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दस्तावेजों का सरकारी लॉकर पिछड़ रहा है, यूजर सिर्फ 3%

अमित कुमार निरंजन | नई दिल्ली डिजिटल इंडिया स्कीम के तहत शुरू किए गए बहुप्रचारित डिजी लॉकर की स्थिति बेहद खराब...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 10, 2018, 03:05 AM IST

अमित कुमार निरंजन | नई दिल्ली

डिजिटल इंडिया स्कीम के तहत शुरू किए गए बहुप्रचारित डिजी लॉकर की स्थिति बेहद खराब है। न तो इसमें नए इश्यूअर तेजी से जुड़ रहे हैं और न ही इसका कोई अपडेट या नए नोटिफिकेशन यूजर्स को मिल पा रहे हैं। जबकि इसकी शुरुआत जिस ताकत से की गई थी तो लगा था कि यह काफी सफल रहेगा। हाल ही में सीबीएसई ने डिजी लॉकर के माध्यम से अंक पत्र जारी किए हैं। यही नहीं डिजी लॉकर से आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस सहित करीब 125 प्रकार के सरकारी दस्तावेज से लिए और सुरक्षित रखे जा सकते हैं।

भास्कर ने इसकी सेवाओं की स्थिति की पड़ताल की तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। डिजी लॉकर से अभी तक केवल 51 इश्यूअर जुड़े हैं, जो यूजर की मांग पर उनके दस्तावेज डिजिटली उपलब्ध करवाते हैं। यहां तक कि सरकार और सरकारी विभागों में भी इसे लेकर उत्साह नहीं है। अब तक सिर्फ 10 केन्द्रीय विभाग और 20 राज्य ही इस लॉकर से जुड़े हैं। वर्तमान में देश में करीब 40 करोड़ स्मार्ट फोन यूजर हैं। जबकि डिजी लॉकर का इस्तेमाल केवल 1.23 करोड़ लोग ही कर रहे हैं। यानी स्मार्ट फोन रखने वाले सिर्फ 3 फीसदी लोग ही डिजिटल लॉकर प्रयोग कर रहे हैं। जबकि आधार की संख्या (करीब 120 करोड़) के हिसाब से इसे देखें तो इसका इस्तेमाल केवल एक फीसदी लोग ही कर रहे हैं। बिना आधार के डिजी लॉकर से दस्तावेज नहीं ले सकते। दूसरी तरफ सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि डिजी लॉकर ने अब तक डिजिटल लॉकर अथॉरिटी से इसे चलाने का लाइसेंस भी नहीं लिया है। गौरतलब है कि डिजिटल लॉकर अथॉरिटी (डीएलए) के अंतर्गत ही डिजी लॉकर आता है। शेष | पेज 8 पर

इन 2 कारणों से लॉकर अभी तक फ्लॉप रहा

सिर्फ10 केन्द्रीय संस्था ही जारी करती हैं डाॅक्यूमेंट

करीब दो हजार से ज्यादा पब्लिक अथॉरिटी केन्द्रीय सरकार से संबंधित हैं लेकिन इनमें सिर्फ दस संस्थाएं ही ऐसे हैं जो डिजिटल लॉकर के माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध करवाते हैं। जिनमें सीबीएसई, पेट्रोलियम मंत्रालय और वित्त मंत्रालय आगे आए हैं। लेकिन अन्य मंत्रालय और विभागों ने इस सेवा का फायदा उठाने की कोशिश ही नहीं की है। वहीं राज्य सरकारें भी डिजिटल लाॅकर को लेकर बेहद उदासीन ही रही हैं। 16 प्रदेश अभी भी ऐसे हैं जो डिजिटल लॉकर का लाभ नहीं ले रहे हैं। जिनमें दक्षिण क्षेत्र के प्रदेश और पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रदेश मुख्य रूप से शामिल हैं।

और डिजिटल डॉक्यूमेंट स्वीकार कहीं भी नहीं

राज्य सरकारें दस्तावेज अपने विभागों की वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध करवा रही हैं। डिजी लाॅकर की खास बात यह थी कि इसके दस्तावेज को ई साइन करने के बाद आप किसी भी सरकारी विभाग में इस्तेमाल कर सकते थे, इसके लिए फोटो कॉपी करवाने की जरूरत नहीं होती थी। लेकिन स्कूल, कॉलेजों या भर्ती प्रक्रिया में फॉर्म भरने से लेकर, पासपोर्ट बनवाने, बैंक खाता खुलवाने के लिए आपको अलग से अपने दस्तावेजों की फाेटोकाॅपी करवाने की जरूरत पड़ती ही है। अभी डिजी लॉकर से सीधे दस्तावेज लगभग कोई नहीं ले रहा है।

अमित कुमार निरंजन | नई दिल्ली

डिजिटल इंडिया स्कीम के तहत शुरू किए गए बहुप्रचारित डिजी लॉकर की स्थिति बेहद खराब है। न तो इसमें नए इश्यूअर तेजी से जुड़ रहे हैं और न ही इसका कोई अपडेट या नए नोटिफिकेशन यूजर्स को मिल पा रहे हैं। जबकि इसकी शुरुआत जिस ताकत से की गई थी तो लगा था कि यह काफी सफल रहेगा। हाल ही में सीबीएसई ने डिजी लॉकर के माध्यम से अंक पत्र जारी किए हैं। यही नहीं डिजी लॉकर से आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस सहित करीब 125 प्रकार के सरकारी दस्तावेज से लिए और सुरक्षित रखे जा सकते हैं।

भास्कर ने इसकी सेवाओं की स्थिति की पड़ताल की तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। डिजी लॉकर से अभी तक केवल 51 इश्यूअर जुड़े हैं, जो यूजर की मांग पर उनके दस्तावेज डिजिटली उपलब्ध करवाते हैं। यहां तक कि सरकार और सरकारी विभागों में भी इसे लेकर उत्साह नहीं है। अब तक सिर्फ 10 केन्द्रीय विभाग और 20 राज्य ही इस लॉकर से जुड़े हैं। वर्तमान में देश में करीब 40 करोड़ स्मार्ट फोन यूजर हैं। जबकि डिजी लॉकर का इस्तेमाल केवल 1.23 करोड़ लोग ही कर रहे हैं। यानी स्मार्ट फोन रखने वाले सिर्फ 3 फीसदी लोग ही डिजिटल लॉकर प्रयोग कर रहे हैं। जबकि आधार की संख्या (करीब 120 करोड़) के हिसाब से इसे देखें तो इसका इस्तेमाल केवल एक फीसदी लोग ही कर रहे हैं। बिना आधार के डिजी लॉकर से दस्तावेज नहीं ले सकते। दूसरी तरफ सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि डिजी लॉकर ने अब तक डिजिटल लॉकर अथॉरिटी से इसे चलाने का लाइसेंस भी नहीं लिया है। गौरतलब है कि डिजिटल लॉकर अथॉरिटी (डीएलए) के अंतर्गत ही डिजी लॉकर आता है। शेष | पेज 8 पर

खुद लॉकर ने अथॉरिटी से नहीं लिया है लाइसेंस

अमित कुमार निरंजन | नई दिल्ली

डिजिटल इंडिया स्कीम के तहत शुरू किए गए बहुप्रचारित डिजी लॉकर की स्थिति बेहद खराब है। न तो इसमें नए इश्यूअर तेजी से जुड़ रहे हैं और न ही इसका कोई अपडेट या नए नोटिफिकेशन यूजर्स को मिल पा रहे हैं। जबकि इसकी शुरुआत जिस ताकत से की गई थी तो लगा था कि यह काफी सफल रहेगा। हाल ही में सीबीएसई ने डिजी लॉकर के माध्यम से अंक पत्र जारी किए हैं। यही नहीं डिजी लॉकर से आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस सहित करीब 125 प्रकार के सरकारी दस्तावेज से लिए और सुरक्षित रखे जा सकते हैं।

भास्कर ने इसकी सेवाओं की स्थिति की पड़ताल की तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। डिजी लॉकर से अभी तक केवल 51 इश्यूअर जुड़े हैं, जो यूजर की मांग पर उनके दस्तावेज डिजिटली उपलब्ध करवाते हैं। यहां तक कि सरकार और सरकारी विभागों में भी इसे लेकर उत्साह नहीं है। अब तक सिर्फ 10 केन्द्रीय विभाग और 20 राज्य ही इस लॉकर से जुड़े हैं। वर्तमान में देश में करीब 40 करोड़ स्मार्ट फोन यूजर हैं। जबकि डिजी लॉकर का इस्तेमाल केवल 1.23 करोड़ लोग ही कर रहे हैं। यानी स्मार्ट फोन रखने वाले सिर्फ 3 फीसदी लोग ही डिजिटल लॉकर प्रयोग कर रहे हैं। जबकि आधार की संख्या (करीब 120 करोड़) के हिसाब से इसे देखें तो इसका इस्तेमाल केवल एक फीसदी लोग ही कर रहे हैं। बिना आधार के डिजी लॉकर से दस्तावेज नहीं ले सकते। दूसरी तरफ सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि डिजी लॉकर ने अब तक डिजिटल लॉकर अथॉरिटी से इसे चलाने का लाइसेंस भी नहीं लिया है। गौरतलब है कि डिजिटल लॉकर अथॉरिटी (डीएलए) के अंतर्गत ही डिजी लॉकर आता है। शेष | पेज 8 पर

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