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नहर किनारे बैठ मुरथल के परांठे खा रहे थे, एक का पैर फिसला, दूसरा बचाने कूदा

गर्मी से बचने के लिए बवाना नहर के किनारे पानी में पैर डुबोकर बैठना गुरुवार को दो छात्रों को भारी पड़ गया। एक छात्र...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 03:05 AM IST
नहर किनारे बैठ मुरथल के परांठे खा रहे थे, एक का पैर फिसला, दूसरा बचाने कूदा
गर्मी से बचने के लिए बवाना नहर के किनारे पानी में पैर डुबोकर बैठना गुरुवार को दो छात्रों को भारी पड़ गया। एक छात्र पैर फिसलने से नहर में गिर गया। दूसरा छात्र उसे बचाने नहर में कूदा, लेकिन पानी के तेज बहाव में वह भी बह गया। गुरुवार देर शाम तक दोनों छात्रों का कुछ पता नहीं चल पाया है। अब शुक्रवार सुबह सात बजे फिर से दोनों को तलाशा जाएगा। समयपुर बादली थाना पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है।

राजदीप (22), शिखर (22) और राजेश रोहिणी स्थित दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। राजदीप लक्ष्मी नगर, दिल्ली और बाकी दोनों गाजियाबाद के रहने वाले हैं। तीनों ने फाइनल ईयर के पेपर दिए थे। बुधवार को उन्होंने लास्ट पेपर दिया था। इसके बाद तीनों ने बुधवार को ही मुरथल के परांठे खाने का प्लान बनाया था। उन्होंने मुरथल से परांठे खाए और ले जाने के लिए पैक भी करवाए थे। गुरुवार सुबह करीब 4.30 बजे जब वे वापिस आ रहे थे तो गर्मी की वजह से बवाना स्थित खेड़ा के पास स्थित नहर पर नहाने और वहां परांठे खाने के लिए रुक गए।

दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे दोनों स्टूडेंट्स

छात्र शिखर।

पानी में पैर डुबाकर बैठे थे तीनों छात्र

नहर पर रुकने के दौरान वहां वे पानी में पैर डुबाकर बैठे थे। तभी अचानक शिखर का पैर फिसल गया और पानी में गिर गया। इसे बचाने के लिए राजदीप पानी में उतरा तो तेज बहाव के कारण वह भी पानी में बह गया। तीसरे साथी राजेश ने इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही दमकल, पुलिस और गोताखोरों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। गुरुवार सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक दोनों छात्रों के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया।

तीसरे छात्र की भूमिका की भी जांच

पुलिस शुरुआती जांच में घटना को एक हादसा मान कर चल रही है। वहीं पुलिस घटना के चश्मदीद गवाह का दावा करने वाले तीसरे छात्र राजेश की भूमिका को लेकर कई अन्य पहलूओं से भी जांच कर रही है कि कहीं यह कोई साजिश तो नहीं। पुलिस का कहना है कि जब तक दोनों का कुछ पता नहीं चल जाता, तब तक नहीं कहा जा सकता कि जीवित हैं या उनकी मौत हो चुकी है।

बवाना नहर में लापता छात्रों की खोज करती दिल्ली पुलिस की टीम।

दोस्तों को नहीं बचाने का रहेगा गम

राजेश ने बताया कि तीनों नहर पर काफी देर तक बैठे थे। तीनों एक-दूसरे से किसी बात को लेकर मजाक कर रहे थे। जब राजदीप और शिखर नहर में डूबे, वह दोनों को बचा नहीं पाया। उसके दोनों दोस्त बचाने के लिए काफी देर तक चिल्ला-चिल्ला कर सहायता मांगी थी। वह सड़क पर आने-जाने वाले वाहनों में सवार लोगों से हाथ जोड़कर मदद मांगता रहा, लेकिन किसी ने सहायता नहीं की। मैं उनको डूबते हुए देखता रहा, इस बात का अफसोस जिंदगीभर रहेगा।

मल्टीनेशनल कंपनी में काम करना था सपना

शिखर के पिता कन्हैया ने बताया कि शिखर शुरू से ही पढ़ाई में बहुत अच्छा था। उसका सपना किसी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करना व परिवार की आर्थिक स्थित को मजबूत बनाना था।

मां से कहा था- शाम तक घर आ जाऊंगा

शिखर ने बुधवार शाम को ही मां को फोन पर कहा था कि उसका लास्ट पेपर हो चुका है और गुरुवार शाम तक वह घर आ जाएगा। पिता कन्हैया ने बताया कि हमको यह पता नहीं था कि वह दोस्तों के साथ घूमने जाएगा। शिखर हमको इस बारे में बता देता तो हम उसे नहीं जाने देते।

पिछले दो महीने में करीब एक दर्जन की डूबने से माैत

पुलिस के मुताबिक बवाना नहर में पिछले दो महीने में करीब एक दर्जन लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है।




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