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पांच साल की उम्र में हाथ कट गया, रनिंग शुरू की तो घुटना फ्रैक्चर हो गया, पर लगन ऐसी कि पदकों की झड़ी लगा दी

अमित कसाना|नई दिल्ली amit.kasana@dbcorp.in पेशे से टीचर और पैरा एथलीट कीर्ति चौहान (24) ने अपनी दिव्यांगता को मात देकर कामयाबी...

Dainik Bhaskar

Jun 11, 2018, 03:05 AM IST
पांच साल की उम्र में हाथ कट गया, रनिंग शुरू की तो घुटना फ्रैक्चर हो गया, पर लगन ऐसी कि पदकों की झड़ी लगा दी
अमित कसाना|नई दिल्ली amit.kasana@dbcorp.in

पेशे से टीचर और पैरा एथलीट कीर्ति चौहान (24) ने अपनी दिव्यांगता को मात देकर कामयाबी हासिल की। 1998 में पांच साल की उम्र में चारा काटने की मशीन से खेलते हुए उनका सीधा हाथ कलाई से कटकर अलग हो गया था। वह जब कॉलेज में पहुंचीं तो नेशनल लेवल की रनिंग चैंपियनशिप में भाग लेने से पहले प्रैक्टिस के दौरान दौड़ते हुए ट्रैक पर गिर गईं, जिससे घुटने में इंज्युरी हो गई लेकिन हिम्मत नहीं हारी। आज न केवल उन्होंने 100 मीटर नेशनल लेवल रनिंग और जेवेलिन थ्रो चैंपियनशिप में सिल्वर और कांस्य पदक हासिल किए हैं। बल्कि वे एडेड स्कूल में प्राइमरी टीचर हैँ और अब 800 मीटर रनिंग चैंपियनशिप की भी तैयारी कर रही हैं। वे प्रोफेसर बनना चाहती हैं।

जज्बा... मां ने संकल्प कर लिया था कि कीर्ति को बहुत कामयाब बनाना है

मां अनीता चौहान बताती हैं कि कीर्ति जब पांच साल की थी तो अपने पिता के गांव बागपत के पाली में गन्ना चूस रही थी। गन्ना जमीन पर गिरने से गंदा हो गया तो वह उसे चारा काटने की मशीन में डालकर काटने लगी। इसी दौरान उसका सीधा हाथ कट गया। उस समय घर में वह इकलौती संतान थी। हादसे को देख मेरी तो जान ही निकल गई क्योंकि इससे पहले कीर्ति की बड़ी बहन की 9 साल की उम्र में बीमारी से मौत हो चुकी थी। इस हादसे से दुखी कीर्ति की मां ने उसी दिन उसे कामयाब बनाने का संकल्प लिया। हालांकि, इसके बाद उनके चार बच्चे और हुए।

जुनून... बच्चे मजाक उड़ाते थे, 12वीं में दिव्यांग श्रेणी में जिला टॉप किया

2000 में दिल्ली शिफ्ट होने के बाद कीर्ति का परिवार मानसरोवर पार्क में रहने लगा। स्थानीय एडेड स्कूल में कीर्ति का एडमिशन कराया गया। लेकिन स्कूल में बच्चे उसकी दिव्यांगता का मजाक बनाते थे। कई बार कीर्ति स्कूल से घर वापस लौटती और खूब रोती थी और स्कूल न जाने की जिद करती थी। लेकिन हर बार माता-पिता उसे समझा-बुझाकर तो कभी डांटकर स्कूल भेज देते थे। कीर्ति ने भी अपना सारा गुस्सा पढ़ाई पर निकाला और जब पढ़ने में रुचि बनी तो कीर्ति ने 12वीं कक्षा में दिव्यांग श्रेणी में अपने जिले में टॉप कर 76% अंक प्राप्त किए।

कीर्ति प्राइमरी टीचर हैं और नेशनल चैंपियनशिप में 100 मी. रनिंग में जीत चुकी हैं सिल्वर

जोश... डाइट कोर्स के दौरान पैरा एथलीट बनने की ललक जगी

दरियागंज स्थित स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग से 2014 में डाइट का कोर्स करने के दौरान कीर्ति की पैरा एथलीट में रुचि जागी। वह रनिंग व जेवेलिन थ्रो करने लगीं। 2015 में 100 मीटर की नेशनल लेवल रनिंग चैंपियनशिप के लिए प्रैक्टिस के दौरान दौड़ते हुए ट्रैक पर गिरने से उसके घुटने में फ्रैक्चर हो गया। इससे 1 साल बर्बाद हो गया। लेकिन कीर्ति ने हिम्मत नहीं हारी और डॉक्टरों की निगरानी में व्यायाम और फिर कोचिंग करके रनिंग और जेवेलिन थ्रो में मेडल जीते।

2012 में 12वीं टॉप करने पर तत्कालीन सीएम शीला दीक्षित ने इंदिरा गांधी अवार्ड दिया।

संघर्ष के दिन... घंटों लिखने की प्रैक्टिस करती थीं

1998 : हाथ कटने से लिखने में परेशानी होती थी, रोजाना घंटों लेखन की प्रैक्टिस की, रोजमर्रा के काम अकेले नहीं कर पाती थीं तो धीरे-धीरे मां ने सब सिखाया

2014 : डाइट का कोर्स करने के दौरान पैरा एथलीट में रुचि जागी। रनिंग व जेवेलिन थ्रो करने लगीं।

2015 : नेशनल लेवल 100 मीटर की रनिंग चैम्पियनशिप की प्रैक्टिस के दौरान ट्रैक पर गिर गईं। इसमें पूरा एक साल बर्बाद हो गया।

2017 : पहाड़ी धीरज इलाके के लक्ष्मी देवी जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्राइमरी टीचर की नौकरी पाई। अब सुबह पैरा एथलीट की ट्रेनिंग और दोपहर में पढ़ाती हैं।

रंग लाई मेहनत...




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