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हरियाणा के जींद में है ‘जख्मी जूतों का अस्पताल’

सोशल मीडिया पर चर्चित इस तस्वीर के बाद महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा की टीम ने नरसीराम को खोज निकाला।...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:10 AM IST
हरियाणा के जींद में है ‘जख्मी जूतों का अस्पताल’
सोशल मीडिया पर चर्चित इस तस्वीर के बाद महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा की टीम ने नरसीराम को खोज निकाला।

‘जख्मी जूतों के डॉक्टर’ को नया ‘अस्पताल’ बना कर देंगे आनंद महिंद्रा

नरसीराम के प्रचार के तरीके से प्रभावित महिंद्रा ने किया था ट्वीट- इन्हें आईआईएम में फैकल्टी होना चाहिए

एजेंसी| नई दिल्ली

महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने ‘जख्मी जूतों का हस्पताल’ चलाने वाले ‘डॉक्टर’ नरसीराम को ढूंढ़ निकाला है। अब महिंद्रा की डिजायन स्टूडियो टीम फटे-पुराने जूते-चप्पलों की मरम्मत करने वाले नरसीराम के लिए नई दुकान तैयार करने में जुट गई है, जहां वे जख्मी जूतों का इलाज आराम से कर सकेंगे। आनंद महिंद्रा ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

हरियाणा के जींद के पटियाला चौक पर फटे-पुराने जूते-चप्पलों की मरम्मत करने वाले नरसीराम ने ‘जख्मी जूतों का हस्पताल’ नाम से एक बैनर टांग रखा है। इसमें उन्होंने खुद को डॉ. नरसीराम बताया है। बैनर में अस्पताल की तर्ज पर जानकारियां दी गई हैं। मसलन ओ.पी.डी, सुबह 9 से दोपहर 1 बजे, लंच टाइम : दोपहर 1 से 2 बजे और शाम 2 से 6 बजे तक अस्तपाल खुला रहेगा। आगे लिखा है- ‘हमारे यहां सभी प्रकार के जूते जर्मन तकनीक से ठीक किए जाते हैं।’

यह बैनर कुछ दिन पहले आनंद महिंद्रा तक पहुंचा था। नरसीराम के प्रचार के इस तरीके से महिंद्रा काफी प्रभावित हुए थे। उन्होंने नरसीराम की फोटो को ट्वीट करते हुए लिखा था कि इस व्यक्ति से मैनेजमेंट छात्रों को मार्केटिंग के गुर सीखने चाहिए, इस व्यक्ति को आईआईएम में मार्केटिंग फैकल्टी होना चाहिए। महिंद्रा ने नरसीराम को आर्थिक मदद देने की पेशकश भी की थी। इसके बाद महिंद्रा समूह की टीम ने नरसीराम का पता लगाया था और उनसे मुलाकात की थी।

महिंद्रा की डिजाइन टीम ने नरसीराम की नई दुकान के लिए तैयार किए डिजाइन, दुकान में यही बैनर लगेगा

महिंद्रा की डिजाइन टीम ने नरसीराम के लिए दुकान के ऐसे तीन डिजाइन तैयार किए हैं।

नरसीराम के बारे में फिर से ट्वीट करते हुए महिंद्रा ने लिखा- ‘हरियाणा में हमारी टीम उनसे मिली और पूछा कि हम कैसे उनकी मदद कर सकते हैं। साधारण और नम्र नरसी जी ने पैसे नहीं मांगे। बस उन्होंने काम करने के लिए बेहतर जगह की जरूरत के बारे में बताया।’ महिंद्रा ने आगे लिखा कि उन्होंने मुंबई की अपनी डिजाइन स्टूडियो टीम से एक चलती-फिरती दुकान डिजाइन करने को कहा। उनकी जरुरत के हिसाब से उनके लिए नई चलती-फिरती दुकान तैयार की जाएगी।

हरियाणा के जींद में है ‘जख्मी जूतों का अस्पताल’
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