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भारत की जीडीपी को 2017 में हिंसा से 80 लाख करोड़ रुपए का नुकसान

भारतीय अर्थव्यवस्था को 2017 में हिंसा की घटनाओं की वजह से 80 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। यह आकलन खरीद क्षमता के आधार...

Dainik Bhaskar

Jun 11, 2018, 03:05 AM IST
भारतीय अर्थव्यवस्था को 2017 में हिंसा की घटनाओं की वजह से 80 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। यह आकलन खरीद क्षमता के आधार पर किया गया है। यह नुकसान देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 9 प्रतिशत है और प्रति व्यक्ति के हिसाब से करीब 40 हजार रुपए (595.40 डॉलर) से अधिक है।

इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। आईईपी ने 163 देशों और क्षेत्रों के अध्ययन-विश्लेषण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है। वहीं हिंसा की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था को 996.30 लाख करोड़ रुपए (14.76 ट्रिलियन डॉलर) का नुकसान हुआ। यह वैश्विक जीडीपी का 12.4 प्रतिशत है। प्रति व्यक्ति के आधार पर यह 1.35 लाख रुपए (1988 डॉलर) होता है। आईईपी की रिपोर्ट में कहा गया है कि आकलन में हिंसा से पड़े प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष असर सहित दूसरे आर्थिक प्रभावों को शामिल किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया, 2017 के दौरान हिंसा का कुल ग्लोबल इकोनॉमी पर असर पिछले दशक के किसी भी अन्य साल से अधिक रहा है। मुख्य तौर पर आंतरिक सुरक्षा खर्च में वृद्धि के कारण हिंसा का वैश्विक आर्थिक प्रभाव 2016 की तुलना में 2017 में 2.1 प्रतिशत बढ़ा है।

आतंकवाद और राजनीतिक तनाव से बढ़ रहा संघर्ष

आईईपी की रिपोर्ट के अनुसार, एक दशक में अशांति बढ़ने की वजहों में आतंकवाद, मध्य एशिया में तनाव का बढ़ना, पूर्वी यूरोप व उत्तर-पूर्व एशिया में क्षेत्रीय तनाव और यूरोप-अमेरिका में राजनीतिक तनाव के चलते रिफ्यूजी संकट शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, इंसान को रोजाना घर, काम, दोस्तों के बीच संघर्ष का सामना करना पड़ता है। जातीय, धार्मिक और राजनीतिक समूहों के बीच यह संघर्ष और अधिक व्यवस्थित तरीके से होता है। हालांकि अधिकांश संघर्ष हिंसा में नहीं बदलते हैं।

सबसे शांत एशिया-प्रशांत

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कुछ गिरावट के बाद भी विश्व का सबसे शांत क्षेत्र बना हुआ है। लेकिन हिंसक अपराध, आतंकवाद के प्रभाव, राजनीतिक अस्थिरता और राजनीतिक आतंकवाद ने क्षेत्र की स्थिति को बिगाड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान दक्षिण एशिया में दो सबसे खराब देश बने हुए हैं। बांग्लादेश और म्यांमार में भी रोहिंग्या संकट के चलते तनाव बढ़ा है।

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