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लोन न लौटाने वाले मजे में, आम ग्राहकों पर जुर्माने का कहर

Dainik Bhaskar

Jun 12, 2018, 03:10 AM IST

News - करंट अफेयर्स पर 30 से कम उम्र के युवाओं की सोच रोहित झा, 22 इंटरनेशनल स्कूल ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्टडीज, नई...

लोन न लौटाने वाले मजे में, आम ग्राहकों पर जुर्माने का कहर
करंट अफेयर्स पर 30 से कम उम्र के युवाओं की सोच

रोहित झा, 22

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्टडीज, नई दिल्ली

twitter : RohitJha1996

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले 40 महीने में 38 करोड़ 80 लाख रुपए ऐसे ग्राहकों के खाते से जुर्माने के रूप में वसूले हैं, जिनके चेक पर हस्ताक्षर का मिलान नहीं हुआ। इस तरह एसबीआई ने सालाना औसतन 12 करोड़ रुपए अपने ग्राहकों के खाते से चेक बाउंस होने की स्थिति में काटे हैं। एक आरटीआई में हुए खुलासे के अनुसार चेक रिटर्न होने पर बैंक 150 रुपए चार्ज करता है उस पर फिर जीएसटी भी लगता है। यानी एक रिटर्न चेक का खामियाजा खाताधारक को 157 रुपए भुगतान करके चुकाना पड़ता है।

बैंकों की मनमानी सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अप्रैल से नवंबर 2017 के बीच उन खातों से 1,771 करोड़ रुपए कमा लिए हैं, जिनमें न्यूनतम बैलेंस नहीं था। न्यूनतम बैलेंस मेट्रो शहरों में 5000 और शहरी शाखाओं के लिए 3000 रुपए रखा गया है। स्टेट बैंक के पास 42 करोड़ बचत खाताधारक हंै, इनमें 13 करोड़ बेसिक बचत खाते और जनधन योजना के तहत खुले खातों को न्यूनतम बैलेंस न रखने की छूट होती है। बाकी बचे 29 करोड़ बचत खाताधारकों में जरूर ऐसे रहे होंगे जो अपने खाते में न्यूनतम बचत नहीं रख पाते होंगे, इसका संबंध उनकी आर्थिक स्थिति से होगा। इनके खाते से 100-50 काटते-काटते बैंक ने 1771 करोड़ उड़ा लिए। अगर इनके पास पैसा होता तो क्यों ये बैलेंस कम रखते? और इस गैरवाजिब शुल्क वसूली में बाकी बैंक भी पीछे नहीं है। पंजाब नेशनल बैंक ने इस जबरन वसूली से 97.34 करोड़ रुपए कमाए हैं। सेंट्रल बैंक ने 68.67 करोड़ रुपए और केनरा बैंक ने 62.16 करोड़ रुपए कमाए हैं। न जाने कितने ऐसे बैंकों का नाम सूची में है जो इस बहती गंगा में हाथ धोते नज़र आए।

मौजूदा वक्त में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया पर एनपीए का बोझ सबसे ज्यादा है। बैंक की हालत खस्ता है। वह उन लोगों से जुर्माना वसूल नहीं कर पा रहा है, जो उसके अरबों रुपए का लोन लेकर चंपत हो चुके हैं। आप अपनी गरीबी का रोना रोते रहिए, सिसकते रहिए न सरकार को कोई फर्क पड़ता है और बैंकों को।

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