीएपी को सिर्फ 100 शहरों तक सीमित नहीं किया जा सकता है। बल्कि इसमें दूसरे प्रदूषित भौगोलिक क्षेत्रों को भी शामिल करें।

कानूनी अधिनियम के अंतर्गत|एनसीएपीको कानूनी अधिनियम जैसे वायु एक्ट 1981 के भीतर लाना चाहिए ताकि इसके लागू न होने पर लोग कोर्ट जा सकें।

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