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सफदरजंग के नर्सिंग अटेंडेंट ने बेटी को फोन कर बताया- ओपीडी में रखे हैं क्रेडिट कार्ड, रुपए, फिर लगा ली फांसी

सफदरजंग अस्पताल के पांचवीं मंजिल स्थित स्किन डिपार्टमेंट की ओपीडी में नर्सिंग अटेंडेंट संजय (45) ने फांसी लगा ली।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 13, 2018, 03:05 AM IST

सफदरजंग अस्पताल के पांचवीं मंजिल स्थित स्किन डिपार्टमेंट की ओपीडी में नर्सिंग अटेंडेंट संजय (45) ने फांसी लगा ली। मंगलवार सुबह 10.10 बजे घटना का पता चलने पर पुलिस ने उसके शव को पंखे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव उसके परिजनों को सौंप दिया गया। हालांकि, खुदकुशी के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है। खुदकुशी करने से पहले सोमवार शाम 4 से 5 बजे के बीच विजय विहार निवासी चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी संजय ने बेटी से फोन पर बात की थी। उसने बेटी को बताया कि उसके क्रेडिट कार्ड, 10 हजार रुपए और अन्य सामान ओपीडी में कहां रखे हैं। रुपए किसे वापस करने हैं। इसके बाद उसने फांसी लगा ली।

एक्सपर्ट व्यू : दिमाग में केमिकल चेंज होने पर भी कई बार खुशमिजाज व्यक्ति को कोई बात चुभ जाती है और वह सुसाइड कर लेता है

चाबी सिक्योरिटी रूम में नहीं पहुंचने पर नर्स ने संजय को कई बार कॉल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला

पुलिस के मुताबिक, संजय की दो बेटियां और एक बेटा है। अस्पताल में उसकी ड्यूटी सुबह डॉक्टरों के कमरे खोलने और शाम को बंद करने की थी। सोमवार शाम 4 बजे स्किन डिपार्टमेंट की ओपीडी खत्म होने के बाद संजय ने ओपीडी रूम नंबर 526ए में ताला नहीं लगाया। शाम 4.30 बजे तक जब सिक्योरिटी रूम में ओपीडी की चाबी नहीं पहुंची तो वहां से डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. एके सक्सेना को फोन कर चाबी के बारे में पूछा गया। उन्होंने डिपार्टमेंट की नर्स को फोन कर चाबी की जानकारी मांगी। इसके बाद नर्स ने संजय को कई बार कॉल किया। वॉइस मैसेज भेजने के साथ वॉट्सएप भी किया। इसके बाद रात में उसके घर पर फोन किया गया, लेकिन संजय का कुछ पता नहीं चला। अगले दिन सुबह करीब 9.15 बजे स्टाफ जब पांचवीं मंजिल पर पहुंचा तो ओपीडी अंदर से बंद मिली। उसने इसकी सूचना अस्पताल प्रशासन को दी। इसके बाद कारपेंटर को बुलाकर किसी तरह ओपीडी का दरवाजा खोला गया तो संजय का शव लटकता मिला।

10 साल पहले संजय के भाई ने भी लगाई थी फांसी

पुलिस ने बताया कि 10 साल पहले संजय के भाई ने भी घर में फांसी लगा ली थी। वहीं, अस्पताल की नर्स ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि संजय अच्छा इंसान था। काम को लेकर कभी किसी ने उसकी शिकायत नहीं की।

मना करने पर भी हमेशा ईयरफोन लगाता था

एचओडी ने घटना के बारे में पुलिस को नहीं दिया बयान

घटना की जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को डिपार्टमेंट के सभी स्टाफ से पुलिस ने पूछताछ की। इस कारण ओपीडी देर से शुरू हुई। इस कारण मरीजों की लंबी लाइन लग गई थी। इससे मरीजों को परेशानी भी हुई। वहीं, सूत्रों ने बताया कि पुलिस जब डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. एके सक्सेना का बयान लेने पहुंची तो उन्होंने ऑफिशियल बयान देने से मना कर दिया।

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक स्टाफ ने बताया कि संजय हमेशा ईयरफोन लगाए रहता था। वह किसी भी बात का जवाब ‘हां-हूं’ में देता था। नर्सों ने कई बार हमेशा ईयरफोन लगाने से मना किया, लेकिन वह मानती ही नहीं था।

जरूरी नहीं है कि सुसाइड करने वाला डिप्रेशन में ही हो, मिलनसार व्यक्ति भी ऐसा कर सकता है: डॉ. ओम प्रकाश

उस परिवार को खास तौर पर संजीदा रहना चाहिए, जहां किसी ने सुसाइड अटेंप्ट किया हो: डॉ. ओम प्रकाश इहबास के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. ओम प्रकाश के मुताबिक, सुसाइड अपने आप में बीमारी है। जरूर नहीं है कि ऐसा करने वाला डिप्रेशन में हो। उस परिवार को खास तौर पर इस लेकर संजीदा रहना चाहिए, जिस परिवार में पहले किसी ने सुसाइड की हो। उन्होंने बताया कि अगर किसी ने कभी सुसाइड अटेंप्ट किया हो तो मानसिक रोग विशेषज्ञ से उसकी जांच जरूर करानी चाहिए। ये लोग दोबारा ऐसा कदम उठा सकते हैं। ऐसे लोग दिखने में सामान्य लगते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं। खुद को अकेला समझते हैं। डॉ. अोम प्रकाश के मुताबिक, कई बीमारियों जेनेटिक होती हैं। दिमाग में केमिकल चेंज होने पर भी कई बार खुशमिजाज और मिलनसार व्यक्ति को कोई बात चुभ जाती है और वह सुसाइड कर लेता है।

जरूर बयान देंगे एचओडी, यह उनकी जिम्मेदारी है

जिस कर्मचारी की मौत हुई है, उसका रिकॉर्ड अच्छा रहा है। उस पर कभी शिकायत नहीं आई। जांच के लिए कमेटी गठित की जाएगी। एचओडी बयान जरूर देंगे। यह उनकी जिम्मेदारी है। -डॉ. राजेंद्र शर्मा, एमएस, सफदरजंग

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