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मेहुल चौकसी के कारण मार्च तिमाही में बैंकों का एनपीए 8,000 करोड़ रु. बढ़ेगा, बैंकों का मुनाफा भी घटने के आसार

चौकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्स जनवरी से कर्ज की किस्त नहीं चुका रही है

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2018, 08:05 AM IST
पीएनबी फ्रॉड मामले में मुंबई क पीएनबी फ्रॉड मामले में मुंबई क

नई दिल्ली. मेहुल चौकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्स का कर्ज फंसने के कारण जनवरी-मार्च तिमाही में बैंकों का एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट्स ) कम से कम 8,000 करोड़ रुपए बढ़ने वाला है। गीतांजलि ने जनवरी से मार्च के दौरान कर्ज पर ना तो ब्याज दिया है, ना ही मूल राशि का कोई हिस्सा लौटाया है। एक तिमाही में ईएमआई नहीं मिलने पर बैंकों को वह कर्ज एनपीए घोषित करना पड़ता है। इसके एवज में उन्हें मुनाफे का एक हिस्सा अलग रखना होगा, जिसे प्रोविजनिंग कहते हैं। इससे बैंकों का मुनाफा भी घटने के आसार हैं। बता दें कि मेहुल और नीरव मोदी ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 13,000 करोड़ रुपए का घोटाला किया था।

जनवरी से कर्ज की किस्त नहीं चुका रही है चौकसी की कंपनी

- गीतांजलि को बैंकों ने 2010-11 में कर्ज देना शुरू किया था। इलाहाबाद बैंक की अगुवाई में 21 बैंकों के कंसोर्टियम ने कंपनी को वर्किंग कैपिटल लोन दिया था। 2014 में आईसीआईसीआई बैंक कंसोर्टियम का लीड बैंक बना।

उस साल कंपनी दो महीने तक बैंकों को एक रुपया भी लौटाने में नाकाम रही थी। 2015 में इसके कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग भी की गई।

- एक बैंक के सीनियर अफसर ने बताया कि दिसंबर 2017 तक कंपनी कर्ज की नियमित सर्विसिंग कर रही थी, लेकिन जनवरी से यह रुक गया है।

इंडस्ट्री को दिया गया 20% कर्ज एनपीए बन गया

- दिसंबर 2017 में बैंकिंग सेक्टर का ग्रॉस एनपीए 8,40,958 करोड़ रुपए पहुंच गया। इसमें सबसे ज्यादा 72% हिस्सा इंडस्ट्री का ही था।

24% एनपीए एसबीआई का

बैंक एनपीए (करोड़ रुपए ) फीसदी में
एसबीआई 2,01,560 23.96%
पीएनबी 55,200 6.56%
आईडीबीआई 44,542 5.29%

72% एनपीए इंडस्ट्री के कारण

सेक्टर एनपीए (करोड़ रुपए ) फीसदी में
इंडस्ट्री 6,09,222 20.41%
सर्विसेज 1,10,520 5.77%
कृषि 69,600 6.53%

पीएनबी की ऑडिटिंग करने वाले 8 सीए को पूछताछ का नोटिस

- चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की शीर्ष बॉडी आईसीएआई ने पीएनबी के ब्रेडी हाउस ब्रांच की ऑडिटिंग करने वाले 8 ऑडिटरों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है। इन्होंने 2011-12 से 2016-17 के दौरान ब्रांच की ऑडिटिंग की थी। इसी अवधि में 13,000 करोड़ रुपए के घोटाले को अंजाम दिया गया।

- आईसीएआई के एक मेंबर ने बताया कि अभी बोर्ड इनकी प्राथमिक जांच करेगा। अभी यह नहीं कह सकते कि उनकी गलती है या नहीं।

आईसीआईसीआई-वीडियोकॉन केस: दो साल पहले आरबीआई को नहीं मिला था सबूत

- आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन ग्रुप को कर्ज देने की रिजर्व बैंक ने 2016 में जांच की थी, लेकिन तब ‘हितों के टकराव’ का कोई सुबूत नहीं मिला था। एक शिकायत मिलने के बाद पीएमओ ने यह मामला आरबीआई के पास जांच के लिए भेजा था।

- दस्तावेजों के मुताबिक, आरबीआई ने रिपोर्ट में लिखा कि वीडियोकॉन ग्रुप को 2012 में आईसीआईसीआई बैंक ने 1,750 करोड़ का लोन दिया। यह एसबीआई के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम का हिस्सा था। इसमें हितों के टकराव की कोई बात साबित नहीं हुई। हालांकि इसने दीपक कोचर की कंपनी न्यूपावर रिन्युएबल्स में मॉरिशस से फंडिंग के स्रोत पर सवाल उठाए थे।

क्या है एनपीए?

- बैंक लोन देने का काम करती है। कभी-कभी ऐसा होता है कि लोन लेना वाला बैंक को लाेन को चुका नहीं कर पाता है। इसके बाद बैंक उसे एक कानूनी कार्रवाई की हिदायत देते हुए नोटिस भेजती है। इसके बाद भी जब लोन चुकाया नहीं जाता तब वह एनपीए की श्रेणी में आता है। यानी ऋण की राशि और ब्याज चुकाने में नाकामयाब हो जाता है तो बैंक उस लोन को नॉन परफार्मिंग एसेट्स करार देती है।

मेहुल और नीरव मोदी ने पीएनबी को लगाया 13,000 करोड़ रुपए का चूना

- बता दें कि गीतांजलि जेम्स का प्रमोटर मेहुल चौकसी हीरा कारोबारी नीरव मोदी का मामा है। दोनों ने फर्जी लेटर ऑफ अंटरटेकिंग (एलओयू) के जरिए पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को 13,000 करोड़ रुपए का चूना लगाया है। दोनों जनवरी में ही देश छोड़कर जा चुके हैं। मुंबई की सीबीआई कोर्ट ने दोनों ने नाम गैर-जमानती वारंट जारी कर रखा है।

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